महाराष्ट्र की राजनीति में रातोंरात बड़ा उलटफेर हो गया। शनिवार सुबह बीजेपी ने एनसीपी के मुखिया शरद पवार के भतीजे अजित पवार के साथ मिलकर सरकार बना ली। बीजेपी के देवेंद्र फडनवीस ने शनिवार को राज भवन में दूसरे कार्यकाल के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। इसके साथ ही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की भी शपथ ली।
इस मामले पर बीजेपी के गिरीश महाजन ने कहा कि हम 170 विधायकों के साथ अपना बहुमत सिद्ध करेंगे। अजीत पवार ने अपने विधायकों के समर्थन वाला लेटर गवर्नर को सौंप दिया है और अजीत एनसीपी के लेजिस्लेटिव पार्टी लीडर हैं। इसका मतलब है सभी एनसीपी विधायकों का हमें समर्थन है।
वहीं शिवसेना नेता संजय राउत ने अजीत पवार पर निशाना साधा और कहा कि कहा कि कल 9 बजे तक ये महाशय (अजीत पवार) ने हमारे साथ बैठे थे, अचानक से गायब हो गये बाद में, वो नजर से नजर मिलाकर बात नहीं कर रहे थे, उसी से हमें शक भी हुआ था।
संजय राउत ने कहा कि अजीत पवार ने जो पाप किया है उससे शरद पवार का कोई लेना-देना नहीं है। एनसीपी चीफ शरद पवार ने दो बार उद्धव ठाकरे फोन किया किया है।
राउत ने कहा, अजीत पवार ने महाराष्ट्र की पीठ में खंजर घोपा, इससे शरद पवार का कोई संबंध नहीं है। यह धोखा महाराष्ट्र की जनता और छत्रपति शिवाजी महाराज के साथ हुआ है।
शुक्रवार की बैठक को लेकर राउत ने बताया, 'कल अजीत पवार बैठक में हमसे बात नहीं कर रहे थे। उनकी बॉडी लैंग्वेज ही अलग थी, शरद पवार को भी यह महसूस हो गया था। वह थोड़ी देर में बाहर चले गए थे और उनका फोन बंद हो गया था।
महाराष्ट्र में अजीत पवार के देवेंद्र फड़नवीस सरकार में शामिल होने के फैसले पर शरद पवार ने कहा है कि यह अजीत पवार का निजी फैसला है, एनसीपी का नहीं। यह साफ करना चाहता हूं कि हम इस फैसले का समर्थन नहीं करते हैं।
एनसीपी नेता अजित पवार ने शनिवार सुबह राज भवन में उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने सुबह एक समारोह में मुख्यमंत्री पद के लिये देवेंद्र फड़नवीस के साथ ही अजीत पवार को शपथ दिलाई। इस दौरान केवल आधिकारिक मीडिया ही मौजूद रही।देवेंद्र फड़नवीस ने कहा, ‘‘लोगों ने हमें स्पष्ट जनादेश दिया था लेकिन शिवसेना ने नतीजों के बाद अन्य दलों के साथ गठबंधन करने की कोशिश की जिसके बाद राष्ट्रपति शासन लगा। महाराष्ट्र को स्थायी सरकार की जरूरत है न कि ‘खिचड़ी’ सरकार की।’’
उपमुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने के बाद अजित पवार ने कहा, ‘‘24 अक्टूबर को नतीजे आने से लेकर अब तक कोई पार्टी सरकार नहीं बना पा रही थी। महाराष्ट्र में किसानों के मुद्दों समेत कई दिक्कतें थी इसलिए हमने एक स्थायी सरकार बनाने का फैसला किया।’’ सभी को हैरत में डालने वाले इस शपथ ग्रहण को शरद पवार का राजनीतिक मास्टरस्ट्रोक बताया जा रहा है।