लाइव न्यूज़ :

नेताओं और नौकरशाहों के लिए विफलता स्वीकार करना मुश्किल होता है, यह उनके स्वभाव में नहीं है:अदालत

By भाषा | Updated: May 19, 2021 16:51 IST

Open in App

नयी दिल्ली, 19 मई अधीनस्थ न्यायिक अधिकारियों के अपने कामकाज के कारण कोविड-19 संक्रमण की गिरफ्त में आने की आशंका पर चिंता प्रकट करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि नेताओं और नौकरशाहों के लिए अपनी विफलता एवं अयोग्यता स्वीकार करना बहुत मुश्किल होता है क्योंकि यह उनके स्वभाव में ही नहीं होता।

उच्च न्यायालय ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में तीन न्यायिक अधिकारी इस वायरस से संक्रमित होकर पहले ही अपनी जान गंवा चुके हैं , इसलिए उसका प्राथमिक दृष्टिकोण है कि उनके साथ सशस्त्र बलों और पुलिस बल के कर्मियों की भांति अग्रिम मोर्चे के कर्मियों की तरह बर्ताव किया जाना चाहिए एवं सरकार इस पर विचार करे।

न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय में हम संवैधानिक पदों पर हैं। हमारे प्रोटोकॉल भिन्न हैं लेकिन अधीनस्थ न्यायपालिका के मामले में ऐसी बात नहीं है। न्यायिक अधिकारियों की स्थिति भिन्न होती है और आपको भलमनसाहत से कदम उठाना चाहिए। आप इस पर गौर कीजिए और फिर तय कीजिए।’’

पीठ दिल्ली सरकार की इस दलील से प्रभावित नजर नहीं आयी कि उच्च न्यायालय ने पहले एक आदेश जारी करके कहा था कि दिल्ली के जिला न्यायाधीश कोविड-19 महामारी के दौरान न्यायिक अधिकारियों एवं उनके परिवारों की चिकित्सा चिंताओं का समाधान करने के लिए जिलाधिकारियों के साथ समन्वय करेंगे और हर जिले में इस संबंध में नोडल अधिकारी नियुक्त किये जाएं।

पीठ ने कहा, ‘‘ हम उसमें नहीं पड़ें। वैसा नहीं हुआ। वे यहां इसलिए हैं क्योकि उसका कोई संतोषजनक परिणाम नहीं आया। नौकरशाही एवं नेताओं के लिए अपनी विफलता या अयोग्यता स्वीकार करना बड़ा मुश्किल है। वे कभी अपनी विफलता नहीं स्वीकार करेंगे। यह उनके स्वभाव में ही नहीं है। ’’

पीठ ने कहा कि न्यायिक अधिकारी जिस तरह जोखिम पूर्ण स्थिति में काम रहे हैं वे सशस्त्र बलों एव पुलिस अधिकारियों के कामों के जैसा ही है।

अदालत ने दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा की दलील पर गौर किया कि दिल्ली सरकार इस बात पर गौर करेगी कि न्यायिक अधिकारी, जो न्याय प्रक्रिया को चलाने के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं और कोविड-19 के जोखिम से जूझ रहे हैं, उन्हें अग्रिम मोर्चा कर्मी घोषित किया जा सकता हैं या नहीं।

वकील ने यह भी कहा कि दिल्ली न्यायिक सेवा एसोसिएशन, जिसने यह आवेदन दिया है, अपना प्रतिवेदन दिल्ली के मुख्य सचिव को दे सकती है, और वह इस पर गौर करेंगे।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

Open in App

संबंधित खबरें

क्रिकेटइंडियन प्रीमियर लीग में भुवनेश्वर कुमार ने जड़ा 'दोहरा शतक', ऐसा करने वाले दुनिया के दूसरे गेंदबाज, जानें पहले पायदान पर कौन?

क्रिकेट37 के साथ सबसे आगे CSK?, आईपीएल में सबसे ज्यादा 200 से अधिक रन बनाने वाली टीमें, देखिए टॉप-5 लिस्ट

क्राइम अलर्टमैडम दुकान के सामने गाड़ी मत लगाओ, ग्राहक को आने में दिक्कत होगी?, 78 वर्षीय दुकानदार को महिला उपनिरीक्षक ने थप्पड़ मारा, प्राथमिकी दर्ज

भारतगोदामों से सीधे एलपीजी सिलेंडर की बिक्री पर सख्त प्रतिबंध, सीएम रेखा गुप्ता ने कहा-भंडारण केंद्रों पर न जाएं और न ही भीड़ में इकट्ठा हों

पूजा पाठPanchang 06 April 2026: आज कब से कब तक है राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त का समय, देखें पंचांग

भारत अधिक खबरें

भारतउच्च शिक्षा और अनुसंधान की चुनौतियां

भारतआदिवासी खेल: नई प्रतिभाओं की तलाश में एक सार्थक पहल

भारतबारामती विधानसभा उपचुनावः सीएम फडणवीस की बात नहीं मानी?, कांग्रेस ने उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के खिलाफ आकाश मोरे को चुनाव मैदान में उतारा

भारतUP की महिला ने रचा इतिहास! 14 दिनों में साइकिल से एवरेस्ट बेस कैंप पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बनीं

भारतLadki Bahin Yojana Row: महाराष्ट्र में 71 लाख महिलाएं अयोग्य घोषित, विपक्ष ने किया दावा, सरकार की जवाबदेही पर उठाए सवाल