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कोरोना से लड़ाई में प्राइवेट अस्पताल भी कदमताल को तैयार, अपोलो, फोर्टिस और मेदांता अस्पताल के डॉक्टर्स ने की तैयारी

By एसके गुप्ता | Updated: March 24, 2020 17:12 IST

मेदांता अस्पताल के सीएमडी डॉ नरेश त्रेहन ने बातचीत में कहा कि काेरोना एक संक्रामक बीमारी है. इस लड़ाई में इस लड़ाई में वह सरकार इस इस लड़ाई इस लड़ाई में इस लड़ाई में निजी अस्पताल सरकार के साथ हैं.

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ठळक मुद्देकोरोना से लड़ाई में निजी अस्पताल भी तैयारी के साथ शामिल हो गए हैं.केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन को करोना से लड़ाई में साथ देने का भरोसा दिया है.

कोरोना से लड़ाई में निजी अस्पताल भी तैयारी के साथ शामिल हो गए हैं. इन अस्पतालों में अपोलो ,फॉर्टिस एस्कॉर्ट हार्ट इंस्टीट्यूट और मेदांता प्रमुख रूप से शामिल है. जिन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन को करोना से लड़ाई में साथ देने का भरोसा दिया है. इसके अलावा आईसीएमआर ने मंगलवार सुबह 10 बजे तक देश में 492 लोगों के कोरोना सैंपल पॉजिटिव होने की पुष्टि की है.

सरकारी अस्पतालों के साथ निजी अस्पताल भी अब काेरोना से लड़ाई में आगे आए हैं. अपोलो अस्पताल ने अपनी वेबसाइट के जरिए काेरोना जांच में सहयोग के लिए 24 घंटे सातों दिन सेवाएं देने का भरोसा दिलाया है. अपोलो की वेबसाइट पर जाकर लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हैं या नहीं इसकी जांच कुछ सवालों के जवाब देकर कर सकते हैं. जिससे उन्हें इस बात की जानकारी भी हो जाएगी कि उन्हें कोरोना का टेस्ट कराना जरूरी है या नहीं?

सवालों में लोगों से पूछा जा रहा है कि उन्हें खांसी जुकाम बुखार तो नहीं है ? उन्हें पहले से किस तरह की बीमारी रही है ? अब उन्हें किस तरह की परेशानी है ? जिसके आधार पर लोगों के स्वास्थ्य का मूल्यांकन कर काेरोना टेस्ट कराना है या नहीं इसकी जानकारी दी जा रही है.

फॉर्टिस एस्कॉर्ट हार्ट इंस्टीट्यूट के चेयरमैन डॉ अशोक सेठ ने एक सवाल के जवाब में कहा कि उनके यहां कोरोना  रोगियों के ट्रीटमेंट के लिए 15 बिस्तर का अलग से वार्ड बनाया गया है. उन्होंने कहा कि 15 दिन पहले ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन से भी बात की थी और उन्हें आश्वस्त किया था कि कोरोना से लड़ाई में निजी अस्पताल सरकार के साथ हैं.

मेदांता अस्पताल के सीएमडी डॉ नरेश त्रेहन ने बातचीत में कहा कि काेरोना एक संक्रामक बीमारी है. इस लड़ाई में इस लड़ाई में वह सरकार इस इस लड़ाई इस लड़ाई में इस लड़ाई में निजी अस्पताल सरकार के साथ हैं. सरकारी अस्पतालों में  काेरोना  का ट्रीटमेंट दिया जा रहा है . लेकिन कुछ लोग निजी अस्पतालों में   अपना उपचार कराना चाहते हैं  . अगर  कोई काेरोना संक्रमित रोगी निजी अस्पतालों में आएगा तो उसका भी  इलाज किया जाएगा .

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