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बिहार में 30 दिन पहले सीएम नीतीश कुमार ने किया था सत्तरघाट महासेतु का उद्घाटन, गंडक के बहाव से टूटा

By अनुराग आनंद | Updated: July 15, 2020 21:38 IST

सत्तरघाट महासेतु की लागत 263.48 करोड़ रुपये था और 1440 मीटर लंबी इस महासेतु पर आवागमन से शुरू हो गई थी।

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ठळक मुद्देपिछले दिनों सीएम नीतीश कुमार ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इसका उद्घाटन किया था।महासेतू का निर्माण होने से शिवहर, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर, दरभंगा से नेपाल की दूरी कम हो गई है। गंडक नदी में पानी के बहाव का स्तर बढ़ने व रेत तेज होने की वजह पानी का दवाब महासेतु झेल नहीं पाया।

पटना:बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने 30 दिन पहले ही 264 करोड़ की लागत से बने सत्तरघाट माहसेतु का उद्घाटन किया था। अब गंडक नदी में पानी के बहाव का स्तर बढ़ने व रेत तेज होने की वजह पानी का दवाब महासेतु झेल नहीं पाया और टूट गया। 

न्यूज 18 के मुताबिक, 16 जून को सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) ने पटना से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस महासेतू का उद्घाटन किया था।

गंडक नदी के रास्ते सारण-तिरहुत प्रमंडलों को जोड़ती महासेतु-

बता दें कि गंडक नदी के रास्ते सारण-तिरहुत प्रमंडलों को जोड़ने वाली सत्तरघाट महासेतु का उद्घाटन पिछले दिनों सीएम नीतीश कुमार ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया था। उद्घाटन के बाद उन्होंने महासेतु जनता को समर्पित कर दिया था। 

263.48 करोड़ की लागत से 1440 मीटर लंबी इस महासेतु पर आवागमन से शुरू हो गई थी। महासेतू का निर्माण होने से शिवहर, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्णिया जिलों के अलावा पड़ोसी देश नेपाल की दूरी कम हो गई है।  

अप्रैल, 2012 में इसका शिलान्यास हुआ था-

बता दें कि यह पुल गोपालगंज के बैकुंठपुर से पूर्वी चंपारण के चकिया को जोड़ रहा है। इससे सीवान, छपरा, गोपालगंज होते हुए एनएच-28 के जरिये उत्तर बिहार के अधिसंख्य जिलों की संपर्कता हो गई। इस पुल से पटना से मशरख होते हुए रक्सौल तक सीधा रास्ता उपलब्ध हो गया। अप्रैल, 2012 में इसका शिलान्यास हुआ था। लेकिन, अब इस महासेतु के उद्घाटन के कुछ समय बाद ही गिर जाने से विपक्ष ने जांच की मांग की गई है। 

सबसे बड़ी उपलब्धि यह होगी कि सत्तरघाट महासेतु से पड़ोसी देश नेपाल की दूरी भी कई जिलों के लिए कम हो गई है। सीवान, सारण, गोपालगंज के अलावे उत्तर प्रदेश के देवरिया, कुशीनगर, बलिया, वाराणसी जिलों से नेपाल की दूरी सौ किलोमीटर तक कम हो गई है।

 

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