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भारत में राफेल लड़ाकू विमान बनाने की तैयारी में डसॉल्ट एविएशन, दूसरे देशों को बेचा भी जा सकेगा

By शिवेन्द्र कुमार राय | Updated: July 2, 2024 17:56 IST

डसॉल्ट ने पेशकश की है भारतीय वायुसेना की मांग को पूरा करने के लिए स्थानीय स्तर पर राफेल लड़ाकू जेट बनाने के लिए कंपनी तैयार है। इसके अलावा इंजन निर्माता सफ़रन एसए हैदराबाद में राफेल लड़ाकू इंजन की मरम्मत के लिए एक एमआरओ सुविधा स्थापित कर रही है, जो 2025 तक तैयार हो जाएगी।

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ठळक मुद्दे भारत में राफेल लड़ाकू विमान बनाने की तैयारी में डसॉल्ट एविएशनजेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया मेंकंपनी इसकी प्रोडक्शन यूनिट भारत में लगाना चाहती है

नई दिल्ली: फ्रांसीसी विमानन प्रमुख डसॉल्ट एविएशन भारत के मिराज 2000 और राफेल लड़ाकू विमानों के लिए रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल (एमआरओ) सुविधा के लिए जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में है। यहां राफेल लड़ाकू विमानों के नवीनतम संस्करणों का निर्माण भी किया जा सकता है। भारतीय वायु सेना को अगले दो दशकों में कम से कम 100 दो इंजन वाले बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमानों की जरूरत है। डसॉल्ट एविएशन की नजर इस बड़े सौदे पर भी है।

फ्रांस में राजनीतिक उथल-पुथल के बावजूद इमैनुएल मैक्रॉन सरकार और डसॉल्ट ने पेशकश की है भारतीय वायुसेना की मांग को पूरा करने के लिए स्थानीय स्तर पर राफेल लड़ाकू जेट बनाने के लिए कंपनी तैयार है। इसके अलावा इंजन निर्माता सफ़रन एसए हैदराबाद में राफेल लड़ाकू इंजन की मरम्मत के लिए एक एमआरओ सुविधा स्थापित कर रही है, जो 2025 तक तैयार हो जाएगी।

सफ़रान ने कहा है कि अगर भारतीय वायुसेना के लिए राफेल ऑर्डर मिलता है, तो वह भारत में एम-88 इंजन का निर्माण करने को तैयार है। भारत अपनी वायुसेना की जरूरतों को स्वदेशी विमानों से पूरा करना चाहता है। GE-414 इंजन के साथ HAL का LCA मार्क II मिराज 2000 की जगह लेगा। लेकिन इसमें कम से कम 10 साल का समय लगेगा। इसे देखते हुए राफेल लड़ाकू विमान बनाने वाली कंपनी इसकी प्रोडक्शन यूनिट भारत में लगाना चाहती है। यही नहीं फ्रांस लड़ाकू विमानों को निर्यात करने की भी अनुमति देगा। 

डसॉल्ट ने पहले ही राफेल लड़ाकू विमानों के निर्माण के लिए भारत में कंपनियों से टाइटेनियम भागों की सोर्सिंग शुरू कर दी है और आपूर्ति श्रृंखला सूची में अधिक स्थानीय विक्रेताओं को जोड़ने की योजना बना रही है। भारत में राफेल लड़ाकू विमानों का निर्माण दोनों करीबी सहयोगियों के लिए फायदेमंद है क्योंकि डसॉल्ट के पास पहले से ही क्रोएशिया, ग्रीस, सर्बिया, मिस्र, कतर, यूएई और इंडोनेशिया से लगभग 300 लड़ाकू ऑर्डर हैं। कंपनी लड़ाकू विमानों की आपूर्ति के लिए सऊदी अरब से भी बातचीत कर रही है और फ्रांसीसी वायुसेना ने उससे 42 और राफेल मांगे हैं।

टॅग्स :राफेल फाइटर जेटफ़्रांसइंडियन एयर फोर्सDefense
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