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Coronavirus: कोरोना की काली छाया से सुबह मिलने वाले अख़बार पर भी गहराया संकट

By शीलेष शर्मा | Updated: March 27, 2020 05:48 IST

कोरोना को लेकर दुनिया से जो ख़बरें आ रही हैं और देश में कोरोना पॉजिटिव मामलों की संख्या में हो रहे इज़ाफ़े के साथ-साथ 21 दिन के लॉकडॉउन ने पढ़े लिखों को इतना डरा दिया है कि उन्होंने अख़बारों को ख़रीदना बंद कर दिया है, जिससे राजधानी दिल्ली और एनसीआर में अख़बारों की बिक्री 10 से 25 फ़ीसदी तक पिछले सात दिनों में गिर गयी है। 

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ठळक मुद्देकोरोना की दहशत की चपेट में हर सुबह सच से रूबरू कराने वाले अख़बार भी चपेट में आते नज़र आ रहे हैं।लोकमत ने ऐसे हॉकरों से सीधी बात की। हॉकर सावन जो एनसीआर में पिछले 30 वर्षों से अख़बार डाल रहे हैं ने बताया कि अकेले एनसीआर में 20 फ़ीसदी ख़पत कम हुयी है क्योंकि सब्सक्राइबर ने फ़िलहाल अख़बार बंद करने को कह दिया है।

कोरोना की दहशत की चपेट में हर सुबह सच से रूबरू कराने वाले अख़बार भी चपेट में आते नज़र आ रहे हैं। कोरोना को लेकर दुनिया से जो ख़बरें आ रही हैं और देश में कोरोना पॉजिटिव मामलों की संख्या में हो रहे इज़ाफ़े के साथ-साथ 21 दिन के लॉकडॉउन ने पढ़े लिखों को इतना डरा दिया है कि उन्होंने अख़बारों को ख़रीदना बंद कर दिया है, जिससे राजधानी दिल्ली और एनसीआर में अख़बारों की बिक्री 10 से 25 फ़ीसदी तक पिछले सात दिनों में गिर गयी है। 

अख़बार पढ़ने वालों को सुबह-सुबह अख़बार पढ़ने की पुरानी लत परेशान ज़रूर करती है लेकिन बहुमंजिला इमारतों में अख़बार डालने वाले हॉकरों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई है जिससे अख़बार प्रेमियों को अख़बार नहीं मिल रहा है।

लोकमत ने ऐसे हॉकरों से सीधी बात की। हॉकर सावन जो एनसीआर में पिछले 30 वर्षों से अख़बार डाल रहे हैं ने बताया कि अकेले एनसीआर में 20 फ़ीसदी ख़पत कम हुयी है क्योंकि सब्सक्राइबर ने फ़िलहाल अख़बार बंद करने को कह दिया है।

यह पूछने पर कि बंद करने के पीछे क्या कारण बताते है, सावन कहते हैं कि उनको डर है कि अख़बार छूने  से कोरोना अपनी चपेट में ले सकता है। हालांकि यह सभी बिना अख़बार लिए पूरे महीने का पैसा देने को तैयार हैं।

दूसरे हॉकर उपेंद्र बताते हैं कि सभी अख़बार कंपनियां हॉकरों से पूरा सहयोग कर रही हैं, एक तरफ़ वापसी ली जा रही है तो सेंटर से कम प्रतियां उठाने की सुविधा दी जा रही हैं, अभी 20 फ़ीसदी की बिक्री घटी है, देखो आगे क्या होता है।

बंगाल में तो हॉकरों ने अख़बार न उठाने की चेतावनी समाचार संस्थानों को दे दी है, इस नयी चुनौती में अख़बारों के सामने नया संकट आता दिख रहा है। पहले से ही न्यूज़ प्रिंट की बड़ी हुई क़ीमतों, विज्ञापनों की कटौती ने समाचार पत्र उद्योग को संकट में खड़ा कर दिया है ऊपर से यह नया संकट खड़ा होता नज़र आने लगा है, हालांकि समाचार पत्र सोशल मीडिया पर वीडिओ डाल कर प्रचार कर रहे हैं किअख़बार को छपाई करते समय पूरी तरह सैनेटाइज़ किया जा रहा है, बाबजूद इसके बिक्री में गिरावट जारी है। 

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