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दिल्ली पुलिस का प्रदर्शन खत्म, मानी गई सभी मांगे, घायल पुलिसवालों के लिए मुआवजे की भी घोषणा

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: November 5, 2019 19:37 IST

दिल्ली उपराज्यपाल अनिल बैजल ने वकीलों के साथ झड़प के बाद मंगलवार को दिल्ली पुलिस कर्मियों के अभूतपूर्व विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर स्थिति की समीक्षा की

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ठळक मुद्देदिल्ली मे पुलिस का 'आंदोलन', दिन भर के धरने के बाद प्रदर्शन खत्म करने के लिए मान गये पुलिसकर्मीउपराज्यपाल अनिल बैजल ने भी की स्थिति की समीक्षा, पूरे घटनाक्रम पर केंद्र सरकार की भी रही नजर

तीस हजारी कोर्ट में वकीलों के साथ झड़प के बाद सड़क पर उतरी दिल्ली पुलिस को मनाने की कोशिशें दिन भर जारी रहने के बाद आखिरकार देर शाम अंजाम तक पहुंची। सभी मांगे माने जाने का आश्वासन मिलने के बाद पुलिसकर्मियों ने करीब 10 घटे चला प्रदर्शन खत्म करने का फैसला लिया।

दिन भर चले घटनाक्रम के बाद शाम में विशेष पुलिस आयुक्त (अपराध) सतीश गोलचा ने प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों को भरोसा दिलाया कि घायल पुलिसकर्मियों कम से कम 25,000 रुपए अनुग्रह राशि के तौर पर दिए जाएंगे।

साथ ही उन्होंने पुलिसकर्मियों से ड्यूटी पर वापस लौटने की गुजारिश की। सतीश गोलचा ने प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों को ये भरोसा भी दिलाया कि दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल की जाएगी। इससे पहले दिल्ली के स्पेशल पुलिस ऑफ कमिश्नर आरएस कृष्णा ने भी पुलिस वालों को समझाने की कोशिश की।

उपराज्यपाल ने की मामले की समीक्षा

दिल्ली उपराज्यपाल अनिल बैजल ने वकीलों के साथ झड़प के बाद मंगलवार को दिल्ली पुलिस कर्मियों के अभूतपूर्व विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर स्थिति की समीक्षा की और कहा कि पूरे मामले में निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करना अनिवार्य है। उपराज्यपाल कार्यालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, विशेष आयुक्त (खुफिया) प्रवीर रंजन ने उपराज्यपाल को मौजूदा स्थिति और उच्च न्यायालय के संबंधित आदेशों के बारे में जानकारी दी। 

उपराज्यपाल ने कहा कि वकील और पुलिस आपराधिक न्याय प्रणाली के महत्वपूर्ण खंभे हैं और उन्हें पूर्ण सद्भाव के साथ काम करना चाहिए। बैजल ने कहा, 'हालिया दुर्भाग्यपूर्ण घटना के मद्देनजर, दोनों के बीच विश्वास बहाल करना और यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि पूरे मामले में न्याय निष्पक्ष रूप से किया जाए।' 

बता दें कि हजारों पुलिसकर्मी पुलिस मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन करते हुए साकेत अदालत के बाहर अपने सहयोगी पर हमले में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

केंद्र सरकार की नजर

केंद्र सरकार दिल्ली की स्थिति पर बारीकी से नजर बनाए हुए है। गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी है। इस बीच, दिल्ली पुलिस ने तीस हजारी अदालत में वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच हुए टकराव के संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय को एक रिपोर्ट सौंपी। इस घटना में कम से कम 20 सुरक्षाकर्मी और कई वकील घायल हुए। अधिकारी ने बताया, ‘‘हम दिल्ली के हालात पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं। एक न्यायिक जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच के नतीजे आने दीजिए।’’ 

दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा रविवार को घटना की जांच के आदेश दिए गए और छह दिन के भीतर रिपोर्ट जमा की जानी है। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट के बारे में बताया कि यह एक तथ्यात्मक रिपोर्ट है, जिसमें दिल्ली पुलिस ने शनिवार की घटना की परिस्थितियों और उसके बाद की गई कार्रवाई का विवरण दिया है।

उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट में शनिवार के बाद हुई घटनाओं को शामिल नहीं किया गया है, जैसे सोमवार को हुई एक घटना, जिसमें वकीलों के एक समूह ने साकेत कोर्ट के बाहर एक पुलिसकर्मी के साथ मारपीट की। 

इन घटनाओं के बाद सैकड़ों पुलिस कर्मचारी मंगलवार को यहां पुलिस मुख्यालय के बाहर विरोध में एकत्र हुए। पुलिसकर्मियों ने तख्तियां ले रखी थीं जिन पर लिखा था, 'पुलिस वर्दी में हम इंसान हैं' और 'रक्षा करने वालों को सुरक्षा की जरूरत।' पुलिसकर्मी आईटीओ स्थित पुलिस मुख्यालय के बाहर जमा हुए और उन्होंने अपने वरिष्ठों से अनुरोध किया कि वर्दी का सम्मान बचाने की खातिर वे उनके साथ खड़े रहें। 

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