लाइव न्यूज़ :

न्यायालय ने सेन्ट्रल विस्टा परियोजना को दी हरी झंडी, कहा: अदालतों से शासन के लिये नहीं कहा जा सकता

By भाषा | Updated: January 5, 2021 20:02 IST

Open in App

नयी दिल्ली, पांच जनवरी उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली के लुटियन क्षेत्र में राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक तीन किमी के दायरे में केन्द्र की महत्वाकांक्षी ‘‘सेन्ट्रल विस्टा’’ परियोजना को मंगलवार को हरी झंडी दे दी। शीर्ष न्यायालय ने इस परियोजना के लिये पर्यावरण मंजूरी तथा दूसरी आवश्यक अनुमति देने में किसी प्रकार की खामी नहीं पाई।

शीर्ष न्यायालय ने कहा कि वह , ‘‘नीतिगत मामलों के अमल पर पूरी तरह से रोक नहीं लगा सकता’’ और अदालतों से ‘शासन’ करने का आह्वान नहीं किया जा सकता।

केन्द्र ने सितंबर, 2019 में इस परियोजना की घोषणा की थी। इस परियोजना के अंतर्गत एक नये त्रिभुजाकार संसद भवन का निर्माण किया जाना है। इसमें 900 से 1200 सांसदों के बैठने की व्यवस्था होगी। इसके निर्माण का लक्ष्य अगस्त 2022 तक का रखा गया है, जब देश स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ मनाएगा। इस परियोजना के तहत साझा केन्द्रीय सचिवालय 2024 तक बनने का अनुमान है।

न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ ने 2:1 से अपने फैसले में कहा कि इस परियोजना के अंतर्गत नयी संसद भवन के निर्माण के लिये पर्यावरण मंजूरी और भूमि के उपयोग में परिवर्तन संबंधी अधिसूचना वैध हैं।

न्यायमूर्ति खानविलकर ने अपनी और न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी की ओर से लिखे गये 432 पेज फैसले में कहा, ‘‘हम यह व्यवस्था देते हैं कि (ए) सेन्ट्रल विस्टा समिति द्वारा अनापत्ति देने, दिल्ली शहरी कला आयोग कानून,1973 के अंतर्गत दिल्ली शहरी कला आयोग द्वारा इसकी मंजूरी और दिल्ली के लिये भवन उपनियम 2016 के उपनियम 1.12 के अंतर्गत धरोहर संरक्षण समिति द्वारा दी गयी ‘पूर्व मंजूरी’ प्रदान करने में किसी प्रकार की खामी नहीं है।’’

इस पीठ के तीसरे सदस्य न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने निर्णय लेने की प्रक्रिया में जनता की भागीदारी और परियोजना के लिये धरोहर संरक्षण समिति द्वारा पहले मंजूरी लेने में प्राधिकारियों की कथित विफलता से संबंधित बिन्दुओं पर अपना 179 पेज का असहमति का फैसला सुनाया।

न्यायमूर्ति खन्ना ने कहा, ‘‘चूंकि, निर्णय लेने की प्रक्रिया में जनता की भागीदारी संबंधी कानूनी प्रावधान की व्याख्या और परियोजना के लिये धरोहर संरक्षण समिति द्वारा पहले मंजूरी लेने में विफलता के पहलू पर मेरी राय सहयोगी न्यायाधीश ए एम खानविलकर की राय से अलग है, इसलिए मैं अलग से असहमति का निर्णय लिख रहा हूं।’’

हालांकि, न्यायमूर्ति खन्ना ने ‘‘ परामर्श के लिये बोली आमंत्रित करने की नोटिस और शहरी कला आयोग के आदेश के बिन्दुओं पर बहुमत के निर्णय से सहमति व्यक्त की। ’’

न्यायमूर्ति खानविलकर ने बहुमत के फैसले में इस परियोजना को चुनौती देने वाली दस याचिकाओं में इससे संबंधित विभिन्न पहलुओं पर उठाई गयी आपत्तियों पर विस्तृत फैसला सुनाया।

पीठ ने अपने फैसले में कहा, ‘‘हम समान रूप से विस्मित हैं कि क्या हमे प्रारंभिक चरण में ही अपूर्णीय क्षति की जानकारी या तात्कालिक आवश्यकता के बगैर ही इसे पूरी तरह रोकने के लिये कूद पड़ना चाहिए या हम बगैर किसी कानूनी आधार के नैतिकता या शुचिता के मामले में सरकार को निर्देश दे सकते हैं। प्रतिपादित कानूनी व्यवस्था के मद्देनजर हमें इन क्षेत्रों में दखल देने से बचना चाहिए।’’

पीठ ने कहा, ‘‘हमारे लिये यह कहना जरूरी है क्योंकि हाल के समय में विशुद्ध रूप से नीति से संबंधित या व्यवस्था के प्रति सामान्य शिकायतों की परख के लिये जनहित/सामाजिक हित वाद का रास्ता अपनाने की प्रवृत्त बढ़ी है। नि:संदेह, अदालतें जनता के अक्षुण्ण विश्वास की रक्षक हैं और यह भी हकीकत है कि जनहित की कुछ कार्रवाई के सराहनीय नतीजे भी सामने आये हैं लेकिन साथ ही यह समझना भी जरूरी है कि अदालतें संविधान में परिभाषित सीमाओं के भीतर ही काम करती हैं। हमें शासन करने के लिये नहीं कहा जा सकता।’’

बहुमत के फैसले में कहा गया कि दिल्ली विकास प्राधिकरण कानून के तहत सेन्ट्रल विस्टा परियोजना के सात भूखंडों के उपयोग में बदलाव के संबंध में केन्द्र सरकार द्वारा अधिकारों का इस्तेमाल ‘न्यायसंगत और उचित’’ था। पीठ ने इसके साथ ही भूमि उपयोग के बारे में 20 मार्च, 2020 की सरकार की अधिसूचना की पुष्टि कर दी।

न्यायालय ने कहा, ‘‘विशेषज्ञों की समिति द्वारा पर्यावरण संबंधी मंजूरी देने की सिफारिश और पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा इसकी अनुमति न्याय संगत, उचित और 2006 की अधिसूचना सहित कानून के अनुसार है। हम इसे सही ठहराते हुये उचित निर्देश दे रहे हैं ताकि परियोजना के पक्ष में पेश उपायों पर अक्षरश: अमल सुनिश्चित की जा सके।

बहुमत के फैसले में यह भी कहा गया कि इस परियोजना में नयी संसद भवन के अभिन्न हिस्से के रूप में इसमें पर्याप्त क्षमता के स्माग टावर स्थापित किये जायें और इसके अलावा निर्माण कार्य के दौरान ही चरणबद्ध तरीके से इसमें ‘‘स्माग गन’’ का इस्तेमाल किया जाये।

न्यायालय ने कहा कि विकास कार्य प्रारंभ होने पर धरोहर संरक्षण समिति से पूर्व अनुमति ली जा सकती है और परियेाजना के नियोजन तथा इसे अंतिम रूप देने के चरण में भी ऐसा करना आवश्यक होगा।

शीर्ष न्यायालय ने कहा, ‘‘तद्नुसार, प्रतिवादी (प्राधिकारी) धरोहर कानूनों से शासित होने वाले इन भूखंड/निर्माण/क्षेत्र में किसी भी प्रकार का विकास/पुनर्विकास का वास्तविक काम शुरू करने से पहले नामिक प्राधिकारी से अनुमति लेंगे अगर पहले से ऐसा नहीं किया गया हो।’’

पीठ ने इस परियोजना के लिये परामर्शी के चयन या नियुक्ति को भी न्याय संगत और उचित करार दिया है।

पीठ ने कहा कि इस परियोजना के प्रस्तावक ने यातायात प्रबंधन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन,जल प्रबंधन और कचरा निष्पादन के बारे में विस्तृत अध्ययन करके योजना तैयार की है।

न्यायालय ने कहा कि जब विशेषज्ञों की समिति ने पर्यावरण मंजूरी देते समय सारे तथ्यों पर विचार किया है और इसके फैसले को ठोस तथ्यों के आधार पर ही चुनौती दी जा सकती है जिनसे यह पता चलता हो कि पूरी तरह से इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। पीठ ने कहा कि इस मामले के तथ्यों से ऐसा पता नहीं चलता कि कोई जानकारी जानबूझकर छिपाई गयी है।

न्यायालय ने कहा कि इस परियोजना के बारे में आशय के चरण से ही सारे संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक दायरे में थे।

सेन्ट्रल विस्टा परियोजना पर शीर्ष न्यायालय का फैसला लंबित होने के दौरान ही 10 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नयी संसद भवन का शिलान्यास किया था।

केन्द्र ने न्यायालय में यह भी कहा था कि इस परियोजना से उस ‘‘धन की बचत’’ होगी, जिसका भुगतान राष्ट्रीय राजधानी में केन्द्र सरकार के मंत्रालयों के लिए किराये पर परिसर लेने के लिए किया जाता है।

केन्द्र का कहना था कि नए संसद भवन के निर्माण का निर्णय जल्दबाजी में नहीं लिया गया और परियोजना के लिए किसी भी तरह से किसी भी नियम या कानून का कोई उल्लंघन नहीं किया गया है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

Open in App

संबंधित खबरें

भारतअसम की जनता ने इस बार दो काम पक्के किए?, पीएम मोदी बोले- एनडीए की हैट्रिक और कांग्रेस के शाही परिवार के नामदार की हार की सेंचुरी का रिकॉर्ड?

क्राइम अलर्टबास्केटबॉल हुप पर पुल-अप्स कर रहे थे समुद्री इंजीनियरिंग संस्थान में 20 वर्षीय कैडेट विशाल वर्मा?, बैकबोर्ड गिरने से मौत

भारतपाकिस्तानी सोशल मीडिया की झूठी जानकारी का इस्तेमाल कर पत्नी पर आरोप, सीएम सरमा ने कहा-फर्जी डॉक्यूमेंट्स के साथ जनता के सामने बात?

क्राइम अलर्ट27 करोड़ रुपये से अधिक की जीएसटी धोखाधड़ी, मेरठ और बहराइच में एक्शन, वसीम अकरम, शुभम गुप्ता और नेक आलम अरेस्ट

कारोबारपश्चिम एशिया युद्ध के बीच जमकर गाड़ी खरीद कर लोग?, 2025-26 में 13.3 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 2,96,71,064?, जानिए दोपहिया वाहनों की संख्या

भारत अधिक खबरें

भारतमुंबई में IIMCAA कनेक्शन्स मीट, फिल्म निर्माता मनोज मौर्य की सिल्वर जुबली सम्मान से सम्मानित

भारतकौन थे डॉ. मणि छेत्री?, 106 वर्ष की आयु में निधन

भारतपश्चिम एशिया युद्धः ओमान तट के निकट ड्रोन बोट हमले में जान गंवाने वाले 25 वर्षीय नाविक दीक्षित सोलंकी का शव मुंबई लाया

भारतगोदामों से सीधे एलपीजी सिलेंडर की बिक्री पर सख्त प्रतिबंध, सीएम रेखा गुप्ता ने कहा-भंडारण केंद्रों पर न जाएं और न ही भीड़ में इकट्ठा हों

भारतउच्च शिक्षा और अनुसंधान की चुनौतियां