खाड़ी देशों में जारी युद्ध के कारण बिहार में नहीं गूँज पा रही हैं शहनाइयां, दुल्हनों को है अपने हाथों पर मेहंदी रचाने का इंतजार

By एस पी सिन्हा | Updated: March 24, 2026 15:50 IST2026-03-24T15:50:32+5:302026-03-24T15:50:40+5:30

खाड़ी देशों में काम करने वाले हजारों भारतीय, विशेषकर बिहार और झारखंड के दूल्हे फंस गए हैं। उड़ानें रद्द होने और एयरस्पेस बंद होने से लगभग 400 से अधिक शादियां टल गई हैं या खतरे में हैं, जिससे परिवारों में चिंता का माहौल है।

Due to the ongoing war in the Gulf nations, the strains of the *shehnai* are failing to resonate in Bihar, and brides-to-be are left waiting to adorn their hands with *mehndi* | खाड़ी देशों में जारी युद्ध के कारण बिहार में नहीं गूँज पा रही हैं शहनाइयां, दुल्हनों को है अपने हाथों पर मेहंदी रचाने का इंतजार

खाड़ी देशों में जारी युद्ध के कारण बिहार में नहीं गूँज पा रही हैं शहनाइयां, दुल्हनों को है अपने हाथों पर मेहंदी रचाने का इंतजार

पटना: अमेरिका-इजरायल के द्वारा ईरान पर लगातार किए जा रहे हमले के कारण तनाव न सिर्फ खाड़ी देशों में है, बल्कि हजारों किलोमीटर दूर बसे बिहार और झारखंड के छोटे-छोटे गांवों के दिलों को भी झुलसा रही हैं। युद्ध का दंश बिहार की सैकड़ों लड़कियां महसूस कर रही हैं, उनका दिल टूटता जा रहा है। दरअसल, यह लड़कियां अपने होने वाले शौहर के इंतजार में अपने हाथों पर मेहंदी नहीं लगवा पा रही है। इसका कारण यह है कि खाड़ी देशों में काम करने वाले हजारों भारतीय, विशेषकर बिहार और झारखंड के दूल्हे फंस गए हैं। उड़ानें रद्द होने और एयरस्पेस बंद होने से लगभग 400 से अधिक शादियां टल गई हैं या खतरे में हैं, जिससे परिवारों में चिंता का माहौल है।

बताया जाता है दूल्हे जो खाड़ी देशों (दुबई, सऊदी आदि) में काम करते हैं, वे वापस नहीं लौट पा रहे हैं। इसी कड़ी में बिहार में गया जिले के खंडैल गांव समेत आसपास के इलाकों में 400 से ज्यादा शादियां अटक गई हैं, क्योंकि दूल्हे खाड़ी देशों में फंसे हुए हैं और समय पर घर नहीं लौट पा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, इस इलाके के बड़ी संख्या में युवक कुवैत, सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों में काम करते हैं। हर साल शादी के सीजन में वे अपने गांव लौटते हैं, लेकिन इस बार युद्ध के चलते हवाई सेवाएं प्रभावित हो गई हैं। कई उड़ानें रद्द हो रही हैं और टिकट महंगे हो गए हैं, जिससे उनका वापस आना मुश्किल हो गया है। बताया जाता है कि एक युवक मिन्हाज की शादी 30 मार्च को तय थी और परिवार ने सभी तैयारियां पूरी कर ली थी, लेकिन वह कुवैत से लौट नहीं सका। 

ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां शादी की तारीख आगे बढ़ानी पड़ रही है। गांव में दुल्हनों और उनके परिवारों को अब उम्मीद है कि हालात जल्द सामान्य होंगे और दूल्हे सुरक्षित घर लौट पाएंगे, ताकि शादियां फिर से तय की जा सकें। फिलहाल सभी परिवार इंतजार कर रहे हैं। मिन्हाज के पिता जलील शाह ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे की शादी जहानाबाद के एरकी गांव में तय की है, यह शादी 30 मार्च को होनी है। 

उन्होंने बताया कि उनके बेटे मिन्हाज ने 26 मार्च को फ्लाइट का टिकट बुक कराया था, लेकिन युद्ध की वजह फ्लाइट 2 बार रद्द हो चुकी है। खंडेल गांव की मुखिया बताती हैं कि हालात इतने नाजुक हैं कि लोग अब ऑनलाइन निकाह तक के विकल्प पर सोचने लगे हैं। उनके अपने घर में दो शादियां हैं एक दूल्हा बहरीन में है, दूसरा कतर में और दोनों का कोई अता-पता नहीं कि कब लौट पाएंगे। यह महज एक खंडेल गांव की बात नहीं है। 

बिहार में सीवान, गोपालगंज, मधुबनी, पूर्वी और पश्चिमी चंपारण, सारण, गया, कटिहार सहित कई जिलों के लोग खाडी देशों में जा कर काम कर तहे हैं, लेकिन युद्ध के कारण वापस अपने वतन लौट नहीं पा रहे हैं। अब दुल्हनों को सिर्फ अपने दुल्हे का बेसब्री से इंतजार है ताकि उनका निकाह वक्त पर हो सके। हालांकि कई दूल्हे के अप्रिजनों ने कहा कि हमने दुल्हन वालों से हाथ जोड़कर माफी मांगी है। दुल्हन वालों से कहा है कि अगर बेटा समय से वापस नहीं आया तो खाड़ी देशों में स्थिति सामान्य होने के बाद शादी की दूसरी तारीख तय कर लें।

Web Title: Due to the ongoing war in the Gulf nations, the strains of the *shehnai* are failing to resonate in Bihar, and brides-to-be are left waiting to adorn their hands with *mehndi*

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