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विस्फोटक मिलने और कारोबारी की मौत के मामले में अदालत ने वाजे को न्यायिक हिरासत में भेजा

By भाषा | Updated: April 9, 2021 18:32 IST

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मुंबई, नौ अप्रैल उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के पास एक एसयूवी से विस्फोटक मिलने और कारोबारी मनसुख हिरन की मौत के मामले में यहां एक विशेष एनआईए अदालत ने निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को शुक्रवार को 23 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

वाजे को 13 मार्च को गिरफ्तार किया गया था और एनआईए हिरासत समाप्त होने के बाद एक विशेष अदालत के समक्ष पेश किया गया।

न्यायाधीश ने मीडिया को कागजात लीक करने के मामले में वाजे को फटकार लगाई।

वाजे ने सात अप्रैल को एक पत्र जारी किया था जिसमें दावा किया गया था कि महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री अनिल देशमुख ने मुंबई पुलिस में सेवा जारी रहने के लिए दो करोड़ रुपये की मांग की थी। वाजे का आरोप था कि महाराष्ट्र सरकार के मंत्री अनिल परब ने ठेकेदारों से पैसे इकट्ठे करने को कहा था।

विशेष न्यायाधीश पी आर सितरे ने निलंबित सहायक पुलिस निरीक्षक (एपीआई) वाजे को 23 अप्रैल तक की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। एनआईए ने वाजे को अपनी हिरासत में और रखने पर जोर नहीं दिया।

अदालत के वाजे को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद बचाव पक्ष के वकील ए पोंडा ने न्यायाधीश से अनुरोध किया कि उनके मुवक्किल को जेल में सुरक्षित कोठरी दी जाए क्योंकि उन्हें जान का खतरा है।

बाद में 49 वर्षीय वाजे को नवी मुंबई की तलोजा जेल ले जाया गया।

सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने वाजे और उनके बचाव पक्ष के वकीलों को सात अप्रैल को मीडिया को दस्तावेज लीक करने और उन्हें सीआरपीसी के तहत निर्दिष्ट प्रक्रिया के तहत अदालत में जमा नहीं करने के मामले में फटकार भी लगाई।

एनआईए की ओर से पक्ष रख रहे विशेष सरकारी अभियोजक सुनील गोंजाल्विस ने मामले को अदालत में संज्ञान में लाया।

उन्होंने कहा कि आरोपी को अदालत में जो भी कहना है, निर्दिष्ट प्रक्रिया के बाद उसे लिखकर बताने या जमा करने का अवसर दिया गया था।

गोंजाल्विस ने कहा कि इसके बावजूद आरोपी ने पिछली सुनवाई पर अपने वकीलों को कुछ दस्तावेज दिये।

उन्होंने कहा, ‘‘एनआईए को भी इन कागजात की जानकारी नहीं थी। उन्हें पिछली सुनवाई पर पांच मिनट के लिए उनके वकीलों से बात करने की अनुमति दी गयी थी और उन्होंने इसका फायदा उठाया।’’

इस पर वाजे के वकील पोंडा ने कहा, ‘‘मैं हैरान हूं, मुझे इसके बारे में जानकारी नहीं है और मैं इसमें शामिल नहीं हूं।’’

आरोपी के प्रति नाराजगी जताते हुए न्यायाधीश ने कहा कि इस तरह के कृत्य अब नहीं होने चाहिए।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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