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देशों को स्कूलों को दोबारा खोलने के लिए बृहद टीकाकरण का इंतजार नहीं करना चाहिए : विश्वबैंक

By भाषा | Updated: October 3, 2021 17:25 IST

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(गुंजन शर्मा)

नयी दिल्ली, तीन अक्टूबर विश्वबैंक के अनुसार, सबूत संकेत देते हैं कि कोविड-19 से बच्चों के कम संक्रमित होने की आशंका है और टीके के विकास से पहले भी विभिन्न देशों में ‘सुरक्षित’ तरीके से स्कूलों को खोलने के अनुभव दिखाते हैं कि शिक्षा प्रणाली को ऑफलाइन स्कूल व्यवस्था में लौटने के लिए बृहद टीकाकरण का इंतजार करने की जरूरत नहीं है।

नए नीति नोट में विश्वबैंक की शिक्षा टीम ने दुनिया के विभिन्न देशों के अनुभवों को रेखांकित किया है जहां पर स्कूल पर्याप्त एहतियाती रणनीति के तहत खोले गए और संकेत मिला कि स्कूलों में विद्यार्थियों, कर्मचारियों और समुदाय में संक्रमण फैलने का खतरा कम है।

टीम ने रेखांकित किया कि महामारी के करीब एक साल बाद हम और बेहतर तरीके से वायरस और बीमारी को जानते हैं, यह भी जानते हैं कि संक्रमण को कैसे रोका जा सकता है और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) जैसे स्वास्थ्य प्राधिकारियों ने भी ‘अंतिम विकल्प’ के तौर पर स्कूलों को बंद करने की अनुशंसा की है।

विश्वबैंक ने कहा, ‘‘उपलब्ध सबूतों से संकेत मिलता है कि बच्चों के कोरोना वायरस से संक्रमित होने का खतरा बहुत कम है, उनकी सेहत पर गंभीर असर होने और मौत की आशंका कम है, उनसे दूसरों को संक्रमण फैलने का खतरा भी कम हैं। स्कूल के भीतर संक्रमण की दर कम है खासतौर पर प्राथमिक और पूर्व प्राथमिक स्कूलों में। हालांकि, कर्मचारियों को दूसरे कर्मचारियों से संक्रमित होने का खतरा अधिक है न कि बच्चों से संक्रमित होने का।’’

विश्वबैंक ने कहा, ‘‘टीके के विकास से पहले जब सामुदायिक स्तर पर संक्रमण की उच्च दर थी तब सुरक्षित तरीके से स्कूलों को खोलने के देशों के अनुभव दिखाते हैं कि बड़े पैमाने पर स्कूल में कार्यरत कर्मियों और समुदाय के अन्य वयस्कों का टीकाकरण होने तक शिक्षा प्रणाली को बंद रखने की जरूरत नहीं है। हालांकि, स्कूल कर्मियों को टीकाकरण में प्राथमिकता देने से स्कूलों में आने वाले बच्चों व अन्य के डर को कम किया जा सकता है।’’

विश्वबैंक ने रेखांकित किया कि स्कूलों को बंद रखने से वहां से संक्रमण फैलने के खतरे को खत्म तो किया जा सकता है लेकिन इससे बच्चों की पढ़ाई, उनके मानसिक स्वास्थ्य और पूर्ण विकास पर असर पड़ता है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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