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तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने के लिए सरकार को विधेयक लाना होगा: विशेषज्ञ

By भाषा | Updated: November 19, 2021 16:43 IST

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नयी दिल्ली, 19 नवंबर संविधान और विधि विशेषज्ञों ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र सरकार को तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को निरस्त करने के लिए संसद में विधेयक लाना होगा।

इन कानूनों को निरस्त किए जाने की मांग को लेकर किसान पिछले करीब एक साल से प्रदर्शन कर रहे थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए शुक्रवार को कहा कि तीनों कृषि कानूनों को निरस्त किया जाएगा और इसके लिए आवश्यक संवैधानिक प्रक्रिया को इस महीने शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में पूरा किया जाएगा।

पूर्व केंद्रीय विधि सचिव पी के मल्होत्रा ने कहा, ‘‘किसी कानून को निरस्त करने के मामले में संसद की शक्ति संविधान के तहत कानून लागू किए जाने के ही समान है।’’

सरकार को तीनों कानूनों को निरस्त करने के लिए एक विधेयक लाना होगा।

पूर्व लोकसभा महासचिव पी डी टी आचार्य ने कहा, ‘‘और कोई तरीका नहीं है।’’

आचार्य ने एक प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि सरकार तीनों कृषि कानूनों को एक निरस्तीकरण विधेयक के जरिए निरस्त कर सकती है।

उन्होंने कहा कि विधेयक के उद्देश्य एवं कारण संबंधी वक्तव्य में सरकार यह बता सकती है, वह तीनों कानूनों को निरस्त क्यों करना चाहती है।

मल्होत्रा ने कहा, ‘‘जब कोई निरस्तीकरण विधेयक पारित किया जाता है, तो वह भी कानून होता है।’’

उन्होंने कहा कि तीनों कृषि कानून लागू नहीं किए गए थे, लेकिन वे संसद द्वारा पारित कानून हैं, जिन्हें राष्ट्रपति की अनुमति मिली है और उन्हें संसद द्वारा ही निरस्त किया जा सकता है।

मोदी ने गुरु नानक जयंती पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि ये कानून किसानों के हित के लिए लाए गए थे। उन्होंने लोगों से क्षमा मांगी और कहा कि सरकार अपनी मंशा साफ होने के बावजूद किसानों के एक वर्ग को राजी नहीं कर पाई।

सरकार ने अगस्त 2015 में विपक्षी दलों के विरोध के बीच विवादास्पद भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को समाप्त होने की अनुमति दी थी। मोदी ने 30 अगस्त, 2015 को 'मन की बात' मासिक रेडियो कार्यक्रम के दौरान कहा था कि सरकार भूमि अधिग्रहण पर विवादास्पद अध्यादेश को फिर से लागू नहीं करेगी, जो अगले दिन (सोमवार, 31 अगस्त) को समाप्त हो रहा था।

उन्होंने राजनीतिक विरोधियों का स्पष्ट रूप से जिक्र करते हुए कहा था कि भूमि विधेयक को लेकर कई शंकाएं पैदा की गईं और किसानों में भय पैदा किया गया, जबकि राज्यों ने गांवों और ग्रामीणों के हित के लिए 2013 के कानून में संशोधन का सुझाव दिया था।

किसान उपज व्‍यापार एवं वाणिज्‍य (संवर्धन एवं सुविधा) विधेयक, किसानों (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) का मूल्‍य आश्‍वासन अनुबंध एवं कृषि सेवाएं विधेयक और आवश्‍यक वस्‍तु (संशोधन) विधेयक तीन कृषि कानून हैं, जिन्हें निरस्त करने की घोषणा की गई है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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