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एंडोसल्फान पीड़ितों का प्रदर्शन; यूडीएफ ने केरल सरकार पर 'उदासीन' रुख अपनाने का आरोप लगाया

By भाषा | Updated: October 6, 2021 16:51 IST

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तिरुवनंतपुरम, छह अक्टूबर केरल विधानसभा में बुधवार को विपक्षी यूडीएफ ने कासरगोड एंडोसल्फान त्रासदी के पीड़ितों के प्रति कथित रूप से उदासीनता दिखाने के लिए वाम सरकार पर हमला बोला तथा इस मुद्दे पर अधिक "मानवीय" दृष्टिकोण अपनाने का अनुरोध किया।

विपक्ष ने सरकार पर यह हमला ऐसे दिन बोला , जब एंडोसल्फान प्रभावित बच्चों और उनके अभिभावकों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर यहां धरना दिया।

कांग्रेस नीत विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने अभी तक पीड़ितों को पांच लाख रुपये का मुआवजा नहीं दिया है, जबकि उच्चतम न्यायालय ने इसके लिए आदेश दिया है।

विपक्ष ने शून्यकाल के दौरान यह भी दावा किया कि पीड़ितों और उनके परिवार से जुड़े मुद्दों के हल के लिए गठित प्रकोष्ठ पिछले एक साल से काम नहीं कर रहा है और सभी पुनर्वास कार्य ठहर गए हैं।

सामाजिक न्याय मंत्री आर बिंदु ने इसके जवाब में कासरगोड जिले के असहाय बच्चों के पुनर्वास के लिए वाम सरकार द्वारा लागू किए गए विभिन्न कार्यक्रमों का ब्योरा दिया। उन्होंने हालांकि स्वीकार किया कि निवारण प्रकोष्ठ पिछले कुछ समय से काम नहीं कर रहा है।

मंत्री ने विधानसभा में कहा कि पुनर्वास कार्यक्रमों का समन्वय निवारण प्रकोष्ठ द्वारा किया जाता रहा है और विधानसभा चुनाव के बाद पैनल के पुनर्गठन के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पैनल की सिफारिशों के तहत पीड़ितों को मुआवजे और वित्तीय सहायता के रूप में कुल 171 करोड़ रुपये दिए गए हैं।

इस बीच, बड़ी संख्या में एंडोसल्फान प्रभावित व्यक्ति और उनके परिवार के सदस्य सुबह तिरुवनंतपुरम पहुंचे। वे मुआवजे के शीघ्र वितरण तथा विभिन्न पुनर्वास कार्यक्रमों को लागू करने की मांग को लेकर सांकेतिक प्रदर्शन में भाग लेने के लिए यहां आए हैं।

एकजुटता समिति के तत्वावधान में दिन भर के धरने का आयोजन किया गया। इसमें कई बैनर भी लगाए गए थे, जिन पर लिखा था, "एंडोसल्फान पीड़ित भी इंसान हैं।’

विधानसभा सत्र के बाद, विपक्षी सदस्यों ने सचिवालय के सामने प्रदर्शन स्थल पर पीड़ितों और उनके परिवारों से भेंट की तथा उनके आंदोलन के प्रति अपनी एकजुटता दिखायी।

एंडोसल्फान एक घातक कीटनाशक है और 2011 तक इसका काजू, कपास, चाय, धान, फलों और अन्य फसलों पर व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन उसके बाद उच्चतम न्यायालय ने इसके उत्पादन और वितरण पर रोक लगा दी थी।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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