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सुप्रीम कोर्ट ने ताज ट्रेपेजियम क्षेत्र में पर्यावरणीय मंजूरी को दी अनुमति, जानिए पूरा मामला

By भाषा | Updated: December 7, 2019 06:04 IST

उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य प्राधिकरणों को विभिन्न परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय मंजूरी देने की अनुमति दे दी

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ठळक मुद्देपेयजल आपूर्ति, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और ताज ट्रेपेजियम क्षेत्र (टीटीजेड) में नाली की व्यवस्था करना शामिल है। आलोक में हमारा विचार है कि इसके लिए आवश्यक मंजूरी देने में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए।’’ 

उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य प्राधिकरणों को विभिन्न परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय मंजूरी देने की अनुमति दे दी, जिनमें पेयजल आपूर्ति, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और ताज ट्रेपेजियम क्षेत्र (टीटीजेड) में नाली की व्यवस्था करना शामिल है।

शीर्ष अदालत ने पिछले वर्ष 22 मार्च को टीटीजेड में विभिन्न प्राधिकरणों द्वारा पर्यावरणीय मंजूरी देने के सिलसिले में ‘यथास्थिति’ बनाने के निर्देश दिए थे। उसने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ताजमहल और आसपास के पर्यावरण संरक्षण के लिए दृष्टिकोण दस्तावेज पेश किए जाने तक यथास्थिति बनाने के निर्देश दिए थे। टीटीजेड उत्तर प्रदेश के आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, हाथरस और एटा और राजस्थान के भरतपुर जिले में करीब 10,400 वर्गकिलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। उच्चतम न्यायालय स्मारक और इसके आसपास के संरक्षण के लिए पर्यावरणविद एम. सी. मेहता की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था।

प्रधान न्यायाधीश एस. ए. बोबडे और न्यायमूर्ति बी. आर. गवई तथा न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने अपने पहले के आदेश में संशोधन किया। उसने इस तथ्य को ध्यान में रखकर पहले के आदेश में संशोधन किया कि राज्य सरकार ने ताजमहल और टीटीजेड में पर्यावरण संरक्षण के लिए ‘दृष्टिकोण दस्तावेज’ पेश करने के इसके आदेश का अनुपालन किया है।

इसने राज्य सरकार की याचिका का संज्ञान लिया कि सरकार एवं अन्य वैधानिक प्राधिकरणों को पर्यावरणीय मंजूरी देने की अनुमति दी जाए ‘‘जो पेयजल आपूर्ति, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, ड्रेनेज सिस्टम, ठोस कचरा निष्पादन, साझा उत्सर्जन शोधन संयंत्र, जैव चिकित्सा कचरा शोधन संयंत्र और कचरा से ऊर्जा उत्पादन संयंत्र’’ जैसी आवश्यक जनसुविधाएं मुहैया कराने के लिए जरूरी हैं। शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा, ‘‘टीटीजेड के निवासियों की मूलभूत जीवनयापन स्थितियों के लिए उपरोक्त सुविधाओं के आलोक में हमारा विचार है कि इसके लिए आवश्यक मंजूरी देने में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए।’’ 

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