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बिहार में दिमागी बुखार से दहशत, हफ्तेभर में 56 बच्चों की मौत

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: June 12, 2019 07:56 IST

बिहार में दिमागी बुखार से 12 जिले और 222 प्रखंड प्रभावित हैं. मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर और वैशाली जिलों में दिमागी बुखार का कहर तेज हो गया है. सात दिनों में 114 पीडि़त बच्चे एसकेएमसीएच और केजरीवाल अस्पताल में भर्ती हुए हैं, जिनमें 56 बच्चों की जान चली गई.

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ठळक मुद्दे24 घंटे में 20 बच्चों की मौत रविवार से सोमवार तक इस बीमारी की वजह से 20 बच्चों की मौत हो गई है.अस्पतालों में अलर्ट जारी किया गया है.

बिहार के मुजफ्फरपुर में दिमागी बुखार (इंसेफलािइटस) का कहर जारी है. इस बीमारी की वजह से पिछले एक हफ्ते में 56 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है. बुखार से पीडि़त लगभग 100 बच्चों का जिले के एसकेएमसीएच व केजरीवाल अस्पताल में इलाज जारी हैं. ऐसे समय में नेताओं और मंत्रियों के लापरवाही भरे बयान उनकी संवेदनहीनता को जाहिर कर रहे हैं.

बिहार में दिमागी बुखार से 12 जिले और 222 प्रखंड प्रभावित हैं. मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर और वैशाली जिलों में दिमागी बुखार का कहर तेज हो गया है. सात दिनों में 114 पीडि़त बच्चे एसकेएमसीएच और केजरीवाल अस्पताल में भर्ती हुए हैं, जिनमें 56 बच्चों की जान चली गई.

दिमागी बुखार से पिछले 10 वर्षों में 350 से अधिक बच्चों की मौत हो गई है. स्वास्थ्य विभाग ने लगातार सातवें दिन बच्चों की मौत होने पर सिविल सर्जन शैलेश प्रसाद सिंह से रिपोर्ट मांगी है और इलाज की बेहतर मॉनिटरिंग करने का निर्देश दिया जबकि तिरहुत के कमिश्नर नर्मदेश्वर लाल ने आपात बैठक बुलाकर बीमारी से बचाव को लेकर प्रचार-प्रसार नहीं किए जाने पर फटकार लगाई है.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मंत्री हर्षवर्धन ने उत्तर बिहार में इस बीमारी से बच्चों की मौत का संज्ञान लिया है. उन्होंने एसकेएमसीएच प्रशासन से बीमारी के संबंध में रिपोर्ट मांगी है. इसके पहले वर्ष 2014 में भी तत्कालीन केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने मुजफ्फरपुर का दौरा किया था. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी कल इस मामले में विभाग के प्रधान सचिव को हालात पर ध्यान देने के निर्देश दिए थे.

24 घंटे में 20 बच्चों की मौत रविवार से सोमवार तक इस बीमारी की वजह से 20 बच्चों की मौत हो गई है. बीमारी के कहर को देखते हुए चार आईसीयू चालू किए गए हैं, फिर भी बच्चों के लिए बेड कम पड़ रहे हैं. अस्पतालों में अलर्ट जारी किया गया है. वहां जरूरी सुविधाओं के साथ डॉक्टरों की रोस्टर ड्यूटी तय कर दी गई है. मंत्रियों के लापरवाही भरे बयान हर वर्ष होने वाली इस बीमारी को रोकने में बिहार सरकार नाकाम रही है.

जल्द ही इस पर काबू किए जाने की जरूरत है. ऐसे समय में नेताओं और मंत्रियों के लापरवाही भरे बयान उनकी संवेदनहीनता को जाहिर कर रहे हैं. कला एवं संस्कृति मंत्री प्रमोद कुमार ने कहा, ''किसको क्या पता है कि कौन कितना दिन जिएगा?'' इसके बाद उन्होंने कहा कि सरकार कोशिश कर रही है कि बच्चों को बचाया जा सके.

वहीं, केंद्रीय राज्यमंत्री अश्वनी चौबे ने कहा है कि मुजफ्फरपुर में तत्काल कोई जरूरत नहीं है और यदि जरूरत पड़ी तो केंद्रीय टीम भेजी जाएगी. वर्षवार मौतों के आंकड़े वर्षवार दिमागी बुखार से मौत का आंकड़ा इस प्रकार है- 2010 में 24, 2011 में 45, 2012 में 120, 2013 में 39, 2014 में 86, 2015 में 11, 2016 में 04, 2017 में 04 और 2018 में 11 मौतें हुई हैं.

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