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भारी उद्योगों को कार्बनमुक्त करने में चुनौतियों से निपटने में समन्वयकारी पहल जरूरी: विशेषज्ञ

By भाषा | Updated: December 28, 2021 18:43 IST

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नयी दिल्ली, 28 दिसंबर विशेषज्ञों ने कहा है कि भारत में ग्रीनहाऊस गैसों के बड़े उत्सर्जकों में एक सीमेंट उद्योग को कार्बनमुक्त बनाने के लिए रोडमैप बनाने तथा तकनीकी एवं आर्थिक हस्तक्षेप समेत मौलिक चुनौतियां से निपटना अहम हैं।

आयोजकों ने एक बयान में बताया कि पेरिस समझौते के क्रियान्वयन के वास्ते द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टेरी), लीडआईटी सेक्रेटेरिएट एवं स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित तीन दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला में विशेषज्ञों ने भारी उद्योगों को कार्बनमुक्त करने की चुनौतियों से निपटने के लिए ‘‘सरकारों, उद्योगों एवं अनुसंधान संगठनों के बीच बेहतर साझेदारी’’ का आह्वान किया।

दि लीडरशिप ग्रुप फोर इंडस्ट्री ट्रांजिशन (लीडआईटी) स्थानीय साझेदार टेरी के साथ मिलकर सीमेंट एवं इस्पात क्षेत्र के लिए क्षेत्रगत रोडमैप तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है तथा इस संदर्भ में वार्ता एवं तकनीकी एवं प्रक्रियागत मार्गदशन को सुगम बना रहा है। लीडआईटी 2019 में न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र जलवायु कार्रवाई सम्मेलन में भारत और स्वीडन द्वारा की गयी पहल है।

एक बयान में टेरी की महानिदेशक विभा धवन के हवाले से कहा गया है, ‘‘ भारतीय उद्योग ने ऊर्जा उत्सर्जन घटाकर महत्वपूर्ण प्रगति की है लेकिन दीर्घकालिक संपोषणीय वृद्धि हासिल करने के लिए और मौलिक चुनौतियों से पार पाने की जरूरत है।’’

क्लाईमेट एंड सिस्टम्स डिवीजन की वैश्विक एजेंडा प्रमुख सौम्या जोशी ने अपने प्रजेंटेशन में इस बात पर जोर दिया कि लक्ष्य तय करने एवं उन्हें हासिल करने तथा रूकावटों को दूर करने के संदर्भ में ज्ञान आपस में बांटने एवं ढांचागत पहल अपनाने में उद्योग रोडमैप नियोजन पुस्तिका अहम है।

उन्होंने कहा, ‘‘ अक्सर महत्वाकांक्षी लक्ष्य होते तो हैं लेकिन बड़ी बड़ी बातों एवं हकीकत के बीच का फासला भरना जरूरी है।

भारत में स्वीडन के राजदूत क्लास मोलिन ने कहा कि स्वीडन उस क्षेत्र में भारत के साथ हाथ मिलाकर खुशी होगी जो ‘हमारी उत्तरजीविता’ के लिए अहम है। स्टॉकहोम इनवारोनमेंट इंस्टीट्यूट (एसईआई) के कार्यकारी निदेशक मांस निलसन ने सीमेंट, इस्पात एवं पेट्रो रसायन जैसे भारी उद्योगों को कार्बनमुक्त करने के लिए ‘‘सरकारों और उद्योगों एवं अनुसंधान संगठनों के बीच बेहतर साझेदारी’’ की जरूरत पर बल दिया।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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