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सड़कें क्षतिग्रस्त होने से मंडियों में फसल नहीं ले जा पाने से लाहौल-स्पीति के किसान परेशान

By भाषा | Updated: August 3, 2021 22:05 IST

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(धर्मेंद्र जोशी)

शिमला, तीन अगस्त हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले में पिछले सप्ताह भारी बारिश और भूस्खलन के बाद सड़कों और पुलों के क्षतिग्रस्त होने से जिले के उदयपुर अनुमंडल के 1500 से अधिक किसानों को इस साल अपनी पकी फसलों को 'मंडियों' तक ले जाने की चिंता सता रही है।

किसानों ने जिला प्रशासन से वाहनों की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने के लिए सड़कों की मरम्मत करने या कम से कम 'कच्चे' मार्गों का निर्माण करने का आग्रह किया है।

27 जुलाई को उदयपुर के तोजिंग नाले पर बादल फटने से लाहौल-स्पीति में अचानक आई बाढ़ में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई। भूस्खलन के कारण कई सड़कें भी अवरुद्ध हो गईं।

एक किसान और त्रिलोकीनाथ मंदिर के 'करदार' (इसकी प्रबंधन समिति के मुख्य न्यासी) बीर बहादुर सिंह ने कहा कि तोजिंग नाले पर बादल फटने से सड़कें क्षतिग्रस्त हो जाने के बाद कई टन पके मटर, फूलगोभी, ब्रोकोली, पत्तागोभी और लिली के फूल हर दिन नष्ट हो रहे हैं क्योंकि किसान उन्हें 'मंडियों' तक नहीं ले जा पा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उदयपुर के किसान राज्य की बंद्रोल, मनाली, भुंतर और टकोली मंडियों और पंजाब, चंडीगढ़ और दिल्ली की विभिन्न मंडियों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि व्यापारियों के माध्यम से अपनी फसल बेचते हैं।

स्थिति इतनी गंभीर है कि केलांग के एक कृषि व्यापारी सुरेश बोध चोखांगवा ने सोमवार को फेसबुक पर लाइव जाकर एक ट्रक में लदी फूलगोभी को उदयपुर में एक खाई में फेंक दिया क्योंकि वह फसल को "मंडी" तक ले जाने में असमर्थ थे।

एक महिला किसान भीम दासी ने प्रशासन से हाथ जोड़कर सड़कों की मरम्मत करने का आग्रह किया ताकि किसान अपनी फसल को 'मंडियों' तक ले जा सकें।

एक अन्य किसान चुडू राम ने पीटीआई-भाषा से कहा कि अगर किसानों की फसल मंडियों में नहीं पहुंची तो वे जाड़े में भूख से मर जाएंगे।

उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन तत्काल सड़कों की मरम्मत नहीं कर सकता है तो उसे कम से कम 'कच्चे' मार्गों का निर्माण करना चाहिए ताकि ट्रॉली और अन्य वाहन 'मंडियों' तक पहुंच सकें।

हालांकि, राज्य के तकनीकी शिक्षा मंत्री और लाहौल-स्पीति के विधायक राम लाल मारकंडा ने सिंह के पकी फसलों के नष्ट होने के दावों को खारिज कर दिया।

उन्होंने कहा, "मंदिर 'करदार' एक स्थानीय कांग्रेस नेता है और पकी फसलों के नष्ट होने के निराधार आरोप लगा रहे हैं।"

यह बताए जाने पर कि कई अन्य किसानों ने भी स्थिति पर चिंता व्यक्त की है, मारकंडा ने कहा कि वर्तमान में प्राथमिकता फंसे हुए लोगों को बचाने की है। पिछले छह दिनों में 372 फंसे हुए लोगों को बचाया गया है।

उन्होंने कहा, "मैं अपने क्षेत्र के किसानों के बारे में भी चिंतित हूं क्योंकि मुझे पता है कि वे साल में केवल एक फसल उगा पाते हैं। मैं उनकी शिकायतों के निवारण के लिए राज्य विधानसभा के मानसून सत्र में भाग लेने के बजाय अपने निर्वाचन क्षेत्र के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रहा हूं।"

मारकंडा ने कहा कि भारी बारिश के कारण छह पुल क्षतिग्रस्त हो गए और अगले दो दिनों में उन पर वाहनों की आवाजाही बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

इस बीच, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने विधानसभा में उदयपुर अनुमंडल में जल्द से जल्द सड़कों, पेयजल और बिजली सुविधाओं की बहाली के लिए आपदा प्रबंधन कोष से 10 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता की घोषणा की।

यह स्वीकार करते हुए कि सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिसके कारण किसान और व्यापारी वर्तमान में अपनी फसल "मंडियों" तक ले जाने में असमर्थ हैं, उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने फंसे हुए लोगों को बचाने के लिए तेजी से काम किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने खुद 31 जुलाई को स्थिति का जायजा लेने के लिए प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया था।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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