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कोविड उपचार में जरूरी दवाओं, उपकरणों की जमाखोरी, कालाबाजारी रोके सरकार : अदालत

By भाषा | Updated: May 10, 2021 20:18 IST

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नयी दिल्ली, 10 मई दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को केंद्र और दिल्ली सरकार से कहा कि वे दवाओं और ऑक्सीजन सांद्रक जैसे चिकित्सीय उपकरणों की जमाखोरी तथा कालाबाजारी को रोकने के लिए कदम उठाएं और इसके लिए अदालत के आदेश का इंतजार नहीं करें।

उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वह उन उपकरणों और दवाओं के संदर्भ में स्थिति रिपोर्ट दायर करे जिन्हें जमाखोरों व कालाबाजारी करने वालों से जब्त किया गया था। इसके साथ ही उसे इन दवाओं व उपकरणों को जारी करने के लिये उप जिलाधिकारियों द्वारा दिये गए आदेशों पर भी स्थिति रिपोर्ट देने को कहा गया है।

न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की पीठ एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें अनुरोध किया गया है कि अदालत कोविड-19 के मरीजों के उपचार के लिए आवश्यक दवाओं और चिकित्सा उपकरणों को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत जरूरी वस्तु घोषित करने का निर्देश दे।

पीठ ने कहा कि अगर कुछ करना है तो उसे “अदालत के आदेश का इंतजार किये बिना कीजिए।”

याचिका में दवाओं तथा उपकरणों की जमाखोरी एवं कालाबाजारी करने के मामलों की सुनवाई के लिए त्वरित अदालतों के गठन का भी अनुरोध किया गया है। पीठ ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय तथा दिल्ली सरकार की तरफ से पेश अतिरिक्त स्थायी अधिवक्ता अनुज अग्रवाल को इस याचिका पर नोटिस जारी किये।

पीठ ने यह भी निर्देशित किया कि कोविड-19 के उपचार से संबंधित दवाओं और उपकरणों की जमाखोरी व कालाबाजारी के खिलाफ उसके आदेश से सभी निचली अदालतों को भी अवगत करा कराया जाए और मामले में सुनवाई की अगली तारीख 18 मई तय की।

अदालत ने यह निर्देश दिल्ली निवासी मनीषा चौहान की याचिका पर दिया जिन्होंने विशेष त्वरित अदालतों में ऐसे सभी मामलों से निपटने के लिये विशेष लोक अभियोजकों को नियुक्त करने की भी मांग की है।

चौहान की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता संजीव सागर और नाजिया परवीन ने अदालत को बताया कि दवाओं और उपकरणों को आवश्यक सामग्री घोषित करने वाली अधिसूचना के अभाव में इनकी जमाखोरी व कालाबाजारी हो रही है। लोग इसका फायदा उठाना चाह रहे हैं और ऐसा लगता है कि निचली अदालतें इस मुद्दे पर उच्च न्यायालय के आदेश से अवगत नहीं हैं।

याचिका में कालाबाजारी तथा जमाखोरी में लिप्त लोगों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई करने की भी मांग की गई है।

सुनवाई के दौरान केंद्र ने पीठ से कहा कि उपकरणों का अधिकतम खुदरा मूल्य तय करने का सुझाव अच्छा है और वह इस मुद्दे को देखेगा।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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