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न्यायालय ने 2019 के तमिलनाडु भूमि अधिग्रहण कानून को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की

By भाषा | Updated: June 29, 2021 20:05 IST

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नयी दिल्ली, 29 जून उच्चतम न्यायालय ने उन याचिकाओं को खारिज कर दिया जिनमें तमिलनाडु भूमि अधिग्रहण कानून (संचालन, संशोधन और सत्यापन का पुनरुद्धार) अधिनियम, 2012 को चुनौती दी गई थी और इसे “वैध विधायी कवायद” माना।

शीर्ष अदालत ने उल्लेख किया कि 2019 के कानून को पूर्व प्रभाव से 26 सितंबर 2013 से लागू किया गया और इसका उद्देश्य उस तारीख या उसके बाद राज्य कानूनों के तहत सभी लंबित अधिग्रहणों को मान्य करना था, जिन्हें मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा रद्द कर दिया गया था।

याचिकाकर्ताओं ने न्यायालय के समक्ष दावा किया था कि राज्य विधायिका द्वारा “असंवैधानिक अधिनियमों” को पुनर्बहाल करने के लिये अपनाए गए विधायी तरीके उच्च न्यायालय के जुलाई 2019 के फैसले को रद्द और निष्प्रभावी बनाने के प्रत्यक्ष प्रयास थे और संवैधानिक व्यवस्था में भी इसकी इजाजत नहीं थी क्योंकि यह शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत का उल्लंघन करता है। गौरतलब है कि उच्च न्यायालय ने तीन अधिनियमों के तहत 27 सितंबर 2013 या उसके बाद की सभी लंबित अधिग्रहण कार्यवाहियों को रद्द कर दिया था

न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि तीन कानूनों को पहले उच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दी गई थी और उसने पाया था कि प्रदेश सरकार के कानून, भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजे और पारदर्शिता के अधिकारी, पुनर्वास और पुनर्स्थापना अधिनियम, 2013 के प्रतिकूल हैं और इसलिए अमान्य हैं, जब 27 सितंबर 2013 को कानून को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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