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जल संकट पर सीएम नीतीश ने की चर्चा, अहम सवाल- तालाबों को अतिक्रण से कैसे मुक्त कराएंगे?

By एस पी सिन्हा | Updated: July 14, 2019 14:44 IST

इस बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आहर, पोखर, पईन और तालाब की चर्चा की. पर सूबे में हालात ये हैं कि ये अधिकर या तो भर दिये गये, अथवा अतिक्रमण के शिकार हो गये. फिर जल संचय हो तो कैसे हो?

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बिहार में जलवायु परिवर्तन को लेकर आये जल संकट पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सर्वदलीय बैठक की. लेकिन कहावत है कि सबकुछ गंवा के होश में आये तो क्या हुआ? यही हालात आज बिहार मे देखने को मिलता है. इस बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आहर, पोखर, पईन और तालाब की चर्चा की. पर सूबे में हालात ये हैं कि ये अधिकर या तो भर दिये गये, अथवा अतिक्रमण के शिकार हो गये. फिर जल संचय हो तो कैसे हो?

हालांकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस संबंध में संदेश देने का प्रयास तो किया है, लेकिन कहा जा रहा है कि बिल्ली के गले में घंटी बांधेगा कौन? कारण कि बिहार में अधिकतर आहर, पोखर, पईन तालाब तो दबंग लोगों के कब्जे में चला गया है. जहां पहले सालों पानी लबालब भरा रहता था, वहां या तो घर बना लिया गया अथवा दबंगों ने उसे भरकर अपने खेत में मिला लिया है. फिर उनके खिलाफ कार्रवाई कौन करेगा, वह सत्ता के साथ खड़े होते हैं. सबसे मजेदार बात तो यह भी है कि इन आहर, पईन, पोखर, तालाब के उडाही के नाम पर हीं हर साल करोड़ों रुपये का बंदरबांट भी कर दिया जाता है.

उदाहरणस्वरूप भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के पतरिहां गांव सहित सैकड़ों गांवों की स्थिती को देखकर यह सहज हीं अदाजा लगाया जा सकता है कि वहां की स्थितियां आज क्या हैं? यह महज एक उदाहरण मात्र है. ऐसे हजारों गांव हैं, जहां दबंगों के कब्जे में जलश्रोत हो गये हैं. फिर जल संचय होगा तो कहां होगा? मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चर्चा तो की लेकिन कया इसे अंजाम तक पहुंचाने में पहल करेंगे? यह आज चर्चा का विषय बन गया है.

वैसे इस बैठक में सभी उनके हां में हां जरूर मिलाते नजर आये. जलवायु परिवर्तन को लेकर बुलायी गयी सर्वदलीय बैठक विपक्षी विधायकों को जमकर रास आयी. बैठक में जहां सत्तापक्ष और विपक्ष के विधायकों ने अपने अपने विधानसभा क्षेत्रों की समस्याओं को सरकार के अधिकारियों के सामने रखा. वहीं, नीतीश कुमार की इस पहल के विपक्षी दल के विधायक मुरीद हो गये. नीतीश कुमार के काम की तारीफ अब राजद विधायक खुलकर करने लगे हैं. 

वहीं, मुख्यमंत्री ने पर्यावरण के प्रति सबको सजग रहने की अपील करते हुए कहा कि आज कई बीमारियों का कारण जलवायु परिवर्तन है. उन्होंने कहा कि प्रकृति से छेड़छाड़ के बाद हिसाब लेती है. उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण ही बाढ़ और सूखे की समस्या बढ़ गई है. उन्होंने लोगों से अपने घरों के आसपास और अपनी जमीन पर पेड़ लगाने की अपील करते हुए कहा कि पर्यावरण की रक्षा के लिए हम सबको सजग होना पड़ेगा.

मुख्यमंत्री ने बाढ़ और बारिश को लेकर बैठक करने की जानकारी देते हुए कहा कि बाढ़ से निबटने के लिए सरकार की तैयारी पूरी है. मुख्यमंत्री ने मिथिला में जल संकट पर चिंता जताते हुए कहा कि ऐसा कैसे हो रहा है, इस पर सोचना होगा. उन्होंने कहा कि तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा, साथ ही सार्वजनिक कुएं को भी ठीक कराया जाएगा. मुख्यमंत्री ने खेतों में फसल अवशेष जलाने से रोकने के लिए भी जागरूकता अभियान चलाने की बात करते हुए कहा कि इससे उत्पादकता नहीं बढ़ती है. उन्होंने इस मौके पर कहा कि सरकार के खजाने पर पहला अधिकार आपदा पीड़ितों का है.

उन्होंने इस साल लू से हुईं मौतों और एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) बीमारी के लिए भी जलवायु परिवर्तन को कारण बताया. नीतीश ने बिहार में हरित क्षेत्र बढ़ाने का दावा करते हुए कहा कि अभी बड़ी संख्या में पौधे लगाने की जरूरत है. उन्होंने लोगों को चेतावनी देते हुए कहा कि हम अब नहीं चेते तो फिर हाथ मलते रह जाएंगे.नीतीश कुमार की इस अलग तरह की पहल की खासबात ये रही कि विपक्षी दल के विधायक भी तारीफ करने से नहीं चुके. राजद विधायक सर्वजीत ने नीतीश कुमार की जमकर तारीफ की. सर्वजीत ने कहा कि उनके क्षेत्र गया में जल संकट की समस्या गंभीर है. ऐसे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से की गयी पहल सराहनीय है. दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्री को भी नीतीश कुमार के कामों से सीख लेनी चाहिए. नीतीश कुमार के काम के मुरीद केवल राजद के ही विधायक नहीं हुए बल्कि कांग्रेस के विधायकों ने भी नीतीश कुमार की पहल को सराहनीय बताया.

कांग्रेस विधायक शकील अहमद खान ने कहा कि देर से ही सही, लेकिन पहल तो हुई. पर्यावरण में परिवर्तन के साथ जो जलसंकट की स्थिती है उसमें सभी जनप्रतिनिधियों से विचार लेना एक अच्छी पहल है. वहीं, नीतीश कुमार के विजन की तारीफ से जदयू नेता बिहार सरकार के मंत्री भी उत्साहित हैं.

मंत्री नीरज कुमार ने कहा कि नीतीश कुमार पॉलिटिक्स विथ डिफरेंस करते हैं. ऐसे में अगर कोई उनकी तारीफ करता है तो ये स्वाभाविक बात है. लेकिन नीतीश कुमार का यह विजन सरजमीं पर कबतक उतरेगा और वह कितना सफल होगा? इसपर अब सभी की निगाहें टिकी होंगीं. यह देखने लायक होगा कि नीतीश कुमार के पहल के बाद कितने तालाब, आहर, पईन और पोखर अतिक्रमण मुक्त होते हैं? राजधानी पटना में हीं दर्जनों तालाब भर अतिक्रमणकारियों के द्वारा घर बनाकर बेच दिया गया है. लेकिन उसे देखने वाला कोई नही है. फिर गांव की ओर कौन जाता है? यह भाषण हीम बनकर न रह जाये इसकी अंदेशा व्यक्त की जाने लगी है. 

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