पानीपुरी बेचने, मजदूरी करने और होटलों में टेबल साफ करने के लिए आते हैं उत्तर भारत से लोग?, संजय मयूख की पहल पर तमिलनाडु के मंत्री के खिलाफ निंदा प्रस्ताव
By एस पी सिन्हा | Updated: February 6, 2026 16:54 IST2026-02-06T16:48:50+5:302026-02-06T16:54:37+5:30
तमिलनाडु के युवाओं से की और कहा कि यहां के युवा शिक्षित होकर आगे बढ़ रहे हैं, जबकि उत्तर भारतीय राज्यों में विकास की कमी है।

tamil nadu ministry north indian
पटनाः उत्तर भारतीयों पर तमिलनाडु के कृषि मंत्री एमआरके पन्नीरसेल्वम द्वारा की गई अपमानजनक टिप्पणी ने एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। इस बयान के विरोध में बिहार विधान परिषद ने सर्वसम्मति से निंदा प्रस्ताव पारित किया है। तमिलनाडु के वरिष्ठ द्रमुक (डीएमके) नेता और कृषि मंत्री एमआरके पन्नीरसेल्वम ने मथुरांतकम में एक सार्वजनिक सभा के दौरान उत्तर भारतीयों को लेकर विवादित टिप्पणी करते हुए कहा था कि उत्तर भारत से लोग तमिलनाडु केवल पानीपुरी बेचने, निर्माण कार्यों में मजदूरी करने और होटलों में टेबल साफ करने के लिए आते हैं।
उन्होंने इसकी तुलना तमिलनाडु के युवाओं से की और कहा कि यहां के युवा शिक्षित होकर आगे बढ़ रहे हैं, जबकि उत्तर भारतीय राज्यों में विकास की कमी है। मंत्री के इस बयान की गूंज बिहार की राजनीति में भी सुनाई दी। गुरुवार को बिहार विधान परिषद में भाजपा सदस्य संजय प्रकाश मयूख ने इस मुद्दे को उठाया और सदन से निंदा प्रस्ताव पारित करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि उत्तर भारतीयों का इस तरह अपमान स्वीकार नहीं किया जाएगा। सभापति अवधेश नारायण सिंह ने इस पर सहमति जताई और सदन की गरिमा का हवाला देते हुए निंदा प्रस्ताव की प्रक्रिया शुरू की। चर्चा के दौरान विपक्षी सदस्यों (राजद) ने मांग की कि उत्तराखंड और महाराष्ट्र में बिहारियों के खिलाफ होने वाली टिप्पणियों को भी इस प्रस्ताव में शामिल किया जाए।
इस मांग को लेकर सदन में शोर-शराबा शुरू हो गया। राजद के कारी सोहैब द्वारा बार-बार बाधा डालने पर सभापति ने कड़ी नाराजगी जताई। जदयू विधान पार्षद नीरज कुमार ने सदन की नियमावली का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि वर्तमान में की गई टिप्पणी पर ही निंदा प्रस्ताव लाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पुरानी बातों को इसमें जोड़ना तर्कसंगत नहीं है। इसके बाद सदन में मौजूद सभी दलों की सहमति से तमिलनाडु के मंत्री के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित कर दिया गया। सभापति ने जोर देकर कहा कि यह 'उच्च सदन' है और यहाँ सभी से मर्यादित व्यवहार की अपेक्षा की जाती है।