बैलिस्टिक मिसाइल के-4 पनडुब्बी को सफलतापूर्वक परीक्षण करने के बाद रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने 5,000 किलोमीटर की रेंज वाली पनडुब्बी लॉन्च की गई मिसाइल प्रणाली विकसित करने पर काम शुरू कर दिया है। विकसित होने के बाद ये मिसाइल प्रणाली एशिया, अफ्रीका, यूरोप और दक्षिण चीन सागर सहित भारत-प्रशांत को कवर करेगी।
अमेरिका, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन और चीन के बाद भारत भी ऐसा देश बन गया है जो जमीन, पानी और आकाश यानी आसमान से लेकर पाताल तक से परमाणु क्षमता वाली मिसाइल दाग सकता है।
बता दें कि भारत ने शुक्रवार (24 जनवरी ) को विशाखापट्टनम तट से एक हफ्ते में दूसरी बार पनडुब्बी से छोड़ी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइल के-4 का सफल परीक्षण किया। इसे नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिहाज से मील का अहम पत्थर माना जा रहा है।
अधिकारियों ने कहा कि डीआरडीओ द्वारा विकसित ये मिसाइल 3,500 किलोमीटर तक मार कर सकती है और इसकी जद में पाकिस्तान के सभी हिस्सों के साथ चीन के कुछ इलाके भी आते हैं। इस मिसाइल को भारत की अरिहंत श्रेणी की परमाणु पनडुब्बियों पर तैनात किये जाने की तैयारी है। अधिकारी ने कहा कि विशाखापट्टनम के तट से पांच दिन के अंदर लगातार दूसरी बार मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया।