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कोविड टीकों की बूस्टर खुराक के लिए विशेषज्ञ विचार-विमर्श कर रहें :केंद्र ने दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा

By भाषा | Updated: December 14, 2021 18:44 IST

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नयी दिल्ली,14 दिसंबर केंद्र ने दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया है कि कोविड-19 के टीकों की बूस्टर खुराक की संभावित जरूरत और औचित्य पर विशेषज्ञ विचार-विमर्श कर रहे हैं तथा फिलहाल इसके लिए कोई दिशानिर्देश नहीं है।

उच्च न्यायालय के समक्ष केंद्र का यह रुख खासा मायने रखता है क्योंकि कोरोना वायरस के नये स्वरूप ओमीक्रोन के आने के बीच कोविड-19 रोधी टीकों की बूस्टर खुराक लगाने का मुद्दा उठा है।

न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ के समक्ष केंद्र ने एक हलफनामा दाखिल किया है, जिस पर उस दिन सुनवाई होने का कार्यक्रम है जब महामारी की दूसरी लहर के समय राष्ट्रीय राजधानी में कोविड-19 संकट से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सुनवाई होगी।

केंद्र ने कहा कि टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) और कोविड-19 के लिए टीका प्रशासन पर राष्ट्रीय विशेषज्ञ समूह (एनईजीवीएसी), दो विशेषज्ञ समूह हैं जो राष्ट्रीय कोविड-19 टीकाकरण कार्यक्रम को दिशानिर्देशित करने के लिए मिल कर काम कर रहे हैं।

एनटीएजीआई विभिन्न प्रकार के कोविड टीकों के उपयोग, टीकों की खुराक के बीच अंतराल, नुकसान पहुंचने की आशंका को लेकर टीका नहीं लगाने आदि जैसे तकनीकी पहलुओं की पड़ताल करता है और इस संबंध में एनईजीवीएसी को अपना सुझाव देता है, जो कोविड टीकाकरण के सभी पहलुओं पर संपूर्ण दिशानिर्देश एवं सुझाव स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को उपल्ब्ध कराता है।

हलफनामे में कहा गया है, ‘‘एनटीएजीआई और एनईजीवीएसी कोविड-19 टीकों की खुराक की समय सीमा और बूस्टर खुराक की जरूरत तथा औचित्य पर विचार-विमर्श कर रहा है।’’

इसमें कहा गया है, ‘‘कोविड-19 टीकों से भारत में मिलने वाली प्रतिरक्षा की अवधि के बारे में मौजूदा जानकारी सीमित है और एक समय के बाद ही इस बारे में स्पष्ट रूप से पता चल पाएगा। ’’

केंद्र ने कहा कि सार्स-कोवी-2 संक्रमण के प्रसार और इससे होने वाले रोग ने एक नये संक्रामक रोग के तौर पर भारत को 2020 से प्रभावित किया है, जिसकी संपूर्ण जैविक विशेषता अज्ञात है और इस परिस्थिति में कोविड टीके की बूस्टर खुराक की उपयुक्तता या जरूरत के बारे में फैसला किया जाना बाकी है।

हलफनामे में कहा गया है, ‘‘राष्ट्रीय कोविड-19 टीकाकरण कार्यकम की मौजूदा प्राथमिकता, समूची पात्र आबादी का पूर्ण टीकाकरण करना है और फिलहाल दोनों विशेषज्ञ समूहों की ओर से बूस्टर खुराक लगाने के बारे में कोई दिशानिर्देश नहीं है। ’’

केंद्र ने यह हलफनामा अदालत के 25 नवंबर के एक आदेश के अनुपालन में दाखिल किया है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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