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भारत-बांग्लादेश के बीच पांचवां रेल लिंक हल्दीबाड़ी-चिल्लाहाटी शुरू

By भाषा | Updated: December 17, 2020 21:45 IST

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नयी दिल्ली, 17 दिसंबर भारत-पाकिस्तान के बीच 1965 में हुए युद्ध के समय से बंद पड़े हल्दीबाड़ी-चिल्लाहाटी रेलवे लिंक का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी बांग्लादेशी समकक्ष शेख हसीना ने बृहस्पतिवार को उद्घाटन किया। इसके साथ ही पड़ोसी देशों के बीच रेल लिंक की संख्या बढ़कर पांच हो गई है।

नए रेल लिंक के शुरू होने के साथ ही बांग्लादेश से आने वाले पर्यटक नेपाल और भूटान के साथ-साथ दार्जिलिंग, सिक्किम, दोआर क्षेत्रों की यात्रा कर सकेंगे। रेलवे ने कहा कि नए रेल लिंक से दक्षिण एशिया के इन देशों की आर्थिक गतिविधियों को भी लाभ होगा।

मोदी और हसीना ने संयुक्त रूप से भारत के हल्दीबाड़ी और बांग्लादेश के चिल्लाहाटी के बीच रेलवे लिंक का ऑनलाइन शिखर सम्मेलन में उद्घाटन किया।

बाद में बांग्लादेश के रेल मंत्री मोहम्मद नुरुल इस्लाम सुजान ने चिल्लाहाटी स्टेशन से एक मालगाड़ी को हरी झंडी दिखाई जो अंतरराष्ट्रीय सीमा को पार करके भारत पहुंची।

भारत और बांग्लादेश दोनों ही देशों में रेलवे नेटवर्क ब्रिटिश शासन की देन है। 1947 में विभाजन के बाद भारत और तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (1965 तक) के बीच सात रेलवे लिंक काम कर रहे थे।

रेलवे मंत्रालय द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, ‘‘फिलहाल भारत-बांग्लादेश के बीच चार रेलवे लिंक काम कर रहे हैं। ये हैं... पेट्रोपोल (भारत) से बेनापोल (बांग्लदेश), गेडे (भारत)-दर्शना (बांग्लादेश), सिंघबाद (भारत) - रोहनपुर (बांग्लादेश) और राधिकापुर (भारत) - बिरोल (बांग्लदेश)। 17 दिसंबर से शुरू हुआ हल्दीबाड़ी-चिल्लाहाटी रेलवे लिंक भारत-बांग्लादेश के बीच पांचवां लिंक है।’’

विज्ञप्ति के अनुसार, ‘‘हल्दीबाड़ी-चिल्लाहाटी रेलवे लिंक 1965 तक काम कर रहा था। विभाजन के दौरान यह कलकत्ता-सिलीगुड़ी ब्रॉड गेज मुख्य लाइन का हिस्सा था। असम और उत्तरी बंगाल जाने वाली ट्रेनें विभाजन के बाद भी पूर्वी पाकिस्तान से होकर जाती थीं। उदाहरण के लिए सियालदह से सिलीगुड़ी जाने वाली ट्रेन दर्शना से पूर्वी पाकिस्तान की सीमा में प्रवेश करती और हल्दीबाड़ी-चिल्लाहाटी लिंक के रास्ता वापस भारत लौटती। लेकिन 1965 के युद्ध ने भारत और तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान के बीच रेलवे लिंक को प्रभावी तरीके से बंद कर दिया। ऐसे में भारत के पूर्वी सेक्टर के लिए रेलवे का विभाजन 1965 में हुआ। ऐसे में इस लिंक को फिर से शुरू करने के महत्व को आसानी से समझा जा सकता है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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