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इलेक्शन फ्लैश बैकः जब राम मंदिर पर आडवाणी के बयान के कारण चुनाव हारे थे गुलाबचन्द कटारिया!

By प्रदीप द्विवेदी | Updated: January 4, 2019 07:30 IST

लंबे समय से संत समाज जहां राम मंदिर को लेकर पीएम मोदी सरकार पर प्रश्नचिन्ह लगा रहा है, वहीं आरएसएस भी चाहती है कि संसद में कानून बना कर राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ किया जाए.

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ठळक मुद्देराम मंदिर का मुद्दा भाजपा समर्थकों के लिए कितना महत्वपूर्ण है, यह इससे ही जाना जा सकता है कि रथयात्रा के बाद चुनाव के दौरान लालकृष्ण आडवाणी ने राम मंदिर को लेकर जो एक नकारात्मक बयान दिया था.इस वक्त केन्द्र और यूपी में बहुमत के साथ भाजपा सरकारें हैं, यदि लोकसभा चुनाव से पहले राम मंदिर निर्माण शुरू नहीं हुआ तो केन्द्र में बहुमत के साथ भाजपा सरकार नहीं आएगी और ऐसी स्थिति में राम मंदिर निर्माण का निर्णय लेना आसान नहीं होगा.

राम मंदिर को लेकर पीएम नरेन्द्र मोदी ने जो अपनी सरकार का नजरिया पेश किया है, उसके बाद यह सवाल उठने लगा है कि- इस नजरिए का 2019 के आम चुनाव पर क्या असर होगा?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इसका सीधा नकारात्मक असर राम मंदिर समर्थक भाजपा कार्यकर्ताओं पर होगा. क्योंकि, राम मंदिर मुद्दा शुरू से ही भाजपा समर्थकों के लिए उत्साहवर्धक रहा है, इसलिए वे इस पर कोई भी नकारात्मक नजरिया स्वीकार करना नहीं चाहते हैं.

पीएम मोदी के समर्थक भी इस बात से विचलित हैं कि जब केन्द्र में पीएम मोदी की सरकार है, उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार है तो फिर राम मंदिर निर्माण में अड़चन कहां है?

यही नहीं, लंबे समय से संत समाज जहां राम मंदिर को लेकर पीएम मोदी सरकार पर प्रश्नचिन्ह लगा रहा है, वहीं आरएसएस भी चाहती है कि संसद में कानून बना कर राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ किया जाए.

पीएम मोदी के नजरिए से सहमत समर्थकों का मानना है कि लोकसभा में भाजपा जीत जाएगी, लेकिन राज्यसभा में परेशानी खड़ी हो जाएगी. इस पर राम मंदिर समर्थकों का कहना है कि पीएम मोदी सरकार संसद में प्रक्रिया शुरू करे, पता तो चले कि- राम मंदिर का विरोध कौन-कौन करता है? राम मंदिर समर्थक इसलिए भी परेशान हैं कि इस वक्त केन्द्र और यूपी में बहुमत के साथ भाजपा सरकारें हैं, यदि लोकसभा चुनाव से पहले राम मंदिर निर्माण शुरू नहीं हुआ तो केन्द्र में बहुमत के साथ भाजपा सरकार नहीं आएगी और ऐसी स्थिति में राम मंदिर निर्माण का निर्णय लेना आसान नहीं होगा.

राम मंदिर का मुद्दा भाजपा समर्थकों के लिए कितना महत्वपूर्ण है, यह इससे ही जाना जा सकता है कि रथयात्रा के बाद चुनाव के दौरान लालकृष्ण आडवाणी ने राम मंदिर को लेकर जो एक नकारात्मक बयान दिया था, वह जब प्रकाशित हुआ तो उसका असर उदयपुर में मतदान के दिन नजर आया. भाजपा कार्यकर्ताओं का जोश ठंड़ा पड़ गया और गुलाबचन्द कटारिया चुनाव हार गए.

पीएम मोदी का नजरिया भी भाजपा समर्थकों और साधु-संतों का जोश ठंड़ा करने वाला है. जाहिर है, इसका असर भी 2019 के लोस चुनावों में नजर आएगा!

टॅग्स :राम मंदिरएल के अडवाणी
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