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दिल्ली-एनसीआर में झुलसाएगी गर्मी, अगले 5 दिन बारिश के आसार नहीं

By निखिल वर्मा | Updated: June 29, 2020 09:16 IST

मानसून के दौरान मध्य भारत में भी बारिश का सिलसिला जारी है और विभिन्न स्थानों पर कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।

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ठळक मुद्दे दिल्ली , राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में हालांकि तापमान में बढोत्तरी जारी है।मध्य प्रदेश में इस साल मानसून की अनुकूल शुरुआत होने से जून माह में अब तक सामान्य से 88 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है।

देश के कई हिस्सों में रविवार को दक्षिण पश्चिमी मानसून के कारण लगातार बारिश हुई। हालांकि दिल्ली-एनसीआर के लोगों को भीषण गर्मी से अभी भी छुटकारा नहीं मिल सका है। राष्ट्रीय राजधानी में रविवार को पारा 40 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया। पांच दिन पहले ही शहर में मानसून ने दस्तक दी है। लेकिन लोगों को उमस और गर्मी से कोई राहत मिलता नहीं आ रहा है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले पांच दिन दिल्ली में बारिश की गुंजाइश नहीं है। 

सफदरजंग वेधशाला ने रविवार को अधिकतम तापमान 40.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज  किया दो कि सामान्य से 3 डिग्री अधिक है। आर्द्रता का स्तर 46 फीसदी से 85 फीसदी के बीच रहा। पालम, नजफगढ़, आयानगर और पूसा स्थित मौसम केंद्रों ने अधिकतम तापमान 40.2 डिग्री दर्ज किया। भारत मौसम विभाग ने 27 जून को सामान्य तिथि से दो दिन पहले गुरुवार को मानसून आने की घोषणा की थी। हालांकि एक निजी मौसम पूर्वानुमान सेवा स्काईमेट वेदर के महेश पलावत ने कहा कि दिल्ली में बारिश फिलहाल कम होगी और कुछ दिनों तक मौसम शुष्क बना रहेगा।

उत्तर प्रदेश के अनेक इलाकों में हुई बारिश

उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में मानसून की सक्रियता बरकरार है और पिछले 24 घंटों के दौरान इन भागों के अनेक हिस्सों में वर्षा हुई। आंचलिक मौसम केंद्र की रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मानसून पूरी तरह सक्रिय है और राज्य के इन इलाकों में पिछले 24 घंटों के दौरान अनेक स्थानों पर बारिश हुई। इस दौरान अयोध्या में सबसे ज्यादा 12 सेंटीमीटर वर्षा हुई।

मध्य प्रदेश में जून माह में सामान्य से 88 प्रतिशत अधिक बारिश

मध्यप्रदेश में इस साल मानसून की अनुकूल शुरुआत होने से जून माह में अब तक सामान्य से 88 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है। मौसम विज्ञान केन्द्र, भोपाल के अधिकारी जीडी मिश्रा ने रविवार को बताया कि प्रदेश में 14 जून को मानसून पहुंच गया और आगले दस दिन तक सक्रिय रहा। उन्होंने बताया, ‘‘इससे पहले मानसून मध्यप्रदेश में जून माह के उत्तरार्ध में पहुंचता था और प्रदेश में फैलने में समय लगता था। लेकिन, इस बार ग्वालियर और जबलपुर जिलों को छोड़कर प्रदेश में एक जून से 27 जून के बीच सामान्य से 88 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गयी है।’’

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