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संसद: लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक पेश करने के पक्ष में 293 वोट पड़े, विपक्ष में 82 वोट

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: December 9, 2019 15:29 IST

Citizenship Amendment Bill 2019: इस विधेयक के कारण पूर्वोत्तर के राज्यों में व्यापक प्रदर्शन हो रहे हैं और काफी संख्या में लोग तथा संगठन विधेयक का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे असम समझौता 1985 के प्रावधान निरस्त हो जाएंगे जिसमें बिना धार्मिक भेदभाव के अवैध शरणार्थियों को वापस भेजे जाने की अंतिम तिथि 24 मार्च 1971 तय है।

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ठळक मुद्देयह विधेयक 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा का चुनावी वादा था। नागरिकता विधेयक के खिलाफ नग्न प्रदर्शन, मुख्यमंत्री निवास पर चिपकाए गए पोस्टर

लोकसभा में विपक्षी सदस्यों के भारी विरोध के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को नागरिकता संशोधन विधेयक पेश किया। लोकसभा में विधेयक को पेश किये जाने के लिए विपक्ष की मांग पर मतदान करवाया गया और सदन ने 82 के मुकाबले 293 मतों से इस विधेयक को पेश करने की स्वीकृति दे दी।

कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस सहित विपक्षी सदस्यों ने विधेयक को संविधान के मूल भावना एवं अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की। गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस, आईयूएमएल, एआईएमआईएम, तृणमूल कांग्रेस समेत विपक्षी सदस्यों की चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि विधेयक कहीं भी देश के अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है और इसमें संविधान के किसी अनुच्छेद का उल्लंघन नहीं किया गया। 

09 Dec, 19 02:35 PM

इस पर गृह मंत्री ने कहा, ‘‘विधेयक देश के अल्पसंख्यकों के 0.001 प्रतिशत भी खिलाफ नहीं है।’’ उन्होंने चौधरी की टिप्पणियों पर कहा कि विधेयक के गुण-दोषों पर इसे पेश किये जाने से पहले चर्चा नहीं हो सकती। सदन की नियमावली के तहत किसी भी विधेयक का विरोध इस आधार पर हो सकता है कि क्या सदन के पास उस पर विचार करने की विधायी क्षमता है कि नहीं। शाह ने कहा ‘‘ विधेयक पर चर्चा के बाद मैं सदस्यों की हर चिंता का जवाब दूंगा।’’

09 Dec, 19 02:34 PM

नागरिकता अधिनियम, 1955 का एक और संशोधन करने वाले विधेयक को संसद की मंजूरी मिलने के बाद पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से शरणार्थी के तौर पर आए उन गैर-मुसलमानों को भारत की नागरिकता मिल जाएगी जिन्हें धार्मिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा हो। शाह ने जब विधेयक पेश करने के लिए सदन की अनुमति मांगी तो कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी ने विधेयक पेश किये जाने का विरोध करते हुए कहा कि यह अल्पसंख्यकों को लक्ष्य कर लाया गया विधेयक है।

09 Dec, 19 01:40 PM

नागरिकता संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश करने के पक्ष में 293 वोट पड़े। विपक्ष में 82 वोट पड़े।

09 Dec, 19 12:56 PM

संसद में नागरिकता बिल का विरोध करेगी आम आदमी पार्टी

09 Dec, 19 12:21 PM

लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल पेश

09 Dec, 19 12:17 PM

बीजेपी ने स्मृति ईरानी मामले में कांग्रेस के दो सांसदों से माफी की मांग की

09 Dec, 19 12:05 PM

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा, किसी भी कीमत पर बिल का विरोध करेंगे

09 Dec, 19 11:09 AM

लोकसभा पहुंचे गृहमंत्री अमित शाह

09 Dec, 19 10:31 AM

टीएमसी सांसद शांतनु सेन ने 'पश्चिम बंगाल का नाम बंगाल' करने को लेकर राज्य सभा में जीरो आवर नोटिस दिया है।

 

09 Dec, 19 10:30 AM

बीजेपी सांसद हरनाथ सिंह यादव ने राज्य सभा में 'भारतीय सेना में अहीर रेजिमेंट बनाने की मांग' को लेकर शून्यकाल का नोटिस दिया।

 

09 Dec, 19 07:19 AM

भाजपा ने अपने लोकसभा सांसदों को व्हिप जारी किया

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा सोमवार को लोकसभा में नागरिकता (संशोधन) विधेयक पेश करने को देखते हुए सत्तारूढ़ भाजपा ने अपने सभी लोकसभा सदस्यों को व्हिप जारी किया कि नौ दिसम्बर से तीन दिनों तक सदन में मौजूद रहें। व्हिप में भाजपा के सभी सांसदों से सदन में मौजूद रहने के लिए कहा गया है। लोकसभा के सोमवार की कार्य सूची के मुताबिक छह दशक पुराने नागरिकता कानून में संशोधन वाला विधेयक दोपहर में लोकसभा में पेश होगा और बाद में इस पर चर्चा होगी और फिर इसे पारित कराया जाएगा। विधेयक के लोकसभा में आसानी से पारित होने की संभावना है क्योंकि 545 सदस्यीय सदन में भाजपा के 303 सांसद हैं।

09 Dec, 19 07:18 AM

भाजपा नागरिकता विधेयक के जरिए जिन्ना के ‘द्विराष्ट्र के सिद्धांत’ को लागू कर रही : माकपा

माकपा ने नागरिकता (संशोधन) विधेयक का रविवार को विरोध करते हुए कहा कि सरकार इसके जरिए मोहम्मद अली जिन्ना के ‘‘द्विराष्ट्र के सिद्धांत’’ को लागू कर रही है। पार्टी ने यह भी कहा कि भारत को पाकिस्तान जैसा नहीं बनना चाहिए। इस विधेयक के सोमवार को संसद में पेश किए जाने की संभावना है। माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने भारत के ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के दर्शन में यकीन रखने का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी पार्टी संसद में इस प्रस्तावित विधेयक को पेश किए जाने पर इसमें दो संशोधन का सुझाव देगी।

09 Dec, 19 07:18 AM

16 संगठनों का मंगलवार को असम बंद का आह्वान

नागरिकता (संशोधन) विधेयक के विरोध में वामपंथी विचारधारा वाले करीब 16 संगठनों ने 10 दिसंबर को 12 घंटे का असम बंद आहूत किया है। पूर्वोत्तर छात्र संगठन (एनईएसओ) इसी मुद्दे को लेकर मंगलवार को सुबह पांच बजे से 11 घंटे के पूर्वोत्तर बंद का पहले ही आह्वान कर चुका है। कृषक मुक्ति संग्राम समिति (केएमएसएस) के सलाहकार अखिल गोगोई ने रविवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि केएमएसएस और उसके सहयोगी संगठनों ने इन संगठनों और छात्र संगठन द्वारा बुलाए गए बंद को अपना समर्थन जताया है। उन्होंने बताया कि केएमएसएस ने सूटिया, मोरान और कोच-राजबोंग्शी जैसे विभिन्न आदिवासी छात्र निकायों द्वारा सोमवार को आहूत 12 घंटे के असम बंद को भी समर्थन दिया है। एसएफआई, डीवाईएफआई, एआईडीडब्ल्यूए, एसआईएसएफ, आइसा, इप्टा जैसे 16 संगठनों ने संयुक्त बयान में “विधेयक को रद्द करने” की मांग की और मंगलवार को सुबह पांच बजे से “12 घंटे का असम बंद” आहूत किया।

09 Dec, 19 07:17 AM

नागरिकता विधेयक के खिलाफ नग्न प्रदर्शन, मुख्यमंत्री निवास पर चिपकाए गए पोस्टर

असम में नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) के खिलाफ विभिन्न प्रकार से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं जिनमें नग्न होकर प्रदर्शन करना और तलवार लेकर प्रदर्शन करना भी शामिल है। मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल के चबुआ स्थित निवास और गुवाहाटी में वित्त मंत्री हिमंत बिस्व सरमा के घर के बाहर सीएबी विरोधी पोस्टर चिपकाए गए। ऑल असम स्टूडेंट यूनियन (आसू) ने अपने मुख्यालय से मशाल जलाकर जुलुस निकाला और गुवाहाटी की सड़कों पर प्रदर्शन किया। आसू के मुख्य सलाहकार समुज्जल कुमार भट्टाचार्य ने जुलूस का नेतृत्व करते हुए कहा कि राज्य विधेयक को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं करेगा।

09 Dec, 19 07:17 AM

क्या है नागरिकता संशोधन विधेयक

नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2019 के मुताबिक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न के कारण 31 दिसम्बर 2014 तक भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को अवैध शरणार्थी नहीं माना जाएगा बल्कि उन्हें भारतीय नागरिकता दी जाएगी। यह विधेयक 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा का चुनावी वादा था। भाजपा नीत राजग सरकार ने अपने पूर्ववर्ती कार्यकाल में इस विधेयक को लोकसभा में पेश किया था और वहां पारित करा लिया था। लेकिन पूर्वोत्तर राज्यों में प्रदर्शन की आशंका से उसने इसे राज्यसभा में पेश नहीं किया।

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