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किसान नए कृषि कानूनों को ‘खत्म’ कर देंगे, पवार ने किया आगाह

By भाषा | Updated: January 25, 2021 17:56 IST

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मुंबई, 25 जनवरी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) अध्यक्ष शरद पवार ने सोमवार को कहा कि केंद्र संविधान की अवहेलना कर और बहुमत के बल पर कोई कानून पारित करा तो सकता है लेकिन जब आम आदमी और किसान उठेंगे तो नए कानून और सत्तारूढ़ दल के खत्म होने तक वे चुप नहीं रहेंगे।

पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर्दी के मौसम में पिछले दो महीने से केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं के पास आंदोलन कर रहे किसानों की हालत की सुध नहीं ली।

दिल्ली के पास आंदोलन कर रहे किसानों के साथ एकजुटता प्रकट करने के लिए एक रैली को संबोधित करते हुए पवार ने महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के ऐन मौके पर गोवा जाने के लिए भी आलोचना की, जब राज्य के किसान उन्हें कृषि कानूनों के खिलाफ एक ज्ञापन सौंपना चाहते थे।

कोश्यारी गोवा का भी अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं।

पवार ने कहा कि कोश्यारी के पास पिछले साल अदाकारा कंगना रनौत से मिलने का समय था लेकिन राज्य के किसानों से मिलने के लिए उनके पास समय नहीं है। बीएमसी द्वारा कंगना के कार्यालय परिसर का एक हिस्सा ढहाए जाने के बाद अदाकारा ने राज्यपाल से मुलाकात की थी।

महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री और राज्य के कांग्रेस प्रमुख बालासाहेब थोराट, ऑल इंडिया किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्ला और अन्य ने दक्षिण मुंबई में आजाद मैदान में रैली को संबोधित किया।

रैली के दौरान पवार ने कहा, ‘‘आप संसद की गरिमा का ध्यान नहीं रखते हुए, संविधान की अवहलेना कर, संसदीय व्यवस्था को बर्बाद कर बहुमत के बल पर कानून पारित कर सकते हैं। लेकिन, एक चीज याद रखना चाहिए जब देश के आम आदमी और किसान उठेंगे तो, चाहें आप हों या कानून, वे आपको और कानूनों को खत्म करने तक चुप नहीं बैठेंगे।

पवार ने कहा, ‘‘पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तरप्रदेश, राजस्थान के किसान 60 दिनों से दिल्ली के पास प्रदर्शन कर रहे हैं। क्या देश के प्रधानमंत्री ने उनकी (किसानों) सुध ली।’’

पवार ने सवाल किया, ‘‘यह कहा गया कि किसान पंजाब के हैं। क्या पंजाब का मतलब पाकिस्तान है।’’

राकांपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि कृषि कानून विस्तृत चर्चा के बिना संसद में पारित किए गए जबकि विपक्षी दलों ने संबंधित विधेयकों पर विस्तृत विचार-विमर्श का अनुरोध किया था।

उन्होंने कहा कि विधेयकों पर प्रवर समिति में चर्चा हो सकती थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

पवार ने कहा, ‘‘हमने महाराष्ट्र के इतिहास में ऐसा राज्यपाल नहीं देखा। लाखों लोग यहां आए हैं। वे राज्यपाल को ज्ञापन सौंपना चाहते थे। लेकिन राज्यपाल को गोवा जाना था। उनके पास कंगना से मिलने के लिए समय था किसानों से भेंट करने के लिए समय नहीं है।’’

उन्होंने कहा कि राज्यपाल की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वह किसानों से मुलाकात करते लेकिन उन्होंने अपने कर्तव्य का पालन नहीं किया।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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