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सरकार ने सीरम इंस्टीट्यूट, भारत बायोटेक से कोविड-19 टीकों की कीमत कम करने को कहा: आधिकारिक सूत्र

By भाषा | Updated: April 26, 2021 20:51 IST

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(पायल बनर्जी)

नयी दिल्ली, 26 अप्रैल केंद्र सरकार ने सोमवार को सीरम इंस्टीट्यूट और भारत बायोटेक से कहा कि वे अपने कोविड-19 टीकों की कीमत कम करें। सरकार ने इन दोनों कंपनियों को टीकों के दाम करने के लिए ऐसे समय कहा है जब विभिन्न राज्यों ने आलोचना करते हुए इन कंपनियों पर ऐसे बड़े संकट के दौरान मुनाफाखोरी का आरोप लगाया है।

कैबिनेट सचिव राजीव गौबा की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में टीके मूल्य निर्धारण के मुद्दे पर चर्चा की गई।

अब उम्मीद है कि दोनों कंपनियां अपने टीकों के लिए संशोधित मूल्य निर्धारण के साथ सामने आएंगी।

हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक ने अपने कोविड-19 टीके ‘कोवैक्सीन’ की कीमत राज्य सरकारों के लिए 600 रुपये प्रति खुराक और निजी अस्पतालों के लिए 1,200 रुपये प्रति खुराक निर्धारित की है।

वहीं पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) ने अपने कोविड-19 टीके 'कोविशील्ड' की राज्य सरकारों के लिए कीमत 400 रुपये प्रति खुराक और निजी अस्पतालों के लिए 600 रुपये प्रति खुराक घोषित की है।

दोनों टीके 150 रुपये प्रति खुराक की दर से केंद्र सरकार को उपलब्ध हैं।

केंद्र सरकार ने तीसरे चरण में अपनी टीकाकरण रणनीति में ढील दी है जिसके तहत देश में 18 वर्ष से अधिक आयु के लोग एक मई से टीका ले सकेंगे।

नयी रणनीति के तहत, टीका निर्माता अपनी मासिक सेंट्रल ड्रग्स लेबोरेटरी (सीडीएल) की 50 प्रतिशत खुराक की आपूर्ति केंद्र सरकार को करेंगे और शेष 50 प्रतिशत खुराक राज्य सरकारों और खुले बाजार में आपूर्ति करने के लिए स्वतंत्र होंगे।

सरकार ने कहा था कि निर्माताओं को 50 प्रतिशत आपूर्ति के लिए मूल्य की अग्रिम घोषणा करनी होगी जो राज्य सरकारों और खुले बाजार में उपलब्ध होगी।

कई राज्यों ने टीकों की अलग-अलग कीमतों पर आपत्ति जताई है और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि यह मुनाफाखोरी का समय नहीं है।

केरजीवाल ने टीका निर्माताओं से अपील की कि वे कीमत कम करके 150 रुपये प्रति खुराक करें। उन्होंने कहा कि कंपनियों के पास मुनाफ कमाने के लिए समय आगे मिलेगी लेकिन उन्हें इस समय मानवता दिखानी चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को जरूरत पड़ने पर टीकों की कीमत तय करनी चाहिए।

कांग्रेस ने टीकाकरण से जुड़ी नीति को ‘भेदभावपूर्ण और असंवेदनशील’ करार देते हुए रविवार को आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मुनाफाखोरों को 1.11लाख करोड़ रुपये की मुनाफाखोरी करने की अनुमति दे रही है।

पार्टी महासचिव और मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘‘45 साल से कम उम्र की आबादी 101 करोड़ है। उन्हें टीका लगाने के लिए, हमें 202 करोड़ खुराक की जरूरत है और इनकी लागत राज्यों या व्यक्तियों को स्वयं वहन करनी होगी। इसके आधार पर और यह मानते हुए कि राज्य 50 प्रतिशत टीकाकरण प्रदान करेंगे और व्यक्तियों को टीकाकरण लागत का 50 प्रतिशत वहन करना होगा दो टीका निर्माताओं - सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और भारत बायोटेक का लाभ - 1,11,100 करोड़ रुपये होगा।’’

उन्होने आरोप लगाया, ‘‘मोदी सरकार टीकाकरण की आड़ में मुनाफाखोरी की अनुमति देने की दोषी है। मोदी सरकार 18 से 45 वर्ष आयु के देश के नागरिकों को मुफ्त टीका उपलब्ध कराने की अपनी जिम्मेदार से पल्ला झाड़ने की भी दोषी है।’’

हालांकि, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) ने शनिवार को कोविशील्ड वैक्सीन का मूल्य शुरुआती कीमत के मुकाबले डेढ़ गुना तय करने के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि शुरुआती कीमत अग्रिम वित्त पोषण पर आधारित थी और अब उसे उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए और अधिक निवेश करने की जरूरत है।

हैदराबाद स्थित ‘भारत बायोटेक’ कंपनी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक कृष्णा एम एल्ला ने कहा था कि उनकी कंपनी केन्द्र सरकार को 150 रुपये प्रति खुराक की दर से कोवैक्सीन की आपूर्ति कर रही है।

एल्ला ने कहा, ‘‘हम यह बताना चाहते हैं कि कंपनी की आधी से अधिक उत्पादन क्षमता केन्द्र सरकार को आपूर्ति के लिए आरक्षित की गई है।’’

उन्होंने कहा कि कोविड-19, चिकनगुनिया, जीका, हैजा और अन्य संक्रमणों के लिए टीका विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए जरूरी है कि इस टीके की लागत वसूल हो।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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