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न्यायालय ने मोदी सरकार को गलती सुधारने का मौका दिया: कांग्रेस

By भाषा | Updated: June 30, 2021 20:27 IST

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नयी दिल्ली, 30 जून कांग्रेस ने कोविड-19 से जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को आर्थिक मदद देने संबंधी उच्चतम न्यायालय के आदेश को लेकर बुधवार को दावा किया कि देश की सबसे बड़ी अदालत ने नरेंद्र मोदी सरकार को अपनी गलती सुधारने का मौका दिया है और अब उसे हर पीड़ित परिवार की 10 लाख रुपये की मदद करनी चाहिए।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘‘उच्चतम न्यायालय ने मोदी सरकार को ग़लती सुधारने का मौक़ा दिया है। कम से कम अब सरकार को मुआवज़े की सही राशि तय करके पीड़ितों को राहत देनी चाहिए। ये सही दिशा में एक महत्वपूर्ण क़दम है।’’

पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने एक बयान में आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोविड प्रभावित परिवारों के साथ खड़े नहीं होकर एक बार फिर से देश को निराश किया है।

उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि अब कोविड मुआवजा कोष की स्थापना की जाए और कोरोना वायरस के कारण जान गंवाने वाले हर व्यक्ति के परिवार को 10 लाख रुपये की मदद दी जाए।

सुरजेवाला ने कहा, ‘‘हम मांग करते हैं कि प्रधानमंत्री और मोदी सरकार उदासीनता की नींद से जागें और कोविड मुआवजा कोष की स्थापना करें।’’

उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार लोगों की मदद करने से पीछे हट गई और उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद वह पूरी तरह बेनकाब हो गई है।

सुरजेवाला ने कहा कि प्रधानमंत्री राजधर्म का पालन करें और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकारण के मुखिया के तौर पर उनकी जिम्मेदारी है कि वह महामारी में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति सहानुभूति दिखाएं।

गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) को निर्देश दिया कि कोविड-19 से जान गंवाने वाले लोगों के परिजन को दी जाने वाली आर्थिक मदद के न्यूनतम मानदंड के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एम आर शाह की विशेष पीठ ने कहा कि अदालत आर्थिक मदद की एक निश्चित राशि तय करने का निर्देश केंद्र को नहीं दे सकती लेकिन सरकार कोविड-19 से मारे गए लोगों के परिवारों को दी जाने वाली आर्थिक मदद की राशि का न्यूनतम मानदंड, हर पहलू को ध्यान में रखते हुए निर्धारित कर सकती है।

पीठ ने कहा कि सरकार देश में उपलब्ध संसाधनों तथा धन को ध्यान में रखते हुए एक उचित राशि तय कर सकती है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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