सुप्रीम कोर्ट के द्वारा यूजीसी पर रोक लगाए जाने के बाद भी बिहार में टीएमबीयू ने लागू कर दिया यूजीसी, विरोध के बाद लिया वापस
By एस पी सिन्हा | Updated: February 4, 2026 18:13 IST2026-02-04T18:13:16+5:302026-02-04T18:13:58+5:30
टीएमबीयू प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के बावजूद विश्वविद्यालय में यूजीसी के नए नियमों को लागू कर दिया है। इसके तहत विश्वविद्यालय में छात्र शिकायत निवारण कोषांग के गठन का आदेश जारी कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट के द्वारा यूजीसी पर रोक लगाए जाने के बाद भी बिहार में टीएमबीयू ने लागू कर दिया यूजीसी, विरोध के बाद लिया वापस
पटना:बिहार की तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियम लागू करने को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया। टीएमबीयू प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के बावजूद विश्वविद्यालय में यूजीसी के नए नियमों को लागू कर दिया है। इसके तहत विश्वविद्यालय में छात्र शिकायत निवारण कोषांग के गठन का आदेश जारी कर दिया। जब इस पर विवाद उठा तो आनन-फानन में कुलपति ने इस आदेश को वापस ले लिया। छात्रों की शिकायत निवारण कमिटी का गठन होने के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने इसका विरोध किया।
छात्र संगठन ने आदेश जारी करने वाले अधिकारी पर कार्रवाई की मांग विश्वविद्यालय प्रशासन से की। एबीवीपी ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के बीच जातीय भेदभाव फैलाने की साजिश कर रहा है। हालांकि, टीएमबीयू के कुलपति प्रोफेसर विमलेंदु शेखर झा ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने कुलसचिव डॉ. रामाशीष पूर्वे को वापस लेने का आदेश है। साथ ही कुलसचिव को शो काज करने की बात कही है। कुलपति ने यह भी कहा है कि उनके आदेश के बिना ही कमिटी गठित करने की अधिसूचना जारी की गई थी।
बता दें कि यूजीसी ने पिछले महीने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के साथ भेदभाव रोकने के लिए नए नियम लागू किए थे। इसके तहत छात्र शिकायत निवारण कमिटी का गठन अनिवार्य किया गया था। हालांकि, सवर्ण वर्ग के छात्रों ने इसे एकतरफा फैसला बताते हुए विरोध जताया और कहा कि इससे सवर्ण छात्रों को झूठे मामलों में फंसाया जा सकता है। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और शीर्ष अदालत ने यूजीसी के नियमों पर अंतरिम रोक लगा दी। कोर्ट ने सरकार और यूजीसी से स्पष्टीकरण मांगा है और तब तक विश्वविद्यालयों में यूजीसी के नए नियम लागू नहीं किए जा सकते।