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कोरोना वायरस: दिल्ली में खतरे की घंटी! 191 कोविड-19 केस के सोर्स का कोई रिकॉर्ड नहीं

By निखिल वर्मा | Updated: April 18, 2020 11:18 IST

भारत में कोरोना वायरस के मामलों बढ़ोत्तरी जारी है. बीते 24 घंटे में देश में 991 मामले मिले हैं जबकि 43 और लोगों की मौत हो गई है.

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ठळक मुद्देदिल्ली में प्रशासनिक अधिकारी 191 उन लोगों का इतिहास खंगाल रहे हैं जिनके संक्रमण का सोर्स अब तक पता नहीं चला हैदेश में कोविड-19 से मरने वालों की संख्या 480 हुई, संक्रमितों की संख्या बढ़ कर 14,378 हुई

भारत में महाराष्ट्र के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्लीकोरोना वायरस से प्रभावित राज्य है। दिल्ली में अब तक कोरोना वायरस के 1707 मामलों की पुष्टि हुई है और मरने वाले लोगों की कुल संख्या 42 हो गई। दिल्ली के 68 इलाकों को अब तक कंटेनमेंट जोन घोषित किया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय दिल्ली के सभी नौ जिलों को हॉटस्पॉट जिले घोषित कर चुका है। इन सबके बीच प्रशासन के सामने एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। 191 मरीजों के ऐसे निकले हैं जिनके संक्रमण के सोर्स का कोई रिकॉर्ड ही नहीं है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कुल मामलों में 1080 निजामुद्दीन मरकज घटना से जुड़े हैं, इसके बाद लोकल ट्रांसमिशन  के 353 मामले हैं। यानि ये लोग कोरोना पॉजिटिव के संपर्क में आए होंगे। यात्रा इतिहास वाले लोगं की संख्या 83 है। लेकिन 191 लोगो कोरोना पॉजिटिव कैसे हुए, इसकी जानकारी अब तक नहीं मिल पाई है।

इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के अनुसार, 191 कोरोना पॉजिटिव अभी तक स्वास्थ्य अधिकारियों को यह बताने में असमर्थ रहे हैं कि वे वायरस के संक्रमण के चंगुल में कैसे फंसे। जिला निगरानी अधिकारी इस बीच नियमित रूप इनका इतिहास खंगाल रहे हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि  हालांकि ये संख्या बहुत बड़ी नहीं है, हमें नियमित रूप से उन्हें ट्रैक करना होगा। हमें संदेह है कि कई लोग जानकारी देने के लिए इच्छुक नहीं है जबकि कुछ लोग ये भूल भी गए हैं कि वो बीमार होने से पहले कहां-कहां गए थे। शुक्रवार को खोज कैटेगरी के तहत 56 नए मामले जोड़े गए हैं। 

एक अन्य अधिकारी ने कहा कि दिल्ली जैसे शहर जहां बड़ी आबादी रहती है, ये संख्या कम्युनिटी ट्रांसमिशन का इशारा नहीं करती है। हर महामारी के दौरान, कुछ मामले ऐसे होते हैं, जिन्हें ट्रैस नहीं कर पाया जाता है। लेकिन हम ट्रांसमिशन के स्रोत को ट्रैक करने के लिए अपनी पूरी कोशिश कर रहे हैं। इन लोगों से हमारी टीम द्वारा हर दिन संपर्क किया जाता है ताकि पता लगाया जा सके कि उनके द्वारा दिए गए जानकारी में कोई बदलाव है या नहीं।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा गठित पांच-सदस्यीय कोविड-19 पैनल के प्रमुख डॉ एसके सरीन ने कहा, “यह संख्या बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि जब संक्रमण रोकने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं, तो कई लोग बिना उनकी जानकारी के संक्रमित हो जाते हैं। वो नहीं जानते कि क्या वे किसी ऐसे व्यक्ति के साथ बैठे हैं जो कोरोना से संक्रमित है। बात में जब जांच होती है तो रिजल्ट पॉजिटिव आ जाता है।

उन्होंने कहा कि 30 फीसदी कोरोना पॉजिटिव मामले सीधे स्पर्शोन्मुख हैं। यानि स्पर्शोन्मुख मामले उन लोगों को संदर्भित करते हैं जो कोरोना वायरस से संक्रमित होते हैं लेकिन उनमें बुखार, खांसी या गले में खराश जैसे कोई लक्षण नहीं दिखते हैं। साथ ही, वह दूसरों को तेजी से यह वायरस फैलाते हैं। डॉक्टर सरीन ने कहा, "हम 190 ऐसे रोगियों के लिए स्रोत का पता लगाने में सक्षम नहीं हैं ... ऐसे कई और मरीज़ हो सकते हैं जिनका अभी पता लगाया जाना बाकी है।"

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