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बच्चों का तनाव घटेगा, उचित फैसला : 12 वीं बोर्ड की परीक्षा रद्द करने पर प्रधानाध्यापकों ने कहा

By भाषा | Updated: June 2, 2021 18:29 IST

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नयी दिल्ली, दो जून विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों ने कोविड-19 के मद्देनजर 12 वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा रद्द करने के सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए बुधवार को कहा कि यह उचित निर्णय है और इससे छात्रों का तनाव दूर होगा।

एमआरजी स्कूल रोहिणी के निदेशक रजत गोयल ने कहा, ‘‘फैसले से छात्रों को बड़ी राहत मिली है जो बोर्ड परीक्षा से जुड़ी अनिश्चितता के कारण असमंजस में थे। हम इस कदम का स्वागत करते हैं और हमें उचित मूल्यांकन के लिए वैकल्पिक प्रारूप की घोषणा का इंतजार है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘देश बड़े स्वास्थ्य संकट से गुजर रहा है। स्वस्थ होने की दर बेहतर हुई है लेकिन संक्रमण को लेकर चिंताएं कायम हैं। परीक्षा की तैयारी शांत दिमाग से की जाती है और मौजूदा कठिन समय में बोर्ड जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं का आयोजन कराना ठीक नहीं होता।’’

कोरोना महामारी की दूसरी लहर के मद्देनजर केंद्र सरकार ने मंगलवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह फैसला छात्रों के हितों को ध्यान में रखकर लिया गया है।

प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद इस फैसले की घोषणा की गई। साथ ही यह फैसला भी हुआ कि सीबीएसई 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों के परिणामों को समयबद्ध तरीके से एक पूर्णत: स्‍पष्‍ट उद्देश्यपरक मानदंड के अनुसार संकलित करने के लिए आवश्‍यक कदम उठाएगा।

डीपीएस इंदिरापुरम की प्रधानाध्यापक संगीता हजेला ने कहा, ‘‘देश के हालात के मद्देनजर अनुभवी वरिष्ठ अधिकारियों ने बोर्ड परीक्षाएं रद्द करने का फैसला काफी सोच-विचारकर किया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘विभिन्न पृष्ठभूमि के छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए यह यह फैसला किया गया है क्योंकि भारत एक विशाल देश है जहां कई स्तरों पर स्कूली ढांचे के बीच असमानता है। ’’

डीपीएस आरएनई, गाजियाबाद की प्रधानाध्यापक पल्लवी उपाध्याय ने कहा कि छात्रों की सुरक्षा से बढ़कर कुछ भी नहीं है।

हालांकि, कुछ स्कूलों के प्रतिनिधियों का मानना है कि परीक्षा आयोजित करने की दृष्टि से सत्र में अब तक बहुत अधिक प्रयास किए गए थे।

ओडीएम पब्लिक स्कूल की प्रज्ञा प्रमिता साहू ने कहा, ‘‘हम बोर्ड के लिए पूरी तरह से तैयार थे और मुझे इस बात का अफसोस है कि सारा काम बेकार हो गया है। वैसे मैं आभारी हूं कि भ्रम और चिंता समाप्त हो गई है और इसके साथ ही छात्रों, शिक्षकों और उनके परिवारों के स्वास्थ्य और कल्याण को प्राथमिकता दी गई है।’’

साहू ने कहा, ‘‘लेकिन छात्रों के वैकल्पिक मूल्यांकन का सवाल अभी भी अनुत्तरित है। मैं सरकार और सीबीएसई से इस संबंध में उचित और समय पर निर्णय लेने का अनुरोध करती हूं ताकि छात्रों को वे परिणाम प्राप्त हों जिनके वे हकदार हैं।’’

आकाश एडुकेशनल सर्विसेज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक आकाश चौधरी ने कहा, ‘‘कोविड-19 की दूसरी लहर शुरू होने के बाद से छात्रों में चिंताएं व्याप्त थीं। मौजूदा परिस्थिति को देखते हुए भारत के लाखों छात्रों की शारीरिक और मानसिक सुरक्षा के मद्देनजर यह सही और संतुलित फैसला है। परीक्षा रद्द करने से अगले शैक्षणिक सत्र को समय पर चालू करने में मदद मिलेगी और कॉलेजों में तय समय पर दाखिले शुरू होंगे।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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