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सरकार किसानों को बांटने की कोशिश कर रही है : टिकैत

By भाषा | Updated: November 22, 2021 21:13 IST

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लखनऊ, 22 नवंबर भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के नेता राकेश टिकैत ने सोमवार को सरकार पर किसानों को बांटने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उसे उनके मुद्दों को हल करने के लिए उनसे बात करनी चाहिए, वरना "हम की नहीं जा रहे हैं ।"

टिकैत ने कहा कि किसानों को मोदी सरकार को यह समझाने में एक साल लग गया कि उसके तीन कृषि कानून नुकसान पहुंचाने वाले हैं और अफसोस है कि इन कानूनों को वापस लेते समय भी इस सरकार ने किसानों को बांटने की कोशिश की।

किसान नेता ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी देने वाले कानून की मांग पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए, जिसका उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए "समर्थन" किया था।

यहां किसान महापंचायत को संबोधित करते हुए टिकैत ने कहा, "उन्हें समझाने में हमें एक साल लग गया, हमने अपनी भाषा में अपनी बात कही, लेकिन दिल्ली में चमचमाती कोठियों में बैठने वालों की भाषा दूसरी थी। जो हमसे बात करने आए, उन्हें यह समझने में 12 महीने लग गये कि यह कानून किसानों, गरीबों और दुकानदारों के लिए नुकसान पहुंचाने वाले हैं।"

उन्होंने कहा, ‘‘वह एक साल में समझ पाये कि ये कानून नुकसान पहुंचाने वाले हैं। फिर उन्होंने कानूनों को वापस लिया। उन्होंने कानूनों को वापस लेकर सही काम किया, लेकिन किसानों को यह कहकर विभाजित करने की कोशिश की कि वे कुछ लोगों को कानूनों को समझाने में विफल रहे। हम ‘कुछ लोग’ हैं?’’

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के माफीनामे का जिक्र करते हुए कहा कि किसानों को उनकी उपज का सही दाम, माफी मांगने से नहीं बल्कि नीति बनाने से मिलेगा ।

उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री देश के सामने माफी मांग सकते हैं, लेकिन देश के सामने माफी मांगने से किसानों को उनकी फसलों की सही कीमत नहीं मिलती है। एमएसपी की गारंटी के लिए कानून बनाने पर उन्हें वाजिब दरें मिलेंगी। देश की जनता अब जागरूक हो गई है।''

केंद्र पर हमला करते हुए उन्होंने कहा, "ऐसा लगता है कि पूरा देश एक निजी 'मंडी' (बाजार) बनने जा रहा है। हमारा संघर्ष जारी रहेगा। यह हम नहीं हैं जिन्होंने 'संघर्ष विश्राम' की घोषणा की। यह सरकार थी, जिसने 'संघर्ष विश्राम' घोषित किया था। हमने प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है, क्योंकि हमारे पास कई अन्य मुद्दे हैं।’’

टिकैत ने इस दावे का भी गलत बताया कि एमएसपी के लिए एक समिति बनाई गई है। उन्होंने कहा कि यह झूठ है।

उन्होंने कहा कि बीज, डेयरी और प्रदूषण समेत अन्य मुद्दों को हल करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, ''हमारा संघर्ष जारी रहेगा। सरकार को किसानों से जुड़े मुद्दों पर बात करनी चाहिए वरना हम कही नहीं जा रहे हैं। पूरे देश में बैठकें होंगी और हम लोगों को आपके काम के बारे में बताएंगे।"

उन्होंने कहा, "2011 में, जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब वह मुख्यमंत्रियों की उस आर्थिक समिति के प्रमुख थे, जिससे भारत सरकार ने पूछा था कि एमएसपी के बारे में क्या किया जाना है? समिति ने तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को सुझाव दिया था कि एमएसपी की गारंटी देने वाले कानून की जरूरत है। इस समिति की रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय में पड़ी है। किसी नयी समिति की जरूरत नहीं है और न ही देश के पास इतना ज्यादा समय है।'

टिकैत ने कहा, "प्रधानमंत्री को देश के सामने स्पष्ट जवाब देना होगा कि क्या वह उस समिति के सुझाव को स्वीकार करेंगे जिसका वह हिस्सा थे।"

मोदी सरकार की हालिया घोषणा पर उन्होंने कहा कि संघर्ष विराम की घोषणा किसानों ने नहीं, बल्कि सरकार ने की है और किसानों के सामने कई मुद्दे हैं।

उन्होंने मोदी सरकार से कहा, ‘‘वह किसानों से उनके मुद्दों पर बात करें, हम दूर नहीं जा रहे हैं। पूरे देश में बैठकें होंगी और हम लोगों को आपके काम के बारे में बताएंगे।’’

टिकैत ने किसानों से कहा, "वे आप सभी को हिंदू-मुस्लिम, हिंदू-सिख और जिन्ना में उलझाएंगे और देश को बेचते रहेंगे।"

किसान नेता ने कहा, "आप हिंदू-मुसलमान, हिंदू-सिख और (मुहम्मद अली) जिन्ना में भ्रमित रहेंगे, और ये लोग देश को बेचने का काम करेंगे। केवल तीन कृषि कानून ही हमारे मुद्दे नहीं हैं, बल्कि 17 और कानून हैं, जिन्हें संसद में लाया जाएगा। वे भी हमारे मुद्दे हैं, सरकार हमसे बात करे, नहीं तो हम नहीं जा रहे हैं। बातचीत के माध्यम से समाधान निकाला जाना चाहिए। देश के लोग आपसे नाराज हैं। हमारा यह आंदोलन पूरे देश में जारी रहेगा, और हम विरोध करना जारी रखेंगे ।’’

किसान संघों ने रविवार को कहा था कि वे अपना आंदोलन तब तक जारी रखेंगे जब तक कि एमएसपी की गारंटी देने वाले कानून और केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा की गिरफ्तारी सहित उनकी छह अन्य मांगों पर उनसे बातचीत शुरू नहीं हो जाती।

उन्होंने मीडिया पर भी हमला बोलते हुए कहा कि वे पिछले तीन दिनों से सिर्फ किसानों से सवाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "हमारे पास कई मुद्दे हैं जिनमें आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों से जुड़ा भी एक मुद्दा शामिल है।"

टिकैत ने यह भी आरोप लगाया कि किसानों को 4,000 करोड़ रुपये से अधिक गन्ने का भुगतान किया जाना है, और कहा कि उत्तर प्रदेश में एमएसपी पर कोई खरीद नहीं की जाती है।

उन्होंने यह भी कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा के कार्यक्रम निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 29 नवंबर तक जारी रहेंगे ।

टिकैत ने कहा कि सदन (संसद) में 29 नवंबर से 3 दिसंबर तक कानूनों को निरस्त कर दिया जाएगा, और अफवाह फैलाने का प्रयास किया जाएगा कि कानून निरस्त कर दिया गया है, फिर भी किसान अपने घरों को वापस नहीं जा रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हम भी चाहते हैं कि एसकेएम और केंद्र के बीच 20 प्रस्तावित कानूनों पर बातचीत होनी चाहिए। यह निर्णय लिया गया कि एक बार एमएसपी गारंटी कानून बन जाने के बाद, 'धरना' समाप्त हो जाएगा, और एक समिति बनाई जाएगी, जो इस पर और अन्य मुद्दे बातचीत करेगी।

एसकेएम द्वारा की गई अन्य मांगों में किसानों के खिलाफ मामले वापस लेना, आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले प्रदर्शनकारियों के लिए स्मारक बनाना और बिजली संशोधन विधेयक को वापस लेना शामिल है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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