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दिल्ली उच्च न्यायालय एलोपैथी के विरूद्ध रामदेव के बयान पर सोमवार को करेगा सुनवाई

By भाषा | Updated: July 25, 2021 15:55 IST

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नयी दिल्ली, 25 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय वर्तमान कोविड-19 महामारी के दौरान एलोपैथी के बारे में कथित रूप से दुष्प्रचार करने को लेकर योगगुरु रामदेव के विरूद्ध सात चिकित्सक संघों द्वारा दायर की गयी अर्जी पर सोमवार को सुनवाई करेगा।

इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति न्यायमूर्ति सी हरिशंकर करेंगे, जिन्होंने चिकित्सक संघों से कथित दुष्प्रचार से जुड़ा वीडियो पेश करने को कहा था।

जो चिकित्सक संघ अदालत पहुंचे हैं, उनमें ऋषिकेश, पटना और भुवेनश्वर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थानों के रेसीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन, चंडीगढ़ के स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान के एसोसिएशन ऑफ रेसीडेंट डॉक्टर्स, यूनियन ऑफ रेसीडेंट डॉक्टर्स ऑफ पंजाब, मेरठ के लाला लाजपत राय स्मारक चिकित्सा महाविद्यालय के रेसीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन एवं हैदराबाद के तेलंगाना जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन शामिल हैं।

उन्होंने आरोप लगाया है कि रामदेव यह बात कहकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं कि एलोपैथी कोविड-19 के कई मरीजों की मौत के लिए जिम्मेदार है और यह धारणा पैदा कर रहे हैं कि एलोपैथी डॉक्टर के हाथों लोगों की जान जा रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि योगगुरु न केवल एलोपैथी उपचार बल्कि कोविड-19 टीकों की सुरक्षा एवं प्रभावकारिता के बारे में आम लोगों के दिमाग में भ्रम पैदा कर रहे हैं। उसने कहा कि ऐसे में आशंका है कि प्रभावशाली व्यक्ति होने के नाते रामदेव के बयान लाखों लोगों को प्रभावित कर सकते हैं और वे एलोपैथी उपचार से मुंह मोड़ सकते हैं जबकि सरकार ने उसे उपचार का मानक रूप तय किया है।

चिकित्सक संघों ने कहा कि यह दुष्प्रचार अभियान और कुछ नहीं, बल्कि रामदेव द्वारा बेची जाने वाली कोरोनिल समेत विभिन्न उत्पादों का विज्ञापन एवं विपणन रणनीति है। उन्होंने कहा कि अगस्त में कोविड-19 की तीसरी लहर की संभावना के मद्देनजर इस अभियान पर पूर्ण विराम लगाना आवश्यक है।

अदालत ने एलोपैथिक दवाइयों के बारे में रामदेव के बयानों एवं कोरोनिल के संबंध में उनके दावों के सिलसिले में दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन द्वारा दायर की गयी अर्जी को लेकर तीन जून को उन्हें सम्मन जारी किया था। हालांकि, उसने रामदेव पर कोई रोक लगाने से इनकार कर दिया था। उसने रामदेव के वकील से बस इतना कहा था कि उनके मुवक्किल कोई भड़काऊ बयान न दें।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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