लाइव न्यूज़ :

एमएसपी के मुद्दे पर अड़े किसान संगठन, सोमवार को लखनऊ में महापंचायत

By भाषा | Updated: November 21, 2021 21:21 IST

Open in App

नयी दिल्ली/लखनऊ, 21 नवंबर नरमी का कोई संकेत न दिखाते हुए किसान संगठनों ने घोषणा की कि वे न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी देने संबंधी कानून के लिए दबाव बनाने के वास्ते सोमवार को लखनऊ में महापंचायत के साथ ही अपने निर्धारित विरोध प्रदर्शनों पर अडिग हैं। वहीं, केंद्र सरकार तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की उनकी मांग को पूरा करने के लिए संसद में विधेयक लाने की तैयारी कर रही है।

सरकारी सूत्रों ने रविवार को कहा कि तीन कृषि कानूनों को रद्द करने से संबंधित विधेयकों को मंजूरी दिए जाने पर बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा विचार किए जाने की संभावना है ताकि उन्हें संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में पेश किया जा सके।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने कहा कि वे अपने निर्धारित विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे, जिसमें कृषि कानून विरोधी प्रदर्शनों का एक साल पूरा होने के उपलक्ष्य में 29 नवंबर को संसद तक मार्च भी शामिल है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुक्रवार को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की घोषणा किए जाने के बाद अपनी पहली बैठक में आंदोलनकारी किसान संगठनों के निकाय ने यह निर्णय लिया।

प्रदर्शन स्थलों में से एक सिंघू बॉर्डर पर संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा, “हमने कृषि कानूनों को निरस्त किए जाने की घोषणा पर चर्चा की। इसके बाद, कुछ फैसले लिए गए। एसकेएम के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम पहले की तरह ही जारी रहेंगे। 22 नवंबर को लखनऊ में किसान पंचायत, 26 नवंबर को सभी सीमाओं पर सभा और 29 नवंबर को संसद तक मार्च होगा।”

संगठन ने कहा कि एसकेएम आगे की कार्रवाई पर विचार करने के लिए 27 नवंबर को फिर बैठक करेगा। इसने कहा कि वह अपनी मांगों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला पत्र भी लिखेगा।

तीन कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के आंदोलनकारी किसान पिछले साल नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर तीन जगहों पर बैठे हैं। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक वे वापस नहीं जाएंगे।

विपक्षी दलों ने स्थिति के लिए सरकार को दोषी ठहराया। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने रविवार को कहा कि अतीत में ‘झूठे जुमले’ झेल चुके लोग कृषि कानूनों को निरस्त करने के प्रधानमंत्री के बयान पर विश्वास करने को तैयार नहीं हैं।

समाजवादी पार्टी (सपा) ने भी केंद्र की घोषणा को लेकर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मंशा पर संशय जाहिर करते हुए कहा कि भाजपा का दिल साफ नहीं है और वह उत्तर प्रदेश में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद इस संबंध में फिर से विधेयक लाएगी।

सपा ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया, ‘‘साफ नहीं इनका दिल, चुनाव बाद फिर लाएंगे बिल (विधेयक)।''

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने भी इसी तरह की बात कही।

उन्होंने कहा, ‘‘तीनों कृषि कानून वापस लेने का काम देर से हुआ है, लेकिन इस अवधि में 700 से ज्यादा किसानों की मौत हो गई है। इन मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा? अब भी लोगों को इस निर्णय पर भरोसा नहीं है, क्योंकि भाजपा के कई लोग कह रहे हैं कि इन कानूनों को फिर से लाया जाएगा।’’

शिवसेना सांसद संजय राउत ने मांग की कि तीन कृषि कानूनों के खिलाफ सालभर तक चले विरोध प्रदर्शन के दौरान जान गंवाने वाले 700 से अधिक किसानों के परिजनों को ‘पीएम केयर्स फंड’ से वित्तीय सहायता दी जानी चाहिए।

राउत ने कहा, "सरकार को अब अपनी गलती का अहसास हुआ है और उसने कृषि कानूनों को वापस ले लिया है। देश के विभिन्न हिस्सों से मांग है कि जान गंवाने वाले किसानों के परिजनों को आर्थिक मुआवजा दिया जाए।"

न्यूनतम समर्थन मूल्य के मुद्दे पर भी विपक्षी दलों ने आंदोलनकारी किसानों को अपना समर्थन जारी रखा है।

भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने लखनऊ में लोगों से 'एमएसपी अधिकार किसान महापंचायत' में शामिल होने का आग्रह किया, जिसे किसान संगठनों द्वारा ताकत दिखाने की कवायद माना जा रहा है।

उन्होंने हिंदी में ट्वीट किया, ‘‘चलो लखनऊ-चलो लखनऊ। सरकार द्वारा जिन कृषि सुधारों की बात की जा रही है, वे नकली एवं बनावटी हैं। इन सुधारों से किसानों की बदहाली रुकने वाली नहीं है। कृषि एवं किसानों के लिए न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य को कानून बनाना सबसे बड़ा सुधार होगा।’’

किसान नेता केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा को हटाने की भी मांग कर रहे हैं, जिनके बेटे को अक्टूबर में उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में एक घटना में चार किसानों की मौत के मामले में गिरफ्तार किया गया था।

भारतीय किसान यूनियन की उत्तर प्रदेश इकाई के उपाध्यक्ष हरनाम सिंह वर्मा ने पीटीआई-भाषा से कहा, "प्रधानमंत्री ने तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की घोषणा की है, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि एमएसपी कानून कब बनेगा। जब तक एमएसपी कानून नहीं बनता और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा को नहीं हटाया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।’’

उत्तर प्रदेश की राजधानी में किसान महापंचायत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कृषि पर निर्भर राज्य में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव है।

लखनऊ के पुलिस आयुक्त डी के ठाकुर ने कहा कि ईको गार्डन में होने वाले कार्यक्रम के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

इस बीच, विभिन्न जिलों से आ रही खबरों में कहा गया है कि किसानों के समूह महापंचायत में शामिल होने के लिए लखनऊ जा रहे हैं।

लखीमपुर खीरी की घटना में मारे गए चार किसानों में शामिल गुरविंदर सिंह के पिता सुखविंदर सिंह ने कहा कि वह अन्य किसानों के साथ महापंचायत में मौजूद रहेंगे।

अपने समर्थकों के साथ महापंचायत में भाग लेने जा रहे राष्ट्रीय किसान मंच के अध्यक्ष शेखर दीक्षित ने कहा कि सैकड़ों किसानों के बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा।

उन्होंने कहा, ‘‘जब तक प्रदर्शन कर रहे किसानों की सभी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, आंदोलन जारी रहेगा। प्रधानमंत्री द्वारा कृषि कानूनों को निरस्त करने की घोषणा पांच राज्यों में आगामी चुनावों के कारण है, जहां भाजपा को दिख रहा है कि सत्ता उसके हाथों से फिसल रही है।’’

दीक्षित ने कहा, "अगर पिछले साल कानूनों को निरस्त करने की घोषणा की गई होती तो कई किसानों की जान बचाई जा सकती थी।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

Open in App

संबंधित खबरें

भारतWest Bengal: विधानसभा चुनावों से पहले बंगाल की वोटर लिस्ट से करीब 90 लाख नाम हटाए गए

भारतAssam Opinion Poll 2026: बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए और भी बड़े बहुमत के साथ सत्ता में बना रहेगा, Matrize का अनुमान

क्रिकेटकेकेआर के लिए सुनील नरेन और वरुण चक्रवर्ती पंजाब किंग्स के खिलाफ मैच क्यों नहीं खेल रहे हैं? जानें कारण

विश्वखुफिया प्रमुख मेजर जनरल माजिद खादेमी की मौत, इजराइल-अमेरिका ने ईरान किया हमला, 25 मरे?, जवाब में ईरान ने पड़ोसी खाड़ी देशों पर मिसाइलें दागीं

भारतयूपी में सरकारी वकीलों की फीस 50% तक बढ़ाएगी सरकार, सरकारी खजाने पर बढ़ेगा 120 करोड़ रुपए का बोझ

भारत अधिक खबरें

भारत'मेरे पति 40 साल के हैं, मैं 19 की': मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में महिला ने अपने प्रेमी के साथ रहने का अधिकार जीता

भारत'IIT बाबा' अभय सिंह ने कर्नाटक की इंजीनियर से शादी की, पत्नी के साथ हरियाणा में अपने पैतृक गांव पहुंचे

भारतSamrat Vikramaditya Mahanatya: 60 हजार से ज्यादा दर्शकों ने देखा 'सम्राट विक्रमादित्य', वाराणसी के रोम-रोम में बसा अनोखा मंचन, देखें Photos

भारतDelhi Assembly Security Breach: कार में सवार व्यक्ति ने कॉम्प्लेक्स का गेट तोड़कर पोर्च में रखा गुलदस्ता, वीडियो

भारतबिहार में शराबबंदी कानून को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने उठाया सवाल, कहा- बिहार में 40 हजार करोड़ रुपये की एक समानांतर अवैध अर्थव्यवस्था खड़ी हो गई है