घर के बगल में सार्वजनिक मूत्रालय और कूड़ेदान का होना संविधान के तहत स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण में गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार का उल्लंघन?
By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: February 20, 2026 16:36 IST2026-02-20T16:35:19+5:302026-02-20T16:36:25+5:30
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि उनके पड़ोस के लगभग 150 निवासी इस कूड़ेदान का उपयोग अपने अपशिष्ट निपटान के लिए करते हैं और कूड़ेदान और मूत्रालय के पास स्वच्छता बनाए रखने के लिए एमसीडी अधिकारियों से कई बार अनुरोध करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।

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नई दिल्लीः दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक मामले में व्यवस्था दी कि किसी के घर के बगल में सार्वजनिक मूत्रालय और कूड़ेदान का होना संविधान के तहत स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण में गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार का उल्लंघन है। न्यायमूर्ति अमित बंसल ने कहा कि स्वच्छ वातावरण स्वस्थ जीवन का एक अभिन्न अंग है और स्वस्थ वातावरण का अभाव गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार को बाधित करता है।
न्यायमूर्ति अमित बंसल ने कहा कि स्वच्छ वातावरण स्वस्थ जीवन का अभिन्न अंग है और स्वच्छ वातावरण का अभाव गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार का हनन करता है। अदालत ने यह आदेश एक वकील की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया, जिसमें उन्होंने अपनी संपत्ति की पूर्वी दीवार पर अनाधिकृत रूप से बने खुले कूड़ेदान और मूत्रालय के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि उनके पड़ोस के लगभग 150 निवासी इस कूड़ेदान का उपयोग अपने अपशिष्ट निपटान के लिए करते हैं और कूड़ेदान और मूत्रालय के पास स्वच्छता बनाए रखने के लिए एमसीडी अधिकारियों से कई बार अनुरोध करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।
अदालत ने एमसीडी को याचिकाकर्ता के घर के बगल में स्थित खुले कूड़ेदान और मूत्रालय को तत्काल ध्वस्त करने का निर्देश दिया, यह देखते हुए कि खुले कूड़ेदान और सार्वजनिक मूत्रालय की उपस्थिति "निस्संदेह एक उपद्रव" है।