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सेरेब्रल पाल्सी से जूझ रहे बच्चे के इलाज के लिए परिवार को मदद की जरूरत

By भाषा | Updated: August 31, 2020 05:21 IST

सेरेब्रल पाल्सी शरीर के विभिन्न अंगों और मांसपेशियों में गतिविधि या उनकी बनावट का विकार है। यह ज्यादातर जन्म से पहले मस्तिष्क में चोट लगने के कारण होता है।

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ठळक मुद्देदंपति ने अपने 12 वर्षीय बेटे के इलाज के लिए कई उपाए आजमाए और 30 लाख रुपये खर्च कर डाले। इस दौरान उन्होंने दिल्ली में डॉक्टरों से लेकर केरल में पंचकर्म उपचार और उदयपुर नारायण सेवा संस्थान में भी बच्चे का इलाज कराया।

(गौरव सैनी) नयी दिल्लीपिछले 11 साल में जया उन्नी ने सेरेब्रल पाल्सी बीमारी से जूझ रहे अपने बेटे के उपचार के लिए सारे गहने बेच दिए, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण पति के वेतन में कटौती के बाद परिवार के लिए मुश्किलें और बढ़ गयी हैं। ठीक तरीके से चल नहीं पाने के लिए उज्जवल के अभिभावक को उसका उपचार कराने में बहुत मुश्किलें आ रही हैं।

दंपति ने अपने 12 वर्षीय बेटे के इलाज के लिए कई उपाए आजमाए और 30 लाख रुपये खर्च कर डाले। इस दौरान उन्होंने दिल्ली में डॉक्टरों से लेकर केरल में पंचकर्म उपचार और उदयपुर नारायण सेवा संस्थान में भी बच्चे का इलाज कराया। दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में उत्तम नगर की निवासी उन्नी ने कहा, ‘‘जन्म के समय उज्ज्वल ठीक था। जब वह सात महीने का हुआ तो उसका शारीरिक विकास रुक गया। ’’

सेरेब्रल पाल्सी शरीर के विभिन्न अंगों और मांसपेशियों में गतिविधि या उनकी बनावट का विकार है। यह ज्यादातर जन्म से पहले मस्तिष्क में चोट लगने के कारण होता है । उन्होंने कहा, ‘‘पिछले 11 साल काफी मुश्किलों भरे रहे हैं। हमने उज्जवल के उपचार पर काफी रुपये खर्च किए। बेटे के इलाज के लिए शादी के समय मिले जेवरात को भी मैंने बेच डाला। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘आखिरकर हमें एक डॉक्टर मिला जिनकी बदौलत बेटे की स्थिति में सकारात्मक बदलाव आया लेकिन अब उसके उपचार के लिए हमारे पास रुपये नहीं हैं।’’ उज्जवल के डॉक्टर रनबीर सिंह ने कहा कि बच्चे को घर पर दिन में दो बार फिजियोथेरेपी की जरूरत है।

उन्नी ने कहा, ‘‘करीब 15 लाख रुपये की जरूरत है। चार साल तक इलाज के लिए हर महीने 30,000 रुपये चाहिए। महामारी के कारण मेरे पति का वेतन आधा हो गया। वह 15,000 रुपये कमाते हैं जिसमें से 5,000 रुपये किराए में चले जाते हैं।’’

उज्जवल कक्षा चार का छात्र है और संगीत में भी उसकी दिलचस्पी है । उन्नी ने कहा, ‘‘बच्चे ने अपने बचपन का अधिकतर समय घर या अस्पताल में गुजारा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ऑनलाइन तरीके से डॉक्टर हमारी मदद कर रहे हैं लेकिन हम उनसे और ज्यादा मदद के लिए नहीं कह सकते। हमें मदद की जरूरत है ताकि हमारा बच्चा फिर से अपने पैर पर खड़ा हो सके।’’ भाषा आशीष दिलीप दिलीप

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