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कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला, पूछे- क्या बुलेट ट्रेन 2022 तक चल पाएगी?

By भाषा | Updated: March 13, 2020 16:27 IST

चौधरी ने आरोप लगाया कि पिछले पांच वर्षो में रेलवे के मुनाफे में सात प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है जबकि परिचालन अनुपात बढ़कर 98 प्रतिशत हो गया है । उन्होंने कहा कि सरकार रेलवे के निजीकरण की बात करती है तब रेलवे को चलाने का काम राज्यों को क्यों नहीं सौंपती ।

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ठळक मुद्देचौधरी ने आरोप लगाया कि पिछले पांच वर्षो में रेलवे के मुनाफे में सात प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है जबकि परिचालन अनुपात बढ़कर 98 प्रतिशत हो गया हैचौधरी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षो में रेलवे में काफी कमियां आई हैं और कामकाज में गिरावट दर्ज की गई है

नई दिल्लीःकांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने शुक्रवार को लोकसभा में कहा कि भाजपा सरकार के दौरान पिछले कुछ वर्षो में रेलवे सुधरने (रिफार्म) के बदले बिगड़ता (डिफार्म) जा रहा है। वर्ष 2020-21 के लिए रेल मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदानों की मांगों पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए चौधरी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षो में रेलवे में काफी कमियां आई हैं और कामकाज में गिरावट दर्ज की गई है। रेलवे लक्ष्य हासिल करने में विफल रहा है और पर्याप्त राजस्व भी नहीं जुटा पाया है, साथ ही इसका परिचालन अनुपात काफी बढ़ गया है ।

उन्होंने आरोप लगाया कि नयी रेल लाइन का निर्माण हो या आमान परिवर्तन कार्य का लक्ष्य, पिछले कुछ वर्षो में काम लक्ष्य के अनुरूप नहीं रहे । बुलेट ट्रेन परियोजना का जिक्र करते हुए लोकसभा में कांग्रेस के नेता ने कहा कि यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की महात्वाकांक्षी परियोजना है लेकिन हम जानना चाहते हैं कि क्या इसे 2022 तक पूरा किया जा सकेगा? चौधरी ने आरोप लगाया कि पिछले पांच वर्षो में रेलवे के मुनाफे में सात प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है जबकि परिचालन अनुपात बढ़कर 98 प्रतिशत हो गया है । उन्होंने कहा कि सरकार रेलवे के निजीकरण की बात करती है तब रेलवे को चलाने का काम राज्यों को क्यों नहीं सौंपती । उन्होंने कहा कि रेलवे के निजीकरण की बात ठीक नहीं है, पूरा सदन इसके खिलाफ है। कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘ रेलवे रिफार्म के बदले डिफार्म होता जा रहा है । ’’

एसी, एसटी की व्यवस्थित ढंग से उपेक्षा कर रही है मोदी सरकार: कांग्रेस

कांग्रेस ने शुक्रवार को लोकसभा में आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) की व्यवस्थित ढंग से उपेक्षा कर रही है तथा इन वर्गों के लिए बजट आवंटन में कटौती की गई है। सदन में वर्ष 2020-21 के लिए सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदानों की मांगों पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस कोडिकुनिल सुरेश ने यह दावा भी किया कि एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक इस सरकार में दलितों के खिलाफ अपराध के मामले बढ़े हैं।

उन्होंने कहा कि एससी और एसटी को न सिर्फ समाज, बल्कि सरकार की तरफ से भी भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। पहले एससी-एसटी कानून को कमजोर करने का प्रयास हुआ और अब नियुक्तियों एवं पदोन्नति में उनके आरक्षण को निशाना बनाया जा रहा है। सुरेश ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार एससी और एसटी की व्यवस्थित ढंग से उपेक्षा कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछले बजट में अनुसूचित जाति और जनजातियों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं के लिए न सिर्फ बजट में कटौती की गई, बल्कि आवंटित राशि को भी पूरी तरह खर्च नहीं किया गया। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि एनसीआरबी के आंकड़ों से स्पष्ट है कि इस सरकार में रोजाना औसत पांच दलित महिलाओं के साथ दुष्कर्म होता है, हर सप्ताह पांच दलित घरों में आग लगाई जाती है तथा इस वर्ग के लोगों को दूसरे अपराधों का भी सामना करना पड़ रहा है। सुरेश ने कहा कि नीति आयोग जैसी अहम संस्था में भी एससी और एसटी वर्ग को कोई प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है।

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