निकाय चुनाव के बाद झारखंड में 'खेला'?, झामुमो-भाजपा में समझौता, हेमंत सरकार से आउट कांग्रेस-राजद?, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने किया दावा
By एस पी सिन्हा | Updated: February 14, 2026 15:23 IST2026-02-14T15:22:24+5:302026-02-14T15:23:37+5:30
सत्ता की ताकत में खुद को मजबूत करने बाद झामुमो एक बार फिर भाजपा से हाथ मिलाने की कोशिश कर रही है।

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रांचीः झारखंड में निकाय चुनाव दलगत नहीं होने के बावजूद सभी दलों ने अपने-अपने खिलाड़ी चुन रखे हैं। विधानसभा चुनाव के बाद शहरों की सत्ता में अपने प्रतिनिधि बिठाने के लिए हर दल ने अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है। इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी के दावे ने प्रदेश की सियासत में भूचाल ला दिया है। केएन त्रिपाठी ने राज्य की सत्ता में बड़ा फेरबदल होने का दावा किया है। उनका कहना है कि निकाय चुनाव के बाद प्रदेश में भाजपा और झामुमो के बीच गठबंधन हो जाएगा और प्रदेश में एनडीए की सरकार बनेगी। केएन त्रिपाठी ने कहा कि झारखंड में झामुमो अब भाजपा के साथ मिल चुकी है। इसका प्रमाण 15-20 दिनों में निकाय चुनाव के बाद दिखाई देगा। उन्होंने कहा कि इस संबंध में भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हरी झंडी दे दी है।
डील फाइनल हो चुकी है। निकाय चुनाव के बाद यह सरकार बदलने जा रही है। झारखंड में बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिलेगा। केएन त्रिपाठी ने दावा किया किया कि झामुमो हमेशा से भाजपा से संपर्क में रहती है और जब भी कमजोर होती है, तो कांग्रेस के साथ मिलकर सत्ता में आती है। झामुमो ने पहले अर्जुन मुंडा के साथ मिलकर सरकार बनाई, फिर कांग्रेस के साथ आ गई।
इसके बाद पावर में आकर जब मजबूत हुई, तो फिर कांग्रेस का साथ छोड़ कर अलग हो गई। अब सत्ता की ताकत में खुद को मजबूत करने बाद झामुमो एक बार फिर भाजपा से हाथ मिलाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने दावा किया है कि झामुमो और भाजपा के बीच डील हो चुकी है और इसका प्रमाण निकाय चुनाव के बाद दिखाई देगा।
उनका दावा है कि प्रदेश में अब झामुमो पूरी तरह से भाजपा के साथ मिलकर काम कर रही है। हालांकि, केएन त्रिपाठी के दावों का भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने खंडन किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा पूरी तरह से आगामी चुनाव की तैयारी में जुटी हुई है। उन्होंने वर्तमान सरकार के एक वर्ष पूरे होने पर भी कोई ठोस उपलब्धि नहीं होने का आरोप लगाया।
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड के लोगों को केवल सपने दिखाए जा रहे हैं, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और है। उन्होंने कहा कि जब सरकार की प्राथमिकता निजी लाभ होगी, तो स्वाभाविक है कि सरकारी खजाना खाली रहेगा और विकास कार्य प्रभावित होंगे। बता दें कि केएन त्रिपाठी डाल्टेनगंज के विधायक रहे हैं।
इस बार निकाय चुनाव में मेदिनीनगर सीट के लिए मेयर पद पर उनकी बेटी नम्रता त्रिपाठी चुनाव मैदान में है। जबकि सरकार में शामिल झामुमो की ओर से मेदिनीनगर नगर निगम चुनाव में मेयर पद की प्रत्याशी पूनम सिंह को समर्थन दिया जा रहा है। इससे केएन त्रिपाठी झामुमो से नाराज चल रहे हैं और लगातार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर निशाना साध रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि निकाय चुनाव दलीय आधार पर नहीं हो रहा है, लेकिन सभी प्रमुख राजनीतिक दलों की ओर से चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशियों को समर्थन दिया जा रहा है। बता दें कि झारखंड में अभी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व झामुमो, कांग्रेस, राजद और वामदलों की सरकार चल रही है. सत्ता में शामिल सहयोगी दलों से मतभेद की शुरुआत बिहार चुनाव के दौरान से हुई थी।
झामुमो उस वक्त महागठबंधन के साथ मिलकर बिहार चुनाव लड़ना चाहती थी, लेकिन राजद ने उसे एक भी सीट देना जरूरी नहीं समझा था। इसके बाद से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के मंच पर कांग्रेस और राजद के विधायकों को जगह नहीं दी जा रही है।