Bihar: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार पर जदयू को संभाल पाने की चुनौती, दो गुटों में बंटी है पार्टी

By एस पी सिन्हा | Updated: March 9, 2026 16:23 IST2026-03-09T16:23:03+5:302026-03-09T16:23:03+5:30

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले के बाद जदयू दो गुटों में बंट गई है। पार्टी का एक गुट मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने का स्वागत कर रहा है और यह उनका निजी फैसला बता रहा है तो वहीं दूसरा गुट इसे बड़ी साजिश करार दे रहा है। 

Chief Minister Nitish Kumar's son Nishant Kumar faces the challenge of managing the JDU, which is divided into two factions. | Bihar: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार पर जदयू को संभाल पाने की चुनौती, दो गुटों में बंटी है पार्टी

Bihar: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार पर जदयू को संभाल पाने की चुनौती, दो गुटों में बंटी है पार्टी

पटना: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की सियासत में एंट्री तो हो गई है, लेकिन अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या वह जदयू को संभाल पाएंगे? कारण कि नीतीश कुमार ने जिसतरह पार्टी को आगे बढाया उसतरह पार्टी को एकजूट रखते हुए उसे संभाल कर रखना निशांत कुमार के लिए एक बडी चुनौती होगी। दरसल, नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले के बाद जदयू दो गुटों में बंट गई है। पार्टी का एक गुट मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने का स्वागत कर रहा है और यह उनका निजी फैसला बता रहा है तो वहीं दूसरा गुट इसे बड़ी साजिश करार दे रहा है। 

नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने के ऐलान के बाद से ही पार्टी के कार्यकर्ता विरोध कर रहे हैं और केन्द्रीय मंत्री ललन सिंह एवं जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा पर साजिश करने का आरोप लगा रहे हैं। कार्यकर्ता इस बात को मानने को तैयार नहीं है कि नीतीश कुमार ने अपनी मर्जी से मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़कर राज्यसभा जाने का फैसला लिया है। ऐसे में इसको लेकर पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के एक गुट काफी नाराज है और इसका विरोध कर रहा है। इसको लेकर कार्यकर्ताओं में काफी गुस्सा भी है। जदयू नेताओं के गले यह नहीं उतर पा रही है कि यह मर्जी नीतीश कुमार के एही है। जदयू के स्थानीय नेता सड़क पर उतरकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। 

जदयू नेताओं को अपने सियासी भविष्य का खतरा मंडर रहा है। उनके अपने राजनीतिक कैरियर का संकट दिख रहा है। उन्हें लगता है कि बिहार में पावर ट्रास्फर होने से जदयू की सियासी अहमियत कमजोर होगी और भाजपा की ताकत बढ़ेगी। जदयू की पूरी राजनीति नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द सिमटी हुई है। पार्टी के भीतर फिलहाल ऐसा कोई दूसरा नेता नहीं है जिसकी स्वीकार्यता पूरे बिहार में नीतीश जैसी हो। ऐसे में जदयू नेताओं को लगता है कि नीतीश दिल्ली जाते हैं, तो पार्टी के पास 'वोट बैंक' को एकजुट रखने वाला चेहरा नहीं बचेगा। नेताओं को यह भी डर सताने लगा है कि उनके जाते ही पार्टी ताश के पत्तों की तरह बिखर न जाए। 

दरअसल, बिहार की सियासत में यह माना जाता है कि नीतीश कुमार ही वो 'दीवार' हैं जो जदयू को भाजपा या राजद जैसी बड़ी पार्टियों में समाहित होने से रोके हुए हैं। जदयू नेताओं को लगता है कि अगर नीतीश कुमार केंद्र की राजनीति में चले गए, तो पार्टी का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। ऐसे में उसे किसी बड़ी पार्टी के साथ विलय करना पड़ेगा। इससे कई नेताओं का राजनीतिक कैरियर खत्म हो सकता है। बता दें कि नीतीश कुमार को गठबंधन की राजनीति का माहिर खिलाड़ी माना जाता है। चाहे एनडीए हो या महागठबंधन, नीतीश के बिना गठबंधन में जदयू की मोलभाव करने की शक्ति शून्य हो जाएगी। 

नेताओं को पता है कि नीतीश कुमार के बिना भाजपा या राजद उन्हें उतनी तवज्जो नहीं देगी। और यही गुस्सा रविवार को जदयू कार्यालय में फूट पड़ा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की जदयू में एंट्री के अवसर पर केंद्रीय मंत्री ललन सिंह बड़ी संख्या में समर्थकों को साथ लेकर जदयू कार्यालय पहुंचे थे। इसी दौरान ललन सिंह के समर्थक और जदयू कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए और मारपीट शुरू हो गई। जदयू कार्यकर्ताओं और ललन सिंह के समर्थकों के बीच खूब गाली गलौज भी हुई है। इसका वीडियो भी सामने आया है। 

वीडियो में स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है कि कैसे ललन सिंह के समर्थक और जदयू के कार्यकर्ता एक-दूसरे से उलझ गए हैं और ललन सिंह पर पार्टी को बर्बाद करने का आरोप लगा रहे हैं। इस दौरान ललन सिंह के खिलाफ नारेबाजी भी हुई। हालांकि उनके समर्थकों ने भी ललन सिंह जिंदाबाद के नारे लगाए। इस दौरान वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने किसी तरह से हालात को काबू में किया। 

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने को लेकर जदयू नेता रंजन पटेल ने कहा कि मेरे पास रोने के सिवा कुछ नहीं है। हमने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाने के लिए लाठीचार्ज और लात-घूंसे सहन किए। 2025 में हमने नीतीश कुमार के लिए घर-घर जाकर वोट मांगे, अगर वे मुख्यमंत्री नहीं रहे, तो बिहार की जनता कहां जाएगी? जदयू में रंजन पटेल अकेले नहीं है, जो नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने का विरोध कर रहे हैं बल्कि पार्टी नेताओं की पूरी लंबी फेहरिश्त है। 

जदयू के एक दूसरे नेता ने कहा कि 2025 का जनादेश नीतीश कुमार के नाम पर मिला है, उन्हें बिहार छोड़कर दिल्ली नहीं जाना चाहिए। नीतीश कुमार अपनी जगह किसी दूसरे नेता को राज्यसभा भेंजे। उन्होंने कहा कि ललन सिंह और संजय झा जदयू को खत्म करने के लिए नीतीश कुमार को राज्यसभा भेज रहे हैं। कहना था कि नीतीश कुमार को यही दोनों नेता राज्यसभा भेज रहे हैं, उन्हीं की सारी साजिश है। जदयू को खत्म करना चाहते हैं।

Web Title: Chief Minister Nitish Kumar's son Nishant Kumar faces the challenge of managing the JDU, which is divided into two factions.

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