दिल्ली पहुंच रहे सीएम नीतीश कुमार?, बांका सांसद गिरिधारी यादव की सदस्यता पर संकट?, लालू यादव की पार्टी से बेटा लड़ा था विधानसभा चुनाव?
By एस पी सिन्हा | Updated: March 25, 2026 14:39 IST2026-03-25T14:38:08+5:302026-03-25T14:39:22+5:30
गिरिधारी यादव के अयोग्यता नोटिस पर जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा संजय कुमार झा ने कहा कि लोकसभा में हमारी पार्टी के नेता दिलेश्वर कामत ने स्पीकर को नोटिस दिया है।

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पटनाः बिहार में सत्ताधारी दल जदयू अब अपने ही दल के बांका से सांसद गिरिधारी यादव की सदस्यता समाप्त कराने पर आमादा है। जदयू के सांसद एवं लोकसभा में पार्टी के नेता दिलेश्वर कामत ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से गिरीधारी यादव को अयोग्य ठहराने की अपील की है। उनका कहना है कि सांसद पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं, जो संसदीय आचरण और दलगत अनुशासन के खिलाफ है। हालांकि गिरिधारी यादव ने कहा कि उन्हें अभी तक कोई आधिकारिक नोटिस नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि जब लोकसभा अध्यक्ष की ओर से नोटिस आएगा, तब हम पूरा जवाब देंगे।
अभी मीडिया में कुछ कहने से कोई फायदा नहीं है। गिरिधारी यादव ने यह भी कहा कि जो आरोप लगाए जा रहे हैं, उनका जवाब वे सीधे लोकसभा अध्यक्ष को देंगे। बेटे के लिए चुनाव प्रचार करने के सवाल पर गिरिधारी यादव ने कहा कि उनका बेटा बालिग है और अपने फैसले खुद लेने के लिए स्वतंत्र है।
वहीं, गिरिधारी यादव के अयोग्यता नोटिस पर जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा संजय कुमार झा ने कहा कि लोकसभा में हमारी पार्टी के नेता दिलेश्वर कामत ने स्पीकर को नोटिस दिया है। चुनाव के दौरान भी, उनके (गिरिधारी यादव) बेटे ने राजद की ओर से उसी संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ा था, जहां से वे सांसद हैं और उन्होंने चुनाव प्रचार भी किया था।
यह साफ तौर पर अपनी मर्ज़ी से पार्टी छोड़ने की बात है। उधर, दिलेश्वर कामत का कहना है कि बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान गिरधारी यादव ने पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर अपने बेटे को राजद के टिकट पर चुनाव लड़वाया और उसके समर्थन में प्रचार भी किया। इससे पहले भी उनके कई कदम पार्टी अनुशासन के खिलाफ बताए जा रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, जदयू नेतृत्व पहले से ही गिरिधारी यादव के बयानों और गतिविधियों को लेकर नाराज रहा है। पिछले वर्ष भी पार्टी ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था। यह नोटिस उनके उस बयान के बाद दिया गया था, जिसमें उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे।
पार्टी ने इसे अनुशासनहीनता करार देते हुए उनसे स्पष्टीकरण मांगा था और चेतावनी दी थी कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि गिरिधारी यादव ने अपने बयान में कहा था कि अगर लोकसभा चुनाव के दौरान मतदाता सूची सही थी, तो कुछ ही महीनों बाद होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए वह गलत कैसे हो सकती है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया था कि क्या वह खुद गलत मतदाता सूची के आधार पर निर्वाचित हुए हैं। इसके साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग की टाइमिंग पर भी सवाल खड़े किए थे। उनका कहना था कि बिहार उस समय बाढ़ और कृषि कार्यों की व्यस्तता से जूझ रहा था, ऐसे में मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया को छह महीने पहले ही पूरा कर लिया जाना चाहिए था।
पार्टी ने उनके इस बयान को संवेदनशील मुद्दे पर गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी बताते हुए कहा था कि जदयू हमेशा चुनाव आयोग के साथ खड़ी रही है। ऐसे में एक सांसद का इस तरह सार्वजनिक रूप से बयान देना पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाता है। हालांकि, उस समय गिरिधारी यादव ने अपने रुख पर ज्यादा नरमी नहीं दिखाई थी, जिससे पार्टी और उनके बीच दूरी बढ़ती चली गई।
उल्लेखनीय है कि गिरिधारी यादव के खिलाफ असंतोष की एक और वजह उनके पारिवारिक राजनीतिक निर्णय भी रहे हैं। उनके बेटे चाणक्य प्रकाश ने विधानसभा चुनाव में राजद के टिकट पर बेलहर सीट से चुनाव लड़ा था। यह सीट जदयू के खाते में थी और पार्टी ने वहां से मनोज यादव को उम्मीदवार बनाया था। ऐसे में एक ही परिवार के अलग-अलग दलों में सक्रिय होने को भी पार्टी ने अनुशासन के खिलाफ माना।
दरअसल, चाणक्य प्रकाश ने वर्ष 2023 में राजनीति में कदम रखा था और उन्होंने विदेश, खासकर लंदन से अपनी पढ़ाई पूरी की है। हालांकि, विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन इस घटनाक्रम ने जदयू नेतृत्व को असहज जरूर कर दिया था। बता दें कि गिरिधारी यादव कभी युवा कांग्रेस में सक्रिय रहे। बाद में वी.पी. सिंह की राजनीति से जुड़े और फिर जनता दल में सक्रिय हुए।
लोकसभा और बिहार विधानसभा दोनों में 4-4 बार चुने गए हैं। उन्हें 1997, 2004, 2019 और 2024 में बांका से लोकसभा सांसद चुना गया है। विधानसभा में, वे 1997 में कटोरिया से और 2010 व 2015 में बेलहर से विधायक बने। 2024 के लोकसभा चुनाव में, उन्होंने राजद के जयप्रकाश नारायण यादव को 1,03,844 वोटों के बड़े अंतर से हराया था। वहीं, 2023 में, तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा के ‘कैश फॉर क्वेरी’ मामले में, गिरधारी यादव ने लोकसभा की नैतिकता समिति की जांच पर सवाल उठाए थे।