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नये आईटी नियमों के खिलाफ दायर याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने सरकार से मांगा जवाब

By भाषा | Updated: March 9, 2021 23:55 IST

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नयी दिल्ली, नौ मार्च दिल्ली उच्च न्यायालय ने डिजिटल न्यूज मीडिया के नियमन संबंधी नए सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियमों को चुनौती देने वाली याचिका पर मंगलवार को केन्द्र सरकार से जवाब मांगा।

मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को नोटिस जारी किये। साथ ही, उन्हें जवाब दाखिल करने के लिए समय भी प्रदान किया है।

अदालत ‘फाउंडेशन फॉर इंडिपेंडेंट जर्नलिज्म’ की एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसने सरकार द्वारा 25 फरवरी को जारी नए आईटी नियमों को गैरकानूनी बताते हुये कहा कि इसका लक्ष्य डिजिटल न्यूज मीडिया को नियंत्रित करना और उसका नियमन करना है।

याचिका में कहा गया है कि ये डिजिटल न्यूज मीडिया को जबरदस्त एवं गंभीर नुकसान पहुंचाने वाले हैं और उनके अधिकारों का हनन करते हैं।

याचिका के जरिए नये आईटी नियमों को निष्प्रभावी करने का अनुरोध किया गया है क्योंकि यह समाचारों एवं समसामयिकी के प्रकाशकों को परिभाषित करता है तथा उन पर लागू होता है।

फाउंडेशन के अलावा दो अन्य याचिकाकर्ता ‘द वायर’ के संपादक एम. के. वेणु तथा ‘द न्यूज मिनट’ की प्रधान संपादक धन्या राजेंद्रन हैं।

याचिकाकार्ताओं ने उच्च न्यायालय से अंतरिम संरक्षण की मांग की है, ताकि डिजिटल न्यूज मीडिया संस्थानों के खिलाफ प्राधिकारों द्वारा सुनवाई की अगली तारीख 16 अप्रैल तक कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाए।

इस पर पीठ ने कहा कि यदि कोई कठोर कार्रवाई की जाती है तो याचिकाकर्ता अर्जी के साथ अदालत का रुख कर सकते हैं।

याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व कर रहीं अधिवक्ता नित्या रामकृष्णन ने दलील दी कि समाचार सामग्री के नियमन आईटी एक्ट के उद्देश्य के दायरे में नहीं आते हैं और कहा कि वह कहीं से यह नहीं कर रही हैं कि न्यूज मीडिया नियमन से परे है।

उन्होंने दलील दी , ‘‘मैं ओटीटी (ओवर द टॉप) प्लेटफार्म और सोशल मीडिया के बारे में बात नहीं कर रही हूं। मैं सिर्फ न्यूज मीडिया और समसामयिकी (करेंट अफेयर्स) को लेकर चिंतित हूं। नये नियम लोकतंत्र में अनुमति प्राप्त किसी भी चीज से बहुत आगे तक जाते हैं।’’

याचिका में कहा गया है कि डिजिटल न्यूज मीडिया संस्थानों के एसोसिएशन ‘‘डिजिपब न्यूज इंडिया फाउंडेशन’’ ने फरवरी में दो मंत्रालयों को ज्ञापन देकर आईटी नियम,2021 रद्द करने का अनुरोध किया था, लेकिन आज की तारीख तक कोई जवाब नहीं मिला है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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