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दिल्ली दंगे : अरोपपत्र के न्यायिक विवेचना में टिकने पर अदालत के सवाल के बाद अभियोजक बदले गए

By भाषा | Updated: September 15, 2021 17:33 IST

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नयी दिल्ली, 15 सितंबर दिल्ली में पिछले साल हुए दंगे के संबंध में दिल्ली पुलिस की ओर से दाखिल आरोप पत्र के न्यायिक विवेचना में टिकने के बारे में अदालत द्वारा उठाए गए सवाल के कई दिन बाद मामले को देख रहे अभियोजक को ‘बदल’ दिया गया है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने पुलिस से सवाल किया था मामले में दखिल आरोप पत्र कानून के समक्ष कैसे टिकेगा जब शिकायत के आधार पर दर्ज प्राथमिकी में आरोपित बनाए गए तीन सह अभियुक्त पहले ही आरोप मुक्त किए जा चुके हैं।

न्यायाधीश यादव ने तीन सितंबर को कहा था कि कानून का सवाल, आवश्यक रूप से यह बनता है कि आरोपी के खिलाफ दूसरे मामले में प्रक्रिया कैसे जारी रह सकती है जब पहले मामले में उसी न्यायाधिकारक्षेत्र में उसी अपराध से संबंधित उसी धारा में कुछ को आरोप मुक्त किया जा चुका है। अदालत ने विशेष लोक अभियोजक डीके भाटिया से सवाल किया कि क्या यह ‘दोहरे जोखिम’ के बराबर नहीं होगी जबकि कानून का सिद्धांत है कि व्यक्ति पर एक ही न्यायाधिकारक्षेत्र में एक ही अपराध के लिए दो बार मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।

वहीं, नौ सितंबर को अदालत को सूचित किया गया कि भाटिया के स्थान पर अभियोजक के तौर पर मधुकर पांडेय को नियुक्त किया गया है। अदालत ने रेखांकित किया, ‘‘जांच अधिकारी द्वारा बताया गया है कि विशेष लोक अभियोजक डीके भाटिया, जो इससे पहले इस मामले को देख रहे थे, के स्थान पर मधुकर पांडेय को रखा गया है जिन्हें इस मामले की जानकारी दी जानी है।’’ इसके साथ ही अभियोजन ने मामले पर बहस शुरू करने के लिए दो महीने का समय देने का अनुरोध किया लेकिन न्यायाधीश ने इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया।

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘ न्याय के हित में और राज्य द्वारा प्रभावी प्रतिनिधित्व देने के इरादे से, आरोपों पर विचार करने के लिए पांच अक्टूबर की तरीख पुन: अधिसूचित करें। यह स्पष्ट किया जाता है कि दोनों पक्ष जिरह के लिए तैयार होकर आए।’’

अदालत प्राथमिकी संख्या 117/2020 पर सुनवाई कर रही है जो जीशान नामक व्यक्ति की शिकायत पर दर्ज की गई है और इस मामले में मोहम्मद शदाब, राशिद सैफी, शाह आलम और अन्य सह आरोपी हैं। जीशान की इसी शिकायत को प्राथमिकी संख्या 109/2020 में भी दर्ज की गई है जिसमें शहदाब, सैफी और आलम को दो सितंबर को आरोप मुक्त कर दिया गया।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 25 फरवरी 2020 को भीड़ ने उसकी फर्नीचर की दुकान लूट ली। दोनों प्राथमिकी चार मार्च 2020 को दर्ज कराई गई। प्राथमिकी संख्या 117/2020 में आम आदमी पार्टी का निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन का नाम भी एक आरोपी के तौर पर दर्ज है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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