गांधीवादियों ने 1947 में बापू के पीएमसीएच आगमन को याद किया, विरासती भवनों को नहीं ढहाने की अपील की

By भाषा | Updated: March 7, 2021 20:05 IST2021-03-07T20:05:14+5:302021-03-07T20:05:14+5:30

Gandhians remember Bapu's PMCH arrival in 1947, pleading not to demolish heritage buildings | गांधीवादियों ने 1947 में बापू के पीएमसीएच आगमन को याद किया, विरासती भवनों को नहीं ढहाने की अपील की

गांधीवादियों ने 1947 में बापू के पीएमसीएच आगमन को याद किया, विरासती भवनों को नहीं ढहाने की अपील की

पटना, सात मार्च देश की स्वतंत्रता प्राप्ति से तीन महीने पहले महात्मा गांधी अपनी पोती मनु के अपेंडिक्स के ऑपरेशन के लिये पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) आए थे। उस समय बहुत अधिक चिंतित बापू ने ऑपरेशन थियेटर में मनु के बराबर में बैठकर ऑपरेशन सर्जरी की पूरी प्रक्रिया देखी थी।

आज 74 साल के बाद गांधीवादी विद्वान और अनुयायी बांकीपुर जनरल अस्पताल के 100 साल से अधिक पुराने भवन के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। इसी भवन में 15 मई 1947 को वह ऑपरेशन हुआ था। इसके अलावा वे पीएमसीएच (बिहार और ओडिशा का पहला चिकित्सा कॉलेज) की अन्य विरासतों को लेकर भी चिंतित हैं, जिन्हें विशाल पुनर्विकास योजना के तहत ढहाए जाने की तैयारी है।

राज्य सरकार के इस फैसले से पीएमसीएच के भूतपूर्व सदस्यों, विरासत प्रेमियों और विद्वानों में नाराजगी है, जो पहले ही इन ऐतिहासिक ढांचों को न ढहाने और ''कुछ महत्वपूर्ण ऐतिहासिक इमारतों को पुनर्स्थापित और संरक्षित करने'' की अपील कर चुके हैं।

तीस जनवरी 1948 को दिल्ली के बिड़ला हाउस में गोलियों से हुए हमले में महात्मा गांधी की मौत मनु गांधी की बाहों में ही हुई थी। मनु स्वतंत्रता संग्राम में गांधी की कर्तव्यपरायण साथी और उनके जीवन इतिहास की वाचक रहीं।

पटना में गांधी संग्रहालय के निदेशक 82 वर्षीय रजी अहमद कहते हैं, ''मनु, गांधी के साथ कई बार बिहार आईं। एक बार वे दोनों बंगाल में दंगा प्रभावित इलाकों का दौर कर पटना आए थे। मनु के पेट में बहुत तेज दर्द हो रहा था और उन्हें अपेंडिक्स के ऑपरेशन के लिये पीएमसीएच ले जाया गया। ''

कुछ साल पहले गुजरात से अनुवाद की गईं मनु गांधी की खुद की लेखनी और डायरियों में उस मेडिकल ऑपरेशन का जिक्र मिलता है। मनु खुद भी एक युवा स्वतंत्रता सेनानी थीं, जो हर समय अपने दादा के साथ रहीं और उनके साथ जेल भी गईं।

खुद को गांधीवादी बताने वाले अहमद ने कहा कि वह इस बात को लेकर ''हैरान'' हैं कि गांधी की विरासत से जुड़ी पुरानी इमारतों को संरक्षित करने के बजाय सरकार इन भवनों को ध्वस्त करने की योजना पर काम कर रही है, जिन्हें इस मशहूर संस्थान के विकास के लिये बनाया गया था।

उन्होंने पूछा, ''क्या गांधी की विरासत को संजोए बिना कोई सिटी स्मार्ट हो सकती है।''

उन्होंने नाराजगी भरे लहजे में कहा, ''साल 1917 में चंपारण यात्रा दौरान गांधी ट्रेन के जरिये पटना के पुराने बांकीपुर स्टेशन आए थे, जो अब नहीं रहा। उसी साल पटना की अपनी पहली यात्रा के दौरान गांधी जिस सिकंदर मंजिल में ठहरे थे, वह वास्तव में ढह चुकी है। और अब पीएमसीएच भवन। अगर हम गांधी की वास्तविक विरासत को संरक्षित नहीं रख सकते तो शताब्दी वर्ष या सालगिरह मनाने का क्या मतलब।''

दिल्ली में स्थित राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय के निदेशक ए अन्नामलाई कहते हैं कि 15 मई 1947 को पटना में मौजूद गांधी ने अपनी डायरी में लिखा था, ''मनु के पेट में बहुत तेज दर्द है। उसे उल्टी हुई है और शरीर का तापमान भी बढ़ा हुआ है। मैंने उसका इलाज करने वाले डॉक्टरों से बात की। मनु के अपेंडिक्स से पीड़ित होने के बारे में पता चला है। मुझे उसे तुरंत अस्पताल ले जाना है। रात के समय उसका ऑपरेशन होगा।''

अन्नामलाई ने कहा, ''गांधीजी ने ऑपरेशन थियेटर में मौजूद रहने की जिद की और डॉक्टरों ने उन्हें इसकी इजाजत दे दी। वह मुंह पर मास्क लगाकर ऑपरेशन टेबल पर उनके बराबर में बैठ गए। दुर्भाग्यपूर्ण है कि लोग इस घटना के बारे में नहीं जानते। बिहार सरकार को पीएमसीएच के पुराने अस्पताल के भवन को संरक्षित करते हुए गांधी की विरासत की रक्षा करनी चाहिये। इसे ढहाने से सांस्थानिक विरासत और बापू की विरासत मिट जाएगी।

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Web Title: Gandhians remember Bapu's PMCH arrival in 1947, pleading not to demolish heritage buildings

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