नयी दिल्ली, आठ फरवरी मानवाधिकारों की पैरोकारी करने वाले गैर सरकारी संगठन 'अनहद' ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘आंदोलनजीवी’ टिप्पणी की निंदा करते हुए कहा कि अगर आंदोलनकारी नहीं होते तो आजादी ही नहीं मिलती।
राज्यसभा में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण पर पेश धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कृषि आंदोलन को शह देने वालों को आड़े हाथों लिया और कहा कि पिछले कुछ समय से इस देश में ‘‘आंदोलनजीवियों’’ की एक नई जमात पैदा हुई है जो आंदोलन के बिना जी नहीं सकती, ऐसे में देश को उनसे सावधान रहना चाहिए।
एक बयान में एक्ट नाउ फॉर हार्मनी एंड डेमोक्रेसी (अनहद) ने कहा, ‘‘हम देश को यह याद दिलाना चाहते हैं कि अगर आंदोलनकारी नहीं होते तो स्वतंत्रता नहीं मिलती।’’
उसने कहा, ‘‘ देश के आंदोलनकारियों ने एक ऐसे समाज की लड़ाई लड़ी जो न्यायसंगत, बहुलतावादी और विविधता के सिद्धांत पर आधारित था न कि उनके ब्रांड के आंदोलन के जैसा जिसने नफरत एवं अशांति फैलायी।
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