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बाल दिवस: बच्चों के सुनहरे भविष्य के लिए बहुत काम का हो सकता है यह दिन, इन पांच तरीकों से बनाए यादगार

By रोहित कुमार पोरवाल | Updated: November 14, 2019 07:25 IST

हर माता-पिता भी यह आकांक्षा रखते हैं कि उनके बच्चे आगे चलकर घर-परिवार और देश का नाम रौशन करें। यह एकदम सही अवसर है जब आप बच्चों को किताबी शिक्षा के अलावा उनके बौद्धिक और सर्वांगीण विकास के लिए कुछ जरूरी नैतिक ज्ञान का पोषण दें।

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ठळक मुद्देबाल दिवस के मौके पर बच्चे के कर कमलों से कम से कम एक पौधा लगवाएं और उसे कहानी या कविता के माध्यम से पौधा रोपण की अहमियत समझाएं।हो सके तो आर्थिक तौर पर कमजोर वर्ग के किसी बच्चे को अपने बेटे या बेटी द्वारा उसके इस्तेमाल में नहीं आ रही पाठ्य सामग्री को दान करवाएं।

भारत के पहले पंडित प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की जयंती के मौके पर हर वर्ष बाल दिवस मनाया जाता है। 14 नवंबर 1889 को जवाहर लाल नेहरू का जन्म हुआ था। पंडित नेहरू को बच्चों से बेहद प्रेम था और बच्चे भी उन्हें चाचा नेहरू कहकर बुलाते थे। चाचा नेहरू को जब भी समय मिलता था तो वे उसे बच्चों के बीच बिताना पसंद करते थे। चाचा नेहरू चाहते थे कि इस भारत के बच्चे देश का सुनहरा भविष्य गढ़ें। हर माता-पिता भी यह आकांक्षा रखते हैं कि उनके बच्चे आगे चलकर घर-परिवार और देश का नाम रौशन करें। यह एकदम सही अवसर है जब आप बच्चों को किताबी शिक्षा के अलावा उनके बौद्धिक और सर्वांगीण विकास के लिए कुछ जरूरी नैतिक ज्ञान का पोषण दें। यहां पांच तरीके हमने सोचे हैं जिनके जरिये आप बच्चों और खुद के लिए यह बालदिवस यादगार बना सकेंगे। 

1. आज मानवता पर्यावरण के गंभीर परिणामों से जूझ रही है। वायु प्रदूषण देश के हर बड़े शहर की नियती सा बन गया है। काफी हद तक मानव द्वारा किया गया आधुनिक विकास इसके लिए जिम्मेदार है। अगर हम यह चाहते हैं कि हमारी आने वाली नस्लों के लिए धरती पर सांस लेने लायक वायु बची रहे तो प्रकृति के साथ दोस्ती कर लें। बाल दिवस के मौके पर बच्चे के कर कमलों से कम से कम एक पौधा लगवाएं और उसे कहानी या कविता के माध्यम से पौधा रोपण की अहमियत समझाएं। बचपन से ऐसी परवरिश बच्चे एक संवेदनशील और बेहतर इंसान बनाएगी।

2. चाचा नेहरू को गुलाब का पौधा बहुत प्रिय था, इसलिए चाहें तो बच्चे के हाथों से गुलाब का पौधा लगवा सकते हैं और इसी के साथ उसे भारत के पहले प्रधानमंत्री की कहानी सुना सकते हैं। इसके साथ ही बच्चे को भारत के स्वाधीनता संग्राम के बारे में परिचित भी करा सकते है। किसी महान शख्स ने कहा है कि इतिहास मनुष्य को भविष्य के लिए आगाह करता है, अगर आज हम बच्चो को अपने भूत और वर्तमान से रूबरू रख परवरिश देंगे तो निश्चित तौर पर उनका भविष्य बेहतर होगा। गुलाब का पौधा लगाएं

3. जरूरतमंदों की सेवा करें: यह एक कड़ुवी सच्चाई है कि लगातार विकास के पथ पर आगे बढ़ रही दुनिया में समाज के एक धड़ा वंचित होता जा रहा है। शिक्षा तो दूर की बात, आज भी भारत की झुग्गियों में कुपोषण के शिकार कई बच्चे मिल जाएंगे। उन्हें दो वक्त की खाना नसीब नहीं हो पाता है। इस बाल दिवस आप खुद या स्कूल के शिक्षक की सहायता से बच्चों को ऐसे वंचितों तक ले जाएं और उनके हाथों खाने का टिफिन दान करवाएं। हो सके तो आर्थिक तौर पर कमजोर वर्ग के किसी बच्चे को अपने बेटे या बेटी द्वारा उसके इस्तेमाल में नहीं आ रही पाठ्य सामग्री को दान करवाएं।

4. आज रच्नात्मक और सृजनात्मक हुनर रखने वालों के लिए हर जगह बढ़िया प्लेटफॉर्म मौजूद है और ऐसे लोगों को खूब सराहा जाता है। अब यह बात सब समझते हैं कि जीवन को निखारने के लिए बाकी विषयों के अलावा कला और संस्कृति की बड़ी भूमिका होती। इस मौके पर आप स्कूल के शिक्षक से कहकर या खुद बच्चे को कोई नुक्कड़ नाटक या एकल नाटक सिखा सकते हैं, जिसका वह प्रदर्शन कर सके। यकीन मानिये बच्चे की प्रतिभा देख लोगों की तालियों की गड़गड़ाहट थमेगी नहीं। 

5. यह बात सर्व विदित है कि सयंमित भाषा जीवन की हर परिस्थिति में औषधि का काम करती है। हमारे पूर्वज कहते रहे हैं कि मीठी वाणी बोलिए मन का आपा खोए.. लेकिन भाषा की कारीगरी तब दिखाई जा सकती है जब उसमें पिरोने के लिए जरूरी ज्ञान और अनुभव हो। इसलिए बच्चों सामाजिक सरोकारों से जुड़े किसी विषय पर भाषण देने के लिए तैयार कीजिए और इस तरह उसके हुनर एक एक खूबी जोड़ दिन को यादगार बनाइये। 

टॅग्स :बाल दिवसजवाहरलाल नेहरूइंडियाएजुकेशन
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