निजी अंग पकड़ना, पायजामे का नाड़ा खींचना ‘बलात्कार का प्रयास’?, सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के विवादास्पद आदेश को किया रद्द

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: February 18, 2026 14:59 IST2026-02-18T14:58:23+5:302026-02-18T14:59:02+5:30

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा एन वी अंजारी की पीठ ने कहा कि आपराधिक न्यायशास्त्र के स्थापित सिद्धांतों के स्पष्ट रूप से गलत प्रयोग के कारण विवादित आदेश को रद्द किया जाना चाहिए।

Grabbing breasts private part pulling pyjama string attempt rape SC sets aside Allahabad HC order Supreme Court ruled preparation to commit rape | निजी अंग पकड़ना, पायजामे का नाड़ा खींचना ‘बलात्कार का प्रयास’?, सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के विवादास्पद आदेश को किया रद्द

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Highlightsअदालत ने 10 फरवरी को एक स्वतः संज्ञान याचिका पर यह आदेश पारित किया था।स्तनों को पकड़ना और पायजामे की डोरी खींचना बलात्कार का अपराध नहीं है।केवल बलात्कार के अपराध को अंजाम देने की तैयारी के हैं, न कि प्रयास के।

नई दिल्लीः उच्चतम न्यायालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक विवादास्पद आदेश को रद्द करते हुए कहा है कि निजी अंग पकड़ना और पायजामे का नाड़ा खींचना ‘‘बलात्कार का प्रयास’’ है। उच्च न्यायालय ने अपने विवादित आदेश में कहा था कि निजी अंग पकड़ना और पायजामे का नाड़ा खींचना ‘‘बलात्कार करने की केवल तैयारी’’ हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा एन वी अंजारी की पीठ ने कहा कि आपराधिक न्यायशास्त्र के स्थापित सिद्धांतों के स्पष्ट रूप से गलत प्रयोग के कारण विवादित आदेश को रद्द किया जाना चाहिए।

अदालत ने 10 फरवरी को एक स्वतः संज्ञान याचिका पर यह आदेश पारित किया था, जिसमें उसने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश का संज्ञान लिया था, जिसमें कहा गया था कि केवल स्तनों को पकड़ना और पायजामे की डोरी खींचना बलात्कार का अपराध नहीं है।

उच्च न्यायालय के फैसले को रद्द करते हुए, शीर्ष न्यायालय ने यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पीओसीएसओ) अधिनियम के तहत दो आरोपियों के खिलाफ बलात्कार के प्रयास के मूल गंभीर आरोप को बहाल कर दिया। उपरोक्त तथ्यों को देखते हुए हम उच्च न्यायालय के इस निष्कर्ष से सहमत नहीं हो सकते कि आरोप केवल बलात्कार के अपराध को अंजाम देने की तैयारी के हैं, न कि प्रयास के।

पीठ ने कहा, "आरोपी व्यक्तियों द्वारा किया गया प्रयास स्पष्ट रूप से और अनिवार्य रूप से हमें इस निष्कर्ष पर ले जाता है कि प्रथम दृष्टया, शिकायतकर्ता और अभियोजन पक्ष द्वारा बलात्कार के प्रयास के प्रावधानों को लागू करने का मामला बनता है। अतः, आपराधिक न्यायशास्त्र के स्थापित सिद्धांतों के स्पष्ट रूप से गलत अनुप्रयोग के कारण विवादित निर्णय को रद्द किया जाना चाहिए।"

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि इन आरोपों को सरसरी तौर पर देखने से इसमें कोई संदेह नहीं रह जाता कि आरोपी व्यक्तियों ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 (बलात्कार) के तहत अपराध करने के पूर्व निर्धारित इरादे से कार्य किया। दिनांक 17 मार्च, 2025 का विवादित निर्णय रद्द किया जाता है, और विशेष न्यायाधीश (पीओसीएसओ), कासगंज द्वारा दिनांक 23 जून, 2023 को पारित मूल समन आदेश बहाल किया जाता है।

Web Title: Grabbing breasts private part pulling pyjama string attempt rape SC sets aside Allahabad HC order Supreme Court ruled preparation to commit rape

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