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दिल्ली दंगे: अदालत ने दो मामलों में व्यक्ति को दी जमानत, कहा-जांच में काफी कुछ किए जाने की जरूरत

By भाषा | Updated: November 17, 2020 20:45 IST

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नयी दिल्ली, 17 नवंबर दिल्ली की एक अदालत ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी में हुई सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े दो मामलों में मंगलवार को एक व्यक्ति को जमानत दे दी और कहा कि जांच में अभी काफी कुछ किया जाना बाकी है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने अजय नामक आरोपी को दोनों मामलों में बीस-बीस हजार रुपये के जमानत बॉन्ड और इतनी ही राशि के मुचलके पर जमानत प्रदान कर दी।

ये मामले सांप्रदायिक हिंसा के दौरान ज्योति नगर में तोड़फोड़ और दुकानों को जलाने से जुड़े हैं।

अदालत ने कहा कि गवाह मोहम्मद असलम के बयान के अनुसार आरोपी को उसकी जानकारी पर नीत नगर, रेलवे लाइन के पास झाड़ियों से पकड़ा गया, लेकिन गिरफ्तारी मेमो के अनुसार उसका गिरफ्तारी स्थल ज्येाति नगर थाना है।

इसने कहा कि असलम के बयान में अशोक नगर में जला दी गई एक कार एक्सेसरीज दुकान का जिक्र है, लेकिन उसने प्राथमिकी में संबंधित दुकान की कोई पहचान नहीं की है।

अदालत ने मामलों में पारित अपने आदेश में कहा, ‘‘यह अजीब है कि गवाह मोहम्मद असलम का पूरक बयान भी 18 अप्रैल 2020 को उसके मुख्य बयान वाले दिन ही दर्ज किया गया, जिसके अनुसार वह पुलिस को नीत नगर, रेलवे लाइन झाड़ियों के पास ले गया और आरोपियों अजय तथा गौरव पांचाल की ओर इशारा किया जो 25 फरवरी 2020 को हुई हिंसा में शामिल थे, और इस तरह उसकी जानकारी पर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।’’

इसने कहा, ‘‘अजय के गिरफ्तारी मेमो में असलम को गवाहों में से एक के रूप में बताया गया है। हालांकि, उसकी गिरफ्तारी का स्थान कोई सार्वजनिक स्थल नहीं है जैसा कि पूरक बयान में उल्लेख है, बल्कि स्वयं में ज्योति नगर थाना...वर्तमान मामले की जांच में काफी कुछ किए जाने की आवश्यकता है।’’

अदालत ने कहा कि असलम का बयान 18 अप्रैल को दर्ज किया गया, जबकि घटना 25 फरवरी की है।

इसने कहा कि मामलों में आरोपी के खिलाफ कोई सीसीटीवी फुटेज नहीं है।

अदालत ने आरोपी को सबूतों से छेड़छाड़ न करने तथा बिना अनुमति दिल्ली न छोड़ने का निर्देश दिया।

अजय की ओर से पेश वकील आरती गुप्ता ने कहा कि असलम आरोपी के खिलाफ कई मामलों में गवाह है जो अलग-अलग स्थानों से संबंधित हैं तथा आरोपी एक ही समय पर अलग-अलग स्थानों पर दंगा करने में शामिल नहीं हो सकता।

पुलिस की ओर से पेश विशेष लोक अभियोजक राजीव कृष्ण शर्मा ने आरोपी की जमानत याचिका का विरोध किया।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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