फारेस्ट रेंजरों को हथियार उपलब्ध कराने का आदेश दिया जा सकता है : न्यायालय

By भाषा | Updated: January 8, 2021 14:58 IST2021-01-08T14:58:37+5:302021-01-08T14:58:37+5:30

Forest Rangers can be ordered to provide arms: Court | फारेस्ट रेंजरों को हथियार उपलब्ध कराने का आदेश दिया जा सकता है : न्यायालय

फारेस्ट रेंजरों को हथियार उपलब्ध कराने का आदेश दिया जा सकता है : न्यायालय

नयी दिल्ली, आठ जनवरी उच्चतम न्यायालय ने वन्यजीवों के शिकारियों और तस्करों द्वारा फारेस्ट रेंजरों पर हमले की घटनाओं पर शुक्रवार को चिंता व्यक्त की और कहा कि वह इन अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये उन्हें हथियार, बुलेट प्रूफ जैकेट और हेलमेट उपलब्ध कराने के बारे में आदेश पारित कर सकता है।

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने कहा कि वन अधिकारियों का मुकाबला बड़ी ताकतों से है और तस्करों द्वारा लाखों डालर हड़पे जा रहे हैं। पीठ 25 साल पुरानी टी एन गोदावर्मन तिरुमुल्पाद की जनहित याचिका में दाखिल एक अंतरिम आवेदन पर विचार कर रही थी।

पीठ ने कहा कि इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय को शामिल किया जाना चाहिए। इसमें अलग से वन्यजीव प्रकोष्ठ होना चाहिए। यह सब अपराध से अर्जित धन है।

पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान के इस कथन का संज्ञान लिया कि वन अधिकारियों पर होने वाले हमलों में भारत की हिस्सेदारी 38 प्रतिशत है। उन्होंने राजस्थान, मप्र और महाराष्ट्र में वन अधिकारियों पर हमले की घटनाओं की ओर पीठ का ध्यान आकर्षित किया।

दीवान ने कहा, ‘‘फारेस्ट रेंजरों पर बर्बरतापूर्ण हमले किये जा हैं। यही नहीं, ये लोग इन अधिकारियों के खिलाफ भी मामले दर्ज करा रहे हैं।’’

पीठ ने कहा, ‘‘हम जब असम जाते हैं, तो (देखते हैं) उन्हें हथियार दिये गये हैं जबकि महाराष्ट्र में उनके पास सिर्फ ‘लाठी’ होती है।’’

पीठ ने कहा कि सालिसीटर जनरल तुषार मेहता, श्याम दीवान और एडीएन राव द्वारा फारेस्ट रेंजरों की रक्षा के बारे में वक्त्व्य दिये जाने के बाद इस मामले में उचित आदेश पारित किया जायेगा।

आवेदन पर सुनवाई शुरू होते ही पीठ ने कहा, ‘‘हम निर्देश देंगे कि अधिकारियों को हथियार, बुलेट प्रूफ जैकेट और हेलमेट दिये जायें। कर्नाटक में वन अधिकारियों को ‘चप्पलों’ में ही घूमते देखा जा सकता है और वन्यजीवों के शिकार करने वाले उन्हें झापड़ तक मार देते हैं। हम चाहते हैं कि सुनवाई की अगली तारीख पर सालिसीटर जनरल वक्तव्य दें कि कर्मियों को हथियार दिये जायेंगे।’’

पीठ ने अपने आदेश में इस बात को दर्ज किया कि विभिन्न राज्यों में फारेस्ट रेंजरों पर हमले किये जा रहे हैं और उन्हें अपने कर्तव्य से विमुख करने के लिये उनके खिलाफ झूठे मामले दर्ज कराए जा रहे हैं।

पीठ ने कहा, ‘‘यह कल्पना करना भी मुश्किल है कि इतने व्यापक भूक्षेत्र में गैरकानूनी गतिविधियां जारी रखने वाले इन शिकारियों से किस तरह वन अधिकारियों की रक्षा की जाये। घातक हथियारों से लैस शिकारियों की तुलना में निहत्थे वन अधिकारियों द्वारा किसी भी कानून को लागू करा पाना बहुत ही मुश्किल है।’’

पीठ ने इस मामले की सुनवाई चार सप्ताह के लिये स्थगित करते हुये कहा कि संबंधित अधिवक्ताओं के वक्तव्यों को ध्यान में रखते हुये उचित आदेश पारित किया जायेगाा।

पीठ ने कहा कि इन शिकारियों द्वारा वन अधिकारियों पर हमला किये जाने की स्थिति में ये अधिकारी जंगल में मदद के लिये किसी को बुला भी नहीं सकते हैं। पीठ ने कहा कि जिस तरह शहरों में मदद के लिये पुलिस को बुलाया जा सकता है, उसी तरह की कोई न कोई व्यवस्था वन अधिकारियों के लिये भी होनी चाहिए।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘ इस तरह के अपराधों पर अंकुश पाने की आवश्यकता है। पिछले महीने मैं महाराष्ट्र के जंगल में था और मैंने खुद देखा की वन अधिकारियों के पास हथियार तक नहीं थे। हमला होने की स्थिति में वे अपनी रक्षा किस तरह करेंगे। सालिसीटर जनरल, हम चाहते हैं कि आप सभी संभावनाओं को तलाशें। इस तरह के अपराधों पर अंकुश लगाने की जरूरत है।

दीवान ने कहा कि महाराष्ट्र और राजस्थान में वन अधिकारियों के खिलाफ मामले दर्ज कराये गये हैं और उन पर हमले भी हुये हैं। उन्होंने कहा कि इन राज्यों से पूछा जाना चाहिए कि इस तरह की घटनाओं में क्या कार्रवाई की गई।

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Web Title: Forest Rangers can be ordered to provide arms: Court

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